झारखण्ड हाईकोर्ट से अधिवक्ता महेश तिवारी को बड़ी राहत…वकालत लाइसेंस निलंबन के आदेश पर रोक

 

राँची। झारखण्ड हाईकोर्ट ने अधिवक्ता महेश तिवारी के वकालत लाइसेंस निलंबन मामले में सुनवाई करते हुए उन्हें महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्रदान की है।जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रार्थी का पक्ष विस्तार से सुना और इसके बाद स्टेट बार काउंसिल द्वारा जारी निलंबन आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। इस आदेश के बाद महेश तिवारी के दोबारा वकालत शुरू करने का रास्ता फिलहाल साफ हो गया है।निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगाने के साथ ही माननीय अदालत ने प्रतिवादी झारखण्ड स्टेट बार काउंसिल को इस मामले में अपना विस्तृत पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि किन परिस्थितियों और विधिक आधारों पर लाइसेंस निलंबन की यह कार्रवाई की गई। काउंसिल को जल्द ही अपना जवाब दाखिल करना होगा, जिसके बाद इस मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की जाएगी।

बता दें झारखण्ड हाईकोर्ट के अधिवक्ता और झारखण्ड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य महेश तिवारी ने अपने लाइसेंस के निलंबन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।दरअसल,राँची सिविल कोर्ट ने एक पुराने मामले में महेश तिवारी को दो वर्ष की सजा सुनाई थी। इसी सजा के आधार पर झारखण्ड स्टेट बार काउंसिल ने एडवोकेट एक्ट की धारा-24ए (Section 24A) के तहत कार्रवाई करते हुए उनका लाइसेंस दो वर्षों के लिए निलंबित कर दिया था। प्रार्थी ने अपनी याचिका में इस कार्रवाई को अनुचित और नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध बताते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी।

हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश को महेश तिवारी के लिए एक बड़ी प्रारंभिक जीत माना जा रहा है।अब बार काउंसिल द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब के आधार पर ही अदालत आगे का रुख स्पष्ट करेगी।यह मामला राज्य के वकीलों के बीच काफी सुर्खियों में है, क्योंकि यह सीधे तौर पर एक अधिवक्ता के पेशे और विधिक नियमों की व्याख्या से जुड़ा हुआ है।

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