पशु तस्करों ने दी एक लाख रूपये की लालच, लेकिन ग्रामीणों ने नहीं बदला इरादा,मवेशियों से भरा ट्रक पुलिस को सौंपा…
गुमला। झारखण्ड के गुमला जिले में पशु तस्करों ने ग्रामीणों को एक लाख की लालच दी।लेकिन ग्रामीणों ने तस्करों की लालच को ठुकराते हुए ट्रक में ठूंस के लादे गये मवेशियों से भरी ट्रक को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया।यह कार्रवाई गुमला के बाइपास रोड अरमई के समीप की गई। सोमवार को गुमला के बाइपास सड़क पर उस वक्त हलचल मच गई, जब अरमई गांव के पास ग्रामीणों ने मवेशियों से ठसा-ठस भरे एक संदिग्ध ट्रक को घेर लिया।ट्रक पर छत्तीसगढ़ राज्य का नंबर प्लेट लगा था।मिली जानकारी के अनुसार, ट्रक में मवेशियों को ठूंस कर लादकर वध के लिए सिसई होते हुए राँची ले जाया जा रहा था। इसमें बंगाल भी मवेशियों को ले जाने की योजना थी।ग्रामीणों ने ट्रक को रोका। उसकी जांच की, तो उसमें गाय मिली। इसके बाद इसकी सूचना पुलिस को दी गई।पुलिस मौके पर पहुंची और मवेशियों से भरी ट्रक को जब्त कर उर्मी के पुलिस टीओपी ले आई।जहां जिम्मेनामा के आधार पर सभी गायों को किसानों के बीच बांट दिया गया।
बताया जा रहा है कि ग्रामीणों को पहले ही इस ट्रक की भनक लग चुकी थी।जैसे ही ट्रक बाइपास से गुजरा, लोगों ने पीछा शुरू कर दिया और अरमई के पास बैरिकेडिंग कर उसे रोक लिया।मौके पर पहुंचते ही स्थिति तनावपूर्ण हो गयी।लेकिन ग्रामीण पीछे नहीं हटे।घटना की सूचना मिलते ही गुमला थाना की टीम एसआइ हेमा देवी के नेतृत्व में मौके पर पहुंची और ट्रक को कब्जे में ले लिया।इसी दौरान एक चौंकाने वाला आरोप भी सामने आया।
ग्रामीणों का कहना है कि तस्करों ने ट्रक और चालक को छोड़ने के लिए एक लाख तक की पेशकश की।लेकिन लोगों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। बताया जा रहा है कि ट्रक छत्तीसगढ़ के लोदाम टांगरटोली से निकला था और राँची की ओर बढ़ रहा था। वहीं, ट्रक की रेकी कर रही एक कार मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। ग्रामीणों के विरोध के चलते मवेशियों को किसी अन्य थाना ले जाने के बजाय अरमई पिकेट में ही उतारा गया।ट्रक के अंदर 35 मवेशियों को बेहद अमानवीय तरीके से ठूंसा गया था।जिनमें कई घायल हालत में मिले।
झारखण्ड में गायों की तस्करी पर रोक है। इसके बाद भी रायडीह थाना के समीप से होकर इनकी तस्करी होती है। बताया जा रहा है कि हर सप्ताह छत्तीसगढ़ से गायों से भरा ट्रक निकलती है, जो झारखण्ड के सीमावर्ती रायडीह से होकर गुमला, राँची सहित बंगाल तक जाती है। गायों की अवैध तस्करी के इस खेल में गुमला के एक नेताजी की भूमिका संदेह में है। हालांकि, समय समय पर पुलिस गायों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते रही है। लेकिन कार्रवाई करने वाले थानेदारों को रायडीह से हटवाने का भी खेल ऊपर से होता रहा है।

