ट्रेजरी घोटाला: बेनकाब होगा 45 करोड़ का ‘सिंडिकेट’, सीआईडी की एसआईटी ने करीब एक दर्जन आरोपी को लिया रिमांड पर पूछताछ में कई अहम खुलासे की संभावना..
राँची। झारखण्ड के सरकारी खजाने में सेंधमारी करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ अपराध अनुसंधान विभाग की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी कर दी है। हजारीबाग, बोकारो और चाईबासा के पुलिस अधीक्षक कार्यालयों से 45 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी के मामले में एसआईटी अब आर-पार के मूड में है। इस घोटाले की परतों को उखाड़ने के लिए एसआईटी ने एक साथ 9 आरोपियों पर शिकंजा कसा है, जिससे अब इस भ्रष्टाचार के असली चेहरों से नकाब उतरना तय माना जा रहा है।
कस्टडी में ‘महाघोटाले’ के मोहरे: जानिए कौन, कहाँ से आया रिमांड पर
एसआईटी ने अलग-अलग जिलों के कुल 9 आरोपियों को रिमांड पर लेकर आमने-सामने बिठाकर मैराथन पूछताछ शुरू की है।
हजारीबाग से 31 करोड़ की अवैध निकासी में 5 रिमांड पर
रिमांड कस्टडी में मुख्य मास्टरमाइंड शंभु कुमार, रजनीश कुमार सिंह, धीरेंद्र कुमार सिंह, काजल कुमारी और ख़ुश्बू कुमारी है। इन सभी को हजारीबाग केंद्रीय कारागार से राँची लाया गया है।
बोकारो कांड में तीन आरोपी को 3 दिन की रिमांड में:रिमांड कस्टडी में अशोक भंडारी, सतीश कुमार और काजल मंडल है।इस कांड के एक और मास्टरमाइंड कौशल पांडेय से एसआईटी पहले ही रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है।
चाईबासा कांड में एक है,3 दिन की रिमांड पर, आज तीन और आएंगे:रिमांड कस्टडी में आरोपी देव नारायण मुर्मू है। वही गुरुवार को सरकार हेंब्रम, अरुण मार्डी और गोरा चंद मार्डी को आज गुरुवार को राँची मुख्यालय लाया जाएगा।
चार सुलगते सवाल: जिसके इर्द-गिर्द घूम रही है एसआईटी की जांच
अधिकारियों की निगरानी में एसआईटी की विंग सभी 9 आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर मुख्य रूप से इन 4 बिंदुओं पर राज उगलवा रही है।
सेंधमारी का तरीका: एसपी कार्यालयों के एकाउंट्स और ट्रेजरी (कोषागार) के बीच होने वाले ट्रांजेक्शंस में सेंध कैसे लगाई गई? सरकारी सिस्टम के गोपनीय पासवर्ड्स और डीडीओ (आहरण-वितरण पदाधिकारी) के सिग्नेचर इन आरोपियों तक कैसे पहुंचे?
मनी ट्रेल और वित्तीय मैनेजर: सरकारी खातों से गायब की गई 45 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम राशि किन-किन बैंक खातों में डाइवर्ट की गई? इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य वित्तीय मैनेजर कौन है?
‘एक ही मोडस ऑपेरेंडी’ का सस्पेंस: क्या हजारीबाग के शंभु कुमार, बोकारो के अशोक भंडारी और चाईबासा के देव नारायण मुर्मू के पीछे कोई एक ही ‘सुपर मास्टरमाइंड’ काम कर रहा था? तीनों जिलों में ठगी का तरीका एक जैसा होना किस बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है?

