सफेदपोशों की छाया में भर्ती व्यवस्था! JPSC और JSSC पर भरोसे का सबसे बड़ा संकट, युवाओं के सपनों पर सवाल…

राँची।झारखण्ड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए भर्ती परीक्षाएं अब केवल प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि भरोसे की लड़ाई का विषय बन चुकी हैं। राज्य की दो सबसे बड़ी चयन एजेंसियां जेपीएससी और जेएसएससी लगातार ऐसे विवादों में घिरी हैं, जिन्होंने पूरी भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुराने घोटालों की सीबीआई जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है कि नई परीक्षाओं में ओएमआर फर्जीवाड़ा, पेपर लीक, परिणामों में गड़बड़ी और कुप्रबंधन जैसे आरोपों ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।
जेपीएससी: दो दशक से विवादों का पीछा नहीं छोड़ रहा आयोग
झारखण्ड लोक सेवा आयोग का नाम पिछले लगभग 20 वर्षों से भर्ती अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा रहा है। आयोग की 11 प्रमुख नियुक्ति परीक्षाएं आज भी सीबीआई जांच के दायरे में हैं। जांच में मेरिट सूची में हेरफेर, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़, प्राप्तांक बढ़ाने और चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप जैसे आरोप सामने आए। झारखण्ड हाईकोर्ट के निर्देश पर पहली और दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा सहित कई मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई।
107 आरोपी, लेकिन सवाल अब भी बरकरार
सीबीआई ने 2012 में जांच शुरू की। लंबी पड़ताल के बाद पहली संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में तत्कालीन अध्यक्ष समेत 37 और दूसरी परीक्षा में 70 लोगों को आरोपी बनाया गया। चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उठे सवाल आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
नई परीक्षाओं में भी वही कहानी?
पुराने मामलों की गूंज के बीच हालिया भर्ती परीक्षाओं ने भी आयोग को कटघरे में ला खड़ा किया है।14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के बाद बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के परिणाम में सामने आए कथित ओएमआर फर्जीवाड़े ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। आरोप है कि एक अभ्यर्थी ने 100 में केवल 32 प्रश्न हल किए, जिनमें महज 15 सही थे, फिर भी उसे सफल घोषित कर दिया गया। यह मामला सामने आने के बाद आयोग को 14वीं पीटी और बैकलॉग मुख्य परीक्षा पर रोक लगानी पड़ी।
एक ही एजेंसी के हाथ में पूरी परीक्षा व्यवस्था!
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आवेदन से लेकर रिजल्ट तक पूरी परीक्षा प्रक्रिया एक ही निजी एजेंसी के नियंत्रण में है। ऑनलाइन आवेदन, एडमिट कार्ड, प्रश्नपत्र छपाई, ओएमआर स्कैनिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट प्रोसेसिंग जैसी पूरी व्यवस्था एक ही एजेंसी के पास होने से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। कटऑफ सार्वजनिक नहीं करना और परिणामों पर सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने जैसी बातें भी विवाद को और गहरा कर रही हैं।
अफसरों के रिश्तेदारों के चयन की चर्चा से बढ़ा विवाद
प्रतियोगी छात्र संगठनों और सोशल मीडिया पर यह दावा भी तेजी से फैल रहा है कि कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के परिजनों का चयन इन परीक्षाओं में हुआ है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन्हीं आरोपों के आधार पर छात्र न्यायिक जांच और स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट की मांग कर रहे हैं।
जेएसएससी भी सवालों के घेरे में
झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग भी पिछले कुछ वर्षों में लगातार विवादों से घिरा रहा है।
सीजीएल परीक्षा पर पेपर लीक का आरोप
2024 की सीजीएल परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों ने पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया। छात्रों के प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक विवाद के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।
फील्ड वर्कर परीक्षा में अभूतपूर्व अव्यवस्था
19 जुलाई 2026 को आयोजित क्षेत्रीय कार्यकर्ता भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा ही नहीं दे सके। आरोप है कि उम्मीदवारों को 300 से 550 किलोमीटर दूर केंद्र दिए गए। कई अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड परीक्षा शुरू होने के समय या परीक्षा समाप्त होने के बाद मिला। संताली भाषा के प्रश्नपत्र में भी त्रुटियों और आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों की शिकायतें सामने आईं।
आशुलिपिक परीक्षा भी हुई रद्द
सचिवालय आशुलिपिक भर्ती परीक्षा में विज्ञापन जारी होने और प्रक्रिया शुरू होने के बाद कार्मिक विभाग ने नियुक्ति प्रस्ताव वापस ले लिया, जिसके कारण पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी और हजारों अभ्यर्थियों की तैयारी बेकार चली गई।
स्थानीय नीति का चक्रव्यूह
जेएसएससी की कई भर्तियां स्थानीय और नियोजन नीति से जुड़े कानूनी विवादों में फंसती रहीं। नियम बदलने, परीक्षाएं रद्द होने और लंबे इंतजार ने प्रतियोगी छात्रों का भरोसा लगातार कमजोर किया है।
सीबीआई जांच में शामिल प्रमुख भर्ती परीक्षाएं
प्रथम संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा
द्वितीय संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा
सहायक एवं कनीय अभियंता नियुक्ति परीक्षा
विश्वविद्यालय डिप्टी रजिस्ट्रार भर्ती
व्याख्याता नियुक्ति परीक्षा
झारखंड पात्रता परीक्षा
प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति परीक्षा
प्रथम सीमित सिविल सेवा परीक्षा
सहकारिता सेवा परीक्षा
चिकित्सक नियुक्ति परीक्षा
बाजार पर्यवेक्षक नियुक्ति परीक्षा
नई परीक्षाएं जिन पर उठ रहे सवाल
झारखण्ड स्वास्थ्य सेवा संयुक्त नियुक्ति परीक्षा (04/2023)
झारखण्ड वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा (04/2024)
झारखण्ड संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा (01/2026)
झारखण्ड संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा (05/2026)
झारखण्ड संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा (06/2026)
बार-बार सामने आए आरोप
मेरिट सूची में कथित हेरफेर
उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ के आरोप
प्राप्तांक बढ़ाकर चयन कराने के आरोप
प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप
मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी
निष्कर्ष
झारखण्ड की भर्ती व्यवस्था आज ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां सबसे बड़ा सवाल केवल परीक्षा कराने का नहीं, बल्कि युवाओं का विश्वास वापस जीतने का है। पुराने मामलों की जांच अभी जारी है, जबकि नई परीक्षाएं भी लगातार विवादों में हैं। ऐसे में प्रतियोगी छात्र पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग को लेकर लगातार मुखर होते जा रहे हैं।

