राँची:अपहरण के आरोपी ने युवती से की शादी, कोर्ट ने किया बरी…अन्य दो खबरें पढ़ें..

 

राँची।राँची सिविल कोर्ट के अपर न्यायायुक्त एके तिवारी की अदालत ने सोमवार को युवती को बहला-फुसलाकर ले जाने के आरोप में ट्रायल फेस कर रहे युवक शांति राम महतो को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी माँ दोनों अपने पूर्व के बयान से पलट गई। दोनों ने अदालत में कहा कि वह अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी। पीड़िता ने यह भी बताया कि वह आरोपी से शादी कर चुकी है। दोनों के बयान के बाद अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।मामले के अनुसार, 26 अप्रैल 2025 को पीड़िता की मां ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को आरोपी बहला-फुसलाकर ले गया।इस आधार पर सुखदेव नगर पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज किया था। जांच के बाद 30 जून 2025 को चार्जशीट दाखिल की गई और 4 अप्रैल 2026 को आरोप तय किया गया।

 

डबल मर्डर के आरोपी को जमानत देने से इनकार

राँची के अपर न्यायायुक्त संजीव झा की अदालत ने सोमवार को बहुचर्चित डबल मर्डर मामले में जेल में बंद आरोपी चंद प्रजापति उर्फ चंदू को जमानत देने से इनकार कर दिया।मामला रातू थाना कांड संख्या 313/2025 से जुड़ा है।आरोपी 9 सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है। आरोपी पर सूचक के पिता और उसके सहयोगी की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने सह आरोपियों के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया और पिस्टल से फायरिंग की। उसके पास से पिस्टल और जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण गोली लगना बताया गया है।

पत्नी की हत्या के आरोप से पति बरी, गवाह मुकरने से टूटा केस

पत्नी की हत्या के आरोप में ट्रायल फेस कर रहे आरोपी पति राजेंद्र यादव को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। घटना ठाकुरगांव थाना क्षेत्र में वर्ष 2020 में घटी थी। मामले के अनुसार, कसिंदर साहू ने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी ऋतु कुमारी की शादी राजेंद्र यादव से हुई थी। वैवाहिक विवाद के बीच 11 मार्च 2020 को वह लापता हो गई और 13 मार्च को उसका शव गांव के एक कुएं से बरामद हुआ। आरोप था कि पति ने हत्या कर शव छिपा दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 10 गवाह पेश किया गया।लेकिन, अधिकांश गवाह अदालत में मुकर गया। स्वयं सूचक कसिंदर साहू भी प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और उसने घटना को सुनी-सुनाई बात बताया। मेडिकल रिपोर्ट में भी शरीर पर बाहरी चोट के स्पष्ट निशान नहीं मिले, जिसका लाभ आरोपी को मिला।

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