देवघर में साइबर अपराध पर पुलिस और बैंक का बड़ा अभियान..संदिग्ध ‘म्यूल खातों’ पर कड़ी नजर, सख्त कार्रवाई की तैयारी..

–पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक, एटीएम से लेकर बैंक सुरक्षा तक की गई समीक्षा


देवघर।झारखण्ड के देवघर जिले में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा चाक-चौबंद करने के लिए देवघर पुलिस ने शुक्रवार को एक बड़ा और ठोस कदम उठाया है। एसपी सौरभ की अध्यक्षता में जिले के एलडीएम एवं विभिन्न प्रमुख बैंकों के शाखा प्रबंधकों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध ‘म्यूल खातों’ पर नजर रखने और नियंत्रण के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना है।बैठक में साइबर सुरक्षा,एटीएम सुरक्षा और बैंक भौतिक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई और महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।

साइबर सुरक्षा: ‘म्यूल खातों’ पर सख्त नजर

साइबर धोखाधड़ी रोकथाम के लिए बैठक में सबसे ज्यादा जोर संदिग्ध बैंक खातों की पहचान और उन पर कार्रवाई किया गया साथ ही आगे भी पुलिस कार्रवाई की तैयारी में है।

एसपी सौरभ ने कई निर्देश दिए

–प्रत्येक बैंक को साइबर अपराध से जुड़े म्यूल खातों की पहचान करने और पुलिस को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा। यह अधिकारी पुलिस के साथ सीधा तालमेल बनाए रखेगा, ताकि ऐसे खाताधारकों के खिलाफ त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

–किसी भी संदिग्ध खाते में असामान्य लेन-देन का पता चलते ही बैंकों को तुरंत साइबर पुलिस थाने से संपर्क करना होगा।

–जिन बैंक शाखाओं में अप्रत्याशित रूप से बहुत अधिक संख्या में नए खाते खुल रहे हों,उन सभी खातों के लेन-देन पर विशेष निगरानी रखी जाए।

–अगर किसी बैंक के एटीएम कियोस्क पर असामान्य रूप से लेन-देन की संख्या बढ़ जाए, तो बैंक को तुरंत इसकी निगरानी शुरू कर देनी चाहिए।

–विभिन्न बैंकों के सीएसपी (कस्टमर सर्विस पॉइंट) पर भी संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखने के निर्देश दिए गए।

–नया खाता खोलते समय ग्राहक का भौतिक सत्यापन और पूर्ण केवाईसी/ई-केयूसी प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी। सभी दस्तावेज शाखा द्वारा सुरक्षित रखे जाएंगे।

एटीएम सुरक्षा को दुरुस्त करने के निर्देश

एटीएम से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए:

–सभी बिना गार्ड वाले एटीएम कियोस्क में गार्ड की तैनाती सुनिश्चित करनी होगी।
–हर एटीएम कियोस्क के अंदर और बाहर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि पूरी निगरानी रिकॉर्ड की जा सके।

बैंकों की भौतिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान

बैठक में बैंकों की भौतिक सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने पर भी जोर दिया गया:

–सभी बैंक शाखाओं में पर्याप्त और सक्रिय सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
–अलार्म सिस्टम को हमेशा कार्यशील स्थिति में रखा जाए।
–प्रत्येक बैंक शाखा के अंदर और बाहर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, ताकि बैंक परिसर और उसके आसपास की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
–पुलिस टीमें नियमित रूप से बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट करेंगी।

इस बैठक के माध्यम से देवघर पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक समन्वित और सशक्त मोर्चा खोलने का संकेत दिया है। बैंकों के साथ मिलकर काम करने की इस पहल से अपराधियों के लिए ’म्यूल खातों’ का इस्तेमाल करना मुश्किल होने की उम्मीद है, जिससे आम जनता की कड़ी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

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