JHARKHAND:झारखण्ड में आठ किलोमीटर की दूरी तय करने में झारखण्ड पुलिस को लगे 20 महीने!जानिए क्या है माज़रा:

Akhileshsingh.in
राँची।झारखण्ड में अजब गजब का सिस्टम है हमारा। कहां रेस होना है और कहां सुस्त हो सो जाना है, अच्छे से जानता समझता है हमारा सिस्टम। पुलिस अभी कई मामलों को लेकर रेस दिख रही।अंदरखाने से रेस होने की अलग अलग कहानियां सामने आ रहीं। लेकिन सोचिए इसी पुलिस को आठ किलोमीटर का सफर तय करने में 20 महीने का वक़्त लग गया।ये आठ किलोमीटर का फासला झारखण्ड पुलिस मुख्यालय से सीआईडी मुख्यालय डोरंडा का है।

क्या है जो 8 किलोमीटर चलने में 20 माह लगा !

कोल ट्रांसपोर्टर के बारे में डीजीपी ने मांगी थी जानकारी, जो उनके रिटायरमेंट के बाद तक नहीं मिली मामला राज्य के बड़े कोल ट्रांसपोर्टर अमित अग्रवाल उर्फ सोनू अग्रवाल व अरूण कुमार गुप्ता नाम के व्यक्ति को बॉडीगार्ड देने से जुड़ा है। 12 अक्तूबर 2018 को तात्कालिन डीजीपी डीके पांडेय के कार्यालय से सोनू अग्रवाल व अरूण कुमार गुप्ता को अंगरक्षक उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र लिखकर जानकारी मांगी थी, लेकिन डीके पांडेय के रिटायरमेंट के भी साल भर से अधिक का वक्त बीतने के बाद 6 जून 2020 को सीआईडी के केंद्रीय प्राप्ति एवं निर्गत शाखा को यह पत्र मिला। सीआईडी ने अब इस मामले में नए सिरे से राज्य के सभी जिलों के एसपी को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है। चौकानें वाली बात यह है कि डीजीपी ने जब पत्र लिखकर खुद रिपोर्ट की मांग की थी, तब इसे सीआइडी तक पहुंचने में 20 माह का वक्त कैसे लग गया। बता देंं कि मामले की जानकारी मांगने वाले डीजीपी डीके पांडे 31 मई 2019 को रिटायर हो चुके हैं।

क्या है मामला

सीआइडी के एसपी अंजनी कुमार झा ने पूरे मामले में राज्य के सभी जिलों के एसपी को पत्र लिखा है। पत्र के जरिए बताया गया है, डीजीपी के निर्देशानुसार सोनू अग्रवाल व अरूण कुमार गुप्ता को अंगरक्षक उपलब्ध कराया गया है तो इस संबंध मे जानकारी उपलब्ध कराएं। सीआइडी ने जिलों के एसपी से पूछा है कि जिन लोगों को अंगरक्षक उपलब्ध कराया गया है, उनका नाम, पता व व्यवसाय क्या है। जिस अंगरक्षक को संबंधित लोगों को उपलब्ध कराया गया था, उनका नाम क्या है। दोनों लोगों के पास अंगरक्षक कब से कब तक प्रतिनियुक्त रहें। किसके आदेश से सोनू अग्रवाल व अरूण कुमार गुप्ता को बॉडीगार्ड उपलब्ध कराया गया था, जिले के एसपी या जिला सुरक्षा समिति का ज्ञापांक हो तो इसकी भी जानकारी मांगी गई है। सीआईडी ने जिलों के एसपी से यह भी पूछा है कि जो अंगरक्षक उपलब्ध कराए गए थे उनके पास कौन से हथियार थे, साथ ही क्या कभी अंरगक्षकों को प्रतिनियुक्ति के दौरान राज्य के बाहर भी जाने की अनुमति दी गई थी।

टेरर फंडिंग में आरोपी है सोनू

एनआईए ने मगध- आम्रपाली कोल परियोजना में टेरर फंडिंग के मामले में सोनू अग्रवाल पर चार्जशीट किया है। सोनू की गिरफ्तारी पर फिलहाल राँची हाईकोर्ट ने रोक लगायी है। सोनू अग्रवाल की गिनती बड़े कोल ट्रांसपोर्टरों में होती है। सोनू को पूर्व में रांची, हजारीबाग समेत अन्य जिलों से बॉडीगार्ड दिया गया था।हालांकि एनआईए की चार्जशीट में नाम आने के बाद राँची समेत अन्य जिलों के बॉडीगार्ड वापस ले लिए गए थे।