सिपाही भर्ती पेपर लीक का पैसा जमीन-जायदाद में खपाने का आरोप, ED का बड़ा एक्शन; 2.01 करोड़ की पांच संपत्तियां जब्त

 

ब्लैकलिस्टेड कंपनी के मालिक ने दूसरी कंपनी के नाम पर हासिल किया था प्रश्नपत्र छपाई का ठेका, मिले 5.9 करोड़ के अग्रिम भुगतान में से 2.01 करोड़ रुपये शेल कंपनियों के जरिए किए गए डायवर्ट

पटना। बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आर्थिक लेन-देन की कड़ियां खंगालते हुए बड़ी कार्रवाई की है। परीक्षा के प्रश्नपत्र छपाई के नाम पर मिले करोड़ों रुपये के अग्रिम भुगतान को कथित तौर पर फर्जी कंपनियों के जरिए इधर-उधर करने और उससे संपत्तियां खरीदने के मामले में ईडी ने 2.01 करोड़ रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। ये संपत्तियां मुख्य आरोपी कौशिक कुमार कर की कंपनी एम/एस एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज बताई गई हैं।

ईडी की जांच में सामने आया है कि सिपाही भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र छपाई के ठेके के लिए करीब 5.9 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया गया था। आरोप है कि इस रकम में से 2.01 करोड़ रुपये विभिन्न शेल कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह भेजे गए। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस रकम का इस्तेमाल अवैध कमाई की पहचान छिपाने और उससे अचल संपत्तियां अर्जित करने में किया गया।

ब्लैकलिस्टेड कंपनी के बाद दूसरी कंपनी के नाम पर लिया ठेका

इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी कंपनी बदलकर ठेका हासिल करने की है। ईडी के अनुसार, कौशिक कुमार कर पहले ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक थे। आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक से जुड़े पूर्व मामलों में संलिप्तता के कारण उनकी कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसके बावजूद कथित तौर पर कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से बिहार केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) की परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का ठेका हासिल कर लिया गया।

5.9 करोड़ के भुगतान से शुरू हुई पैसों की हेराफेरी की जांच

जांच में करीब 5.9 करोड़ रुपये के अग्रिम भुगतान का पता चला है। ईडी का आरोप है कि इसमें से 2.01 करोड़ रुपये अलग-अलग शेल कंपनियों के जरिए डायवर्ट किए गए। एजेंसी अब इस बात की जांच कर रही है कि रकम किन-किन खातों और कंपनियों के माध्यम से स्थानांतरित की गई तथा इसका इस्तेमाल कहां किया गया।

पेपर लीक से अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित, अब मनी ट्रेल पर कार्रवाई

गौरतलब है कि बिहार केंद्रीय चयन पर्षद की सिपाही भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इस घटना से न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और भविष्य भी प्रभावित हुआ। मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू की थी।

अब ईडी ने कथित अपराध से अर्जित धन से जुड़ी पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। एजेंसी का कहना है कि धन शोधन के जरिए अर्जित संपत्तियों पर रोक लगाने की दिशा में यह कार्रवाई की गई है। मामले में पैसों के लेन-देन और अन्य संभावित लाभार्थियों की भूमिका की जांच जारी है।

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