लीज डीड साइन होने के बाद भी क्यों थमा है बालू का उठाव? जानें झारखण्ड के बालू घाटों का पूरा गणित…
राँची।झारखण्ड में बालू घाटों की नीलामी का टेंडर हो चुका है, बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और जिलों के उपायुक्तों (DC) ने सभी कानूनी कागजी कार्रवाई के बाद खनन पट्टा (Mining Lease) पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। इसके बावजूद राज्य के बालू घाटों से बालू का उठाव अब तक शुरू नहीं हो सका है। आखिर सब कुछ फाइनल होने के बाद भी ठेकेदार कदम पीछे क्यों खींच रहे हैं? आइए समझते हैं इसके पीछे की मुख्य वजहें।
1.NGT की आगामी रोक और भारी नुकसान का डर
खनन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और सूत्रों के मुताबिक, जिन कंपनियों ने बालू घाटों के टेंडर लिए हैं, वे जानबूझकर देरी कर रही हैं। इसके पीछे की टाइमिंग सबसे बड़ी वजह है:
सीमित समय: अगले कुछ ही दिनों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा बालू खनन पर मानसून रोक (Monsoon Ban) लागू होने वाली है।
अल्पकालिक संचालन: यदि कंपनियां अभी काम शुरू भी करती हैं, तो वे महज कुछ ही दिन खनन और उठाव कर पाएंगी। इसके बाद एनजीटी की रोक के कारण वैध तरीके से न तो खनन हो सकेगा और न ही परिवहन।
2.अवैध बालू कारोबार और ‘शिकायत’ की राजनीति
बालू कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि कंपनियां खुद काम शुरू करने में देरी कर रही हैं, लेकिन दूसरी तरफ वे एक अलग रणनीति पर काम कर रही हैं।
ठेकेदार कंपनियां अलग-अलग फोरम में अवैध बालू कारोबार की शिकायतें दर्ज करा रही हैं।
मीडिया में लगातार इस तरह की खबरें प्रकाशित कराई जा रही हैं, जिससे खनन विभाग और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
3.CTO (कंसेंट टू ऑपरेट) की प्रक्रिया अधूरी
कागजी तौर पर लीज डीड भले ही साइन हो गई हो, लेकिन तकनीकी रूप से एक बड़ा पेंच अभी भी फंसा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, कई घाटों के लिए सीटीओ (Consent to Operate) की अनिवार्य प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है, जिसके बिना कानूनी रूप से खनन शुरू नहीं किया जा सकता।
आंकड़ों की नजर में झारखण्ड का बालू संकट
खनन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बालू घाटों की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
राज्य में कुल बालू घाटों की संख्या 444
अब तक नीलाम हो चुके बालू घाट 290
डीसी द्वारा साइन किए गए खनन लीज (आधा दर्जन जिलों में) 20 से ज्यादा
बढ़ सकती है कालाबाजारी की आशंका
एनजीटी की रोक से ठीक पहले खनन विभाग द्वारा लीज डीड साइन करना एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा था। लेकिन इसके बावजूद धरातल पर बालू का उठाव शुरू नहीं होने से बाजार में बालू की कृत्रिम किल्लत पैदा हो सकती है, जिससे आने वाले दिनों में बालू की कालाबाजारी और कीमतें बढ़ने की गंभीर आशंका है।

