ताश की बिसात पर बिछा मौत का जाल: पलामू में बलुआ से काटकर प्रभुनाथ रजवार की बेरहमी से हत्या,इलाके सननसी, आरोपी फ़रार

​पलामू।झारखण्ड के पलामू ज़िले के पिपरा थाना क्षेत्र अंतर्गत मधुबना गांव सोमवार की शाम अचानक चीख-पुकार और दहशत से थर्रा उठा, जब एक ग्रामीण पर देसी धारदार हथियार (बलुआ) से ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया गया।मृतक की पहचान गाँव के ही 45-50 वर्षीय खेतिहर मज़दूर प्रभुनाथ रजवार के रूप में हुई है। चश्मदीदों के मुताबिक, प्रभुनाथ शाम के वक्त गाँव के अन्य लोगों के साथ बैठकर ताश खेल रहे थे। माहौल हंसी-मज़ाक का था, तभी गाँव का ही उमेश सिंह हाथों में चमचमाता हुआ बलुआ (देसी धारदार हथियार) लिए वहां आ धमका।

​बिना किसी कहा-सुनी या संभलने के मौके के, उमेश ने प्रभुनाथ पर जानलेवा हमला बोल दिया। पहला वार इतना भयानक था कि प्रभुनाथ का एक हाथ कटकर शरीर से अलग हो गया। इसके बाद सिर और शरीर के कई हिस्सों पर ताबड़तोड़ वार किए गए। लहूलुहान प्रभुनाथ वहीं ज़मीन पर गिर पड़े, और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

​अस्पताल पहुँचते-पहुँचते थम गईं सांसें

घटना के बाद ग्रामीणों की मदद से आनन-फानन में प्रभुनाथ को मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (MMCH) ले जाया गया। लेकिन घाव इतने गहरे थे और खून इतना बह चुका था कि डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल पहुँचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

​पुलिस की छापेमारी जारी, हत्या की वजह अब भी रहस्य

घटना की सूचना मिलते ही पिपरा थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुँची और जांच शुरू की। आरोपी उमेश सिंह वारदात को अंजाम देने के बाद से ही फरार है।

“मधुबना में बलुआ से काटकर एक व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस हर एंगल से मामले की छानबीन कर रही है। फिलहाल हत्या के पीछे का असल कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।”— प्रदीप शर्मा, थाना प्रभारी (पिपरा)

 

​कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

इस दर्दनाक वारदात के बाद ग्रामीणों और परिजनों में भारी आक्रोश है। पिपरा के पूर्व जिला परिषद सदस्य संदीप पासवान ने अस्पताल पहुँचकर परिजनों को ढांढस बंधाया और पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा नहीं दी गई, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

​मृतक प्रभुनाथ रजवार अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। वे गाँव में ही खेती-मज़दूरी कर अपने परिवार का पेट पालते थे। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे मधुबना गाँव में सन्नाटा और दहशत का माहौल व्याप्त है।

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