पत्नी और दो पुजारियों के बाद बेटे को भी मारी गोली, बच्चों को बनाया बंधक… चार हत्याओं के आरोपी को 8 घंटे बाद पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पूजा-पाठ के दौरान शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में खूनी वारदात में बदल गया। घर में धार्मिक अनुष्ठान करा रही पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या करने के बाद आरोपी अरविंद सिंह ने अपने ही बच्चों को घर के अंदर बंधक बना लिया। करीब सात से आठ घंटे तक पुलिस और आरोपी के बीच गतिरोध चलता रहा। पुलिस लगातार उसे सरेंडर करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए समझाती रही, लेकिन वह बाहर आने को तैयार नहीं हुआ। आखिरकार घर के अंदर से गोली चलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और मुठभेड़ में आरोपी को गोली लग गई। अस्पताल ले जाने पर उसकी मौत हो गई।
मारे गए पत्नी और दोनों पुजारी
इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी का एक बेटा भी गंभीर रूप से घायल हुआ। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बंधक बनाए गए बच्चों में से एक पर भी गोली चला दी थी। घायल बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी भी जान नहीं बच सकी। वहीं दो बच्चियों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया और अस्पताल में भर्ती कराया गया।
आरोपी और उसकी पत्नी
पूजा के दौरान पंडितों से हुआ विवाद
घटना मंगलवार शाम अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में हुई। पुलिस के मुताबिक, अरविंद सिंह बाजार से घर लौटा तो वहां उसकी पत्नी बबीता सिंह धार्मिक अनुष्ठान करा रही थी। पूजा के लिए दो पुजारी महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा समेत अन्य लोग मौजूद थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अरविंद ने पुजारियों से आधार कार्ड मांगने को लेकर सवाल किया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।
विवाद इतना बढ़ा कि अरविंद ने कथित तौर पर लाइसेंसी हथियार से फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से उसकी पत्नी बबीता सिंह और दोनों पुजारी महेंद्र पाठक व अखिलेश मिश्रा की मौत हो गई। घटना के दौरान मौजूद अन्य पुजारी वहां से भाग निकले।
भाई की मौत के बाद हो रही थी पूजा
पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि घर में हो रहा धार्मिक अनुष्ठान अरविंद के भाई गुड्डू सिंह की मौत के बाद आयोजित किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, गुड्डू की करीब दो वर्ष पहले गोली मारकर हत्या हुई थी और परिवार उसकी शांति के लिए पूजा करा रहा था। अरविंद कथित तौर पर इस पूजा का विरोध कर रहा था। हालांकि पुलिस ने अभी विवाद और हत्या की पूरी वजह को अंतिम रूप से स्पष्ट नहीं किया है।
तीन बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया आरोपी
तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने बच्चों को लेकर घर के भीतर एक कमरे में बंद हो गया। उसके पास हथियार होने की सूचना के बाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया। कई थानों की पुलिस के साथ वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस की प्राथमिकता बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना थी।
करीब सात घंटे तक पुलिस आरोपी से बातचीत कर उसे आत्मसमर्पण के लिए मनाती रही। पुलिस, परिजनों और अन्य लोगों ने भी उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह बच्चों को छोड़ने और बाहर आने के लिए तैयार नहीं हुआ।स्थानीय लोगों के अनुसार, वह सुबह तक इंतजार करने की बात कह रहा था।
अचानक कमरे के अंदर से गूंजी गोली, फिर पुलिस ने लिया एक्शन
इसी बीच कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने बेटे को गोली मार दी थी। इसके बाद बच्चों की जान को तत्काल खतरा देखते हुए पुलिस टीम एक्शन में आई और घर में प्रवेश की कार्रवाई शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल करते हुए फोर्स एंट्री की। इसी दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर भी फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हो गया।घायल आरोपी और उसके बेटे को अस्पताल ले जाया गया, जहां दोनों की मौत हो गई। वहीं उसकी दो बेटियों को सुरक्षित बचा लिया गया।
पूरे इलाके में दहशत, पुलिस जांच में जुटी
एक ही घर में पत्नी ,बेटे और दो पुजारियों की हत्या, बच्चों को बंधक बनाए जाने और कई घंटे चले पुलिस ऑपरेशन से शंभूपुर गांव में दहशत का माहौल रहा। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। अब जांच में यह स्पष्ट किया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत किस बात से हुई, फायरिंग का पूरा क्रम क्या था और घटना में इस्तेमाल हथियारों की भूमिका क्या रही। पुलिस और फॉरेंसिक टीम मामले की जांच कर रही है।

