राँची में RSS मुख्यालय के बाद अगला टारगेट यूपी के कानपुर या लखनऊ दहलाने की थी साजिश ! दुबई से चला ‘ऑपरेशन आग’,पुलिस की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी अमन अंसारी ने खोला राज…
झारखण्ड न्यूज exclusive
राँची। झारखण्ड की राजधानी राँची में एक बहुत बड़ी सांप्रदायिक और हिंसक साजिश का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।सात समंदर पार बैठे रिमोट कंट्रोल आकाओं के इशारे पर राँची स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय को दहलाने की पूरी क्रोनोलॉजी बेनकाब हो गई है। राँची पुलिस की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी अमन अंसारी उर्फ गोलू ने पूछताछ में जो राज उगले हैं,उससे झारखण्ड पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। इस पूरी वारदात के पीछे दुबई का सिंडिकेट, मुंबई की प्लानिंग, फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट्स का डिजिटल चक्रव्यूह और राँची के बाद यूपी के कानपुर-लखनऊ को दहलाने का अगला खतरनाक ब्लूप्रिंट छिपा हुआ था।
मुफ़लिसी से जुर्म की दुनिया तक: ओमान और दुबई का सफर
सातवीं पास मुख्य आरोपी अमन अंसारी उर्फ गोलू उम्र मात्र 21 साल, मूल रूप से न्यू आजाद बस्ती, लोहरदगा का रहने वाला है।उसने पुलिस को बताया कि जब वह 7वीं कक्षा में था, तभी उसके पिता स्व.सनीफ मियाँ की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उसकी मां ने न्यू आजाद बस्ती के ही नसीम खान से दूसरी शादी कर ली।लॉकडाउन के दौरान पढ़ाई छूटने के बाद वह पैसे कमाने मुंबई चला गया, जहां उसने डंकन रोड नागपाड़ा में रहकर एसी रिपेयरिंग का काम सीखा।साल 2024 में वह विजिट वीजा पर ओमान भी गया, लेकिन काम न मिलने पर वापस लौट आया। इसके बाद सितंबर 2025 में वह दुबई गया,जहां उसने ‘मरमुम स्टार टेक्निकल सर्विस एलएलसी’ में काम किया। यहीं पर उसकी मुलाकात बिहार के सुलेमान अंसारी,यूपी के मो.आजम और केरल के एक सुपरवाइजर अहमद अली से हुई। 1 जनवरी 2026 को वीजा खत्म होने पर उसे भारत वापस भेज दिया गया, लेकिन तब तक वह देश विरोधी ताकतों के संपर्क में आ चुका था।
‘राणा जी’ की एंट्री और 50-50 हजार का खूनी लालच
दुबई से लौटने के बाद जब अमन लोहरदगा में रह रहा था, तभी दुबई वाले अहमद अली के माध्यम से आवेश राजपूत उर्फ राणा जी उर्फ हुसैन और सहजाद उर्फ शहनवाज आलम उर्फ भट्टी ने उससे संपर्क किया। 5 जून 2026 को राणा जी ने व्हाट्सएप कॉल कर अमन से कहा कि दो-तीन लड़कों का इंतजाम करो, झारखण्ड में कुछ बड़ी घटना करवानी है, जिसके लिए पंजाब से हथियार लाना होगा। जैसा-जैसा बताऊंगा, वैसा काम करोगे तो अच्छा खासा पैसा दूंगा। पैसों की लालच में आकर अमन इस खूनी खेल के लिए तैयार हो गया और उसने अपने दो दोस्तों सैफ अंसारी और सायम सुजान को भी इस साजिश में शामिल कर लिया। साजिश के लिए शुरुआती खर्च के तौर पर राणा जी ने लोहरदगा बस स्टैंड के पास एक मोबाइल दुकान के स्कैनर पर 5-5 हजार रुपये भिजवाए।
फर्जी सिम और व्हाट्सएप का ‘डिजिटल चक्रव्यूह’
08 जून 2026 को अमन अमृतसर (पंजाब) गया, लेकिन वहां हथियार न मिलने के कारण राणा जी ने उसे वापस बुला लिया। इसके बाद साजिश को डिजिटल रूप दिया गया। राणा जी के कहने पर एक नया व्हाट्सएप अकाउंट बनाना था। इसके लिए अमन ने अपने दोस्त हैदर अली से एक गिरवी रखा हुआ मोबाइल और सिम कार्ड लिया। अमन ने उस सिम का ओटीपी (OTP) राणा जी को भेज दिया। अब वह व्हाट्सएप अकाउंट पूरी तरह से राणा जी के नियंत्रण में था, जबकि मोबाइल और सिम अमन के पास था ताकि वे पुलिस की ट्रैकिंग से बच सकें।दिनांक 15 जून 2026 की रात को राणा जी ने उसी व्हाट्सएप पर राँची स्थित आरएसएस (RSS) कार्यालय का फोटो और लोकेशन भेजा और सीधे आदेश दिया कि “वहां बम फेंककर आग लगा देना है। काम पूरा होने पर तुम तीनों को 50-50 हजार रुपये मिलेंगे।”
होटल का कमरा नंबर 202 और ‘लाइव पेट्रोल बम ट्रेनिंग’
होटल के कमरे नंबर 202 में बैठकर तबाही की स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी और शहर को इसकी भनक तक नहीं थी।मुख्य आरोपी अमन ने खुलासा किया है कि राणा जी का आदेश मिलते ही तीनों आरोपी हरकत में आ गए और सामान की खरीदारी की। 16 जून 2026 की शाम को तीनों आरोपी टुकटुक (ऑटो) से राँची के लेक रोड पहुंचे। वहां एक दुकान से उन्होंने खाली बोतलें, 130 रुपये का पेट्रोल, लट्टू का धागा (फीता) और एक झोला खरीदा। इसके बाद वे कांटा टोली स्थित ‘रॉयल इन होटल’ पहुंचे और अपने असली आधार कार्ड देकर कमरा नंबर 202 बुक किया। रात करीब 9 बजे राणा जी और भट्टी ने उन्हें व्हाट्सएप वीडियो कॉल किया और लाइव ट्रेनिंग देते हुए बताया कि बोतलों और पेट्रोल का इस्तेमाल कर ‘पेट्रोल बम’ कैसे तैयार करना है।
वारदात को अंजाम: वीडियो रिकॉर्डिंग और हमला
रात करीब 11 बजे सायम सुजान ने रैपिडो ऐप से एक कार (सेन्ट्रो) बुक की। तीनों कार में बैठकर आरएसएस कार्यालय से 50 मीटर पहले रुके। सायम सुजान कार में ही रुककर नजर रखने लगा, जबकि अमन अंसारी और सैफ अंसारी पेट्रोल बम लेकर आगे बढ़े। अमन ने सबूत के तौर पर सरहद पार बैठे आकाओं को दिखाने के लिए मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया और सैफ अंसारी ने जलता हुआ पेट्रोल बम सीधे कार्यालय के ऊपर फेंक दिया।बम फेंकने के बाद तीनों तुरंत कार से वापस होटल भागे और सो गए।
सबूत मिटाने की साजिश
वारदात के बाद आरोपियों ने होटल लौटकर रात बिताई।अगली सुबह उन्होंने होटल छोड़ा और सबूत मिटाने के लिए खादगढ़ा बस स्टैंड के पास एक निर्माणाधीन बिल्डिंग के पीछे जाकर अपने कपड़े बदल लिए और पुराने कपड़ों को प्लास्टिक के पोस्टर में लपेटकर छिपा दिया।लेकिन आरोपियों को अंदाजा नहीं था कि पुलिस उनकी हर गतिविधि पर नजर रख रही है
यूपी दहलाने की थी अगली तैयारी, गझहंडी में दबोचे गए
आरएसएस कार्यालय पर हमला करने के बाद इन अपराधियों के हौसले बुलंद थे। राणा जी ने इन्हें अगला टारगेट देते हुए तुरंत कानपुर और फिर वहां से लखनऊ जाने का आदेश दिया, जहां एक और बड़ी घटना को अंजाम देना था। घटना के अगले दिन यानी 17 जून को दोपहर करीब 2:45 बजे अमन और सैफ कानपुर जाने वाली ट्रेन में बैठ गए। लेकिन राँची पुलिस पूरी तरह अलर्ट पर थी। जैसे ही ट्रेन कोडरमा से आगे गझहंडी स्टेशन के पास पहुंची, पुलिस टीम को देखकर दोनों आरोपियों ने ट्रेन से कूदकर भागने की कोशिश की। लेकिन मुस्तैद पुलिस बल ने चारों तरफ से घेराबंदी कर अमन अंसारी और सैफ अंसारी को रंगे हाथों दबोच लिया।
पुलिस की बड़ी कामयाबी और अकाट्य सबूत
पुलिस ने आरोपियों के पास से उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं, जिनमें घटना के समय बनाए गए वीडियो, मुख्य साजिशकर्ता राणा जी के चैट और व्हाट्सएप कॉल लॉग्स के रूप में पुख्ता और अकाट्य डिजिटल सबूत मौजूद हैं। फिलहाल पुलिस मुख्य साजिशकर्ता राणा जी उर्फ राणा हुसैन उर्फ आवेश राजपूत व सहजाद उर्फ शहनवाज आलम उर्फ भट्टी की गिरफ्तारी के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। राँची पुलिस की त्वरित कार्रवाई से देश को दहलाने की एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश नाकाम हो गई है।अब झारखण्ड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी घटना के बाद आरोपी से मिले इनपुट पर आगे की कार्रवाई में जुटी है।

