संवेदनशीलता की मिसाल: प्रोटोकॉल तोड़ सीढ़ियों पर बैठ गए पलामू उपायुक्त,दिव्यांग महिला की सुनी फरियाद

 

पलामू।झारखण्ड के पलामू समाहरणालय सभागार में बुधवार को आयोजित ‘जन समाधान दिवस’ प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का गवाह बना।जिले के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने प्रोटोकॉल के दायरे से बाहर निकलकर समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उपायुक्त ने न केवल एक दिव्यांग महिला की फरियाद सुनी, बल्कि उसकी समस्या के समाधान के लिए खुद समाहरणालय की सीढ़ियों पर बैठकर यह सिद्ध किया कि प्रशासन जनता का सेवक है।

दरअसल कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त को सूचना मिली थी कि शहर की रहने वाली एक दिव्यांग महिला शीला कुमारी दोनों पैरों से अक्षम होने के कारण सभागार तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां नहीं चढ़ पा रही हैं और नीचे इंतजार कर रही हैं। यह सुनते ही उपायुक्त ने क्षण भर की भी देरी नहीं की। उन्होंने तुरंत ‘जन समाधान दिवस’ के कार्यक्रम को रोक दिया और औपचारिकताओं को छोड़कर नीचे की ओर दौड़ पड़े।उन्होंने महिला से मुलाकात कर उसकी समस्याएं बड़े ध्यान से सुनीं। DC को सीढ़ियों पर बैठकर एक दिव्यांग महिला की बात सुनते देख मौके पर मौजूद अन्य फरियादी और अधिकारी भी हतप्रभ रह गए।

उपायुक्त ने महिला की समस्या को सुनने के बाद मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने न केवल समस्या का निवारण सुनिश्चित किया, बल्कि महिला को आश्वस्त किया कि “अब उन्हें अपनी फरियाद लेकर दोबारा कार्यालय आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।” उपायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि वे जनता के मामलों को लंबित न रखें और नियमानुसार त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।

‘जन समाधान दिवस’ में उपायुक्त ने एक-एक कर अन्य फरियादियों की भी समस्याएं सुनीं और कई मामलों का ऑन द स्पॉट निष्पादन किया। गंभीर मामलों में संबंधित अंचलाधिकारियों को फोन कर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया गया. कार्यक्रम में आंगनबाड़ी सेविका चयन में धांधली, जमीन कब्जा, भूमि पैमाइश, गलत लगान रसीद, रास्ता विवाद, भू-अर्जन मुआवजे में देरी और दोहरी जमाबंदी जैसे महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई हुई। उपायुक्त ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी कि यदि जनता की समस्याओं के निवारण में कोई लापरवाही बरती गई, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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