AK-47 तस्करी का नेटवर्क: मुखिया पुत्र से वकील तक पहुंची NIA, हाजीपुर से फरार आरोपी गिरफ्तार
मुजफ्फरपुर में एके-47 की बरामदगी से शुरू हुई जांच की परतें लगातार खुल रही हैं। हथियारों की खरीद-बिक्री, अंतरराज्यीय तस्करी और कथित तौर पर हथियारों से कमाई गई रकम को जमीन के कारोबार में लगाने तक की कड़ियां सामने आई हैं। मुखिया के बेटे से लेकर दीमापुर के गैराज संचालक और अब हाजीपुर के अधिवक्ता तक जांच एजेंसी पहुंच चुकी है। करीब दो साल से चल रही जांच में NIA ने फरार आरोपी संदीप कुमार सिन्हा को गिरफ्तार किया है। आखिर कैसे खुला हथियारों के इस नेटवर्क का राज और किस तरह जांच की आंच एक हाईकोर्ट के वकील तक पहुंची?
पटना/मुजफ्फरपुर।बिहार में प्रतिबंधित एके-47 राइफल की तस्करी का मामला महज हथियारों की बरामदगी तक सीमित नहीं रहा। इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे ऐसे नाम सामने आते गए,जिनकी भूमिका ने जांच एजेंसियों को भी चौंकाया। कहीं मुखिया का बेटा हथियार छिपाने की कड़ी में सामने आया तो कहीं असम के दीमापुर में गैराज चलाने वाला व्यक्ति हथियारों की सप्लाई का अहम किरदार निकला। अब इसी मामले में हाजीपुर के अधिवक्ता संदीप कुमार सिन्हा की गिरफ्तारी ने पूरे नेटवर्क को फिर चर्चा में ला दिया है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 29 अक्टूबर 2026 की रात करीब 10:30 बजे वैशाली जिले के टाउन थाना क्षेत्र से संदीप कुमार सिन्हा को गिरफ्तार किया। वह हाजीपुर के एसडीओ रोड, मकसूदपुर का रहने वाला है। 30 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में NIA ने बताया कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से एक नेक्सॉन कार, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और मेमोरी कार्ड जब्त किए गए हैं। NIA का आरोप है कि संदीप कुमार सिन्हा अन्य आरोपियों के साथ मिलकर नागालैंड से बिहार तक प्रतिबंधित बोर के अत्याधुनिक हथियारों, खासकर एके-47 राइफल की तस्करी की साजिश में शामिल था।
ट्रेन के रास्ते आते थे हथियारों के पुर्जे, जरूरत पड़ने पर बन जाती थी एके-47
इस पूरे मामले की शुरुआत 7 मई 2024 को हुई थी। मुजफ्फरपुर के फकुली थाना क्षेत्र में पुलिस को हथियार तस्करी से जुड़ा इनपुट मिला। बिहार एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विकास कुमार और सत्यम कुमार को पकड़ा। विकास के पास से एके-47 का बट और लेंस बरामद हुआ। पूछताछ में उसने बताया कि हथियार के पुर्जे उसे कुढ़नी प्रखंड के मलकौनी निवासी देवमणि राय उर्फ अनीश ने दिए थे।
इसके बाद पुलिस देवमणि तक पहुंची। पूछताछ में उसने मरघटिया पुल के नीचे हथियार छिपाकर रखने की जानकारी दी। पुलिस ने वहां छापेमारी की तो एके-47 राइफल बरामद हुई। जब्त बट और लेंस को जोड़कर उसी राइफल का हिस्सा होने की पुष्टि हुई।
यहीं से पुलिस को हथियारों की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का सुराग मिला। जांच में सामने आया कि हथियारों को पूर्वोत्तर राज्यों, खासकर नागालैंड के दीमापुर से बिहार लाया जाता था। पुलिस की नजरों से बचने के लिए राइफल को अलग-अलग पुर्जों में बांट दिया जाता था। फिर ट्रेन और दूसरे परिवहन माध्यमों से इन पुर्जों को बिहार पहुंचाया जाता था। जरूरत के मुताबिक इन्हें जोड़कर पूरी राइफल तैयार कर दी जाती थी।
सात लाख रुपये में खरीदी गई थी एके-47, दीमापुर के गैराज तक पहुंची पुलिस
पूछताछ में विकास कुमार ने दीमापुर में रहने वाले बिहार के गोपालगंज निवासी अहमद अंसारी का नाम लिया। बताया गया कि उसने अहमद अंसारी से करीब सात लाख रुपये में एके-47 खरीदी थी। इसके बाद बिहार एसटीएफ ने दीमापुर में लंबे समय तक कैंप किया और अहमद अंसारी को गिरफ्तार किया।
अहमद अंसारी की गिरफ्तारी ने इस बात की पुष्टि की कि हथियारों की सप्लाई का नेटवर्क बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी जड़ें पूर्वोत्तर राज्यों तक फैली थीं। जांच एजेंसियों को हथियारों की खरीद, परिवहन और बिहार में उनकी सप्लाई से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिलीं।
मुखिया का बेटा निकला अहम कड़ी, घर तक पहुंची NIA की रेड
इस मामले में देवमणि राय का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर भी हलचल मच गई। देवमणि, मुजफ्फरपुर के कुढ़नी पंचायत के मुखिया नंदकिशोर यादव उर्फ भोला राय का बेटा है।
NIA ने दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में मुखिया के घर पर छापेमारी की थी। इस दौरान नकदी, महत्वपूर्ण दस्तावेज और थार गाड़ी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। मुखिया ने पूछताछ में मामले की जानकारी होने से इनकार किया था और बरामद नकदी के संबंध में दस्तावेज देने की बात कही थी।
इसके बाद जांच एजेंसी ने देवमणि से जुड़े लोगों की भी पड़ताल शुरू की। उसके करीबी लोगों, गांव के युवकों और एक पुराने जनप्रतिनिधि समेत राजनीतिक कार्यकर्ता से भी पूछताछ की गई। जांच का दायरा लगातार बढ़ता गया।
जमीन के कारोबार में लगाई जा रही थी हथियारों से कमाई गई रकम!
अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अधिवक्ता संदीप कुमार सिन्हा से जुड़ती है। जांच के दौरान देवमणि राय ने कथित तौर पर संदीप कुमार सिन्हा का नाम लिया था। आरोप था कि हथियारों के इस कारोबार से अर्जित रकम को जमीन के कारोबार में निवेश किया जाता था।
इसी जानकारी के आधार पर 18 दिसंबर 2024 को NIA की टीम ने हाजीपुर स्थित संदीप कुमार सिन्हा के आवास पर छापेमारी की थी। हालांकि उस समय टीम को कोई बड़ी सफलता नहीं मिली। इसके बाद अक्टूबर 2025 में एजेंसी ने दोबारा छापेमारी की। इस दौरान कथित तौर पर एक पिस्टल, एक दोनाली बंदूक, 20 गोलियां, दो मैगजीन और चार लाख रुपये बरामद किए गए थे। टीम ने हथियार और अन्य सामान जब्त कर लिया था।
इसके बाद से संदीप कुमार सिन्हा जांच एजेंसी के रडार पर थे। आखिरकार 29 अक्टूबर 2026 को NIA ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अब एजेंसी उनकी भूमिका, हथियार तस्करी के नेटवर्क और कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है।
भैरव त्रिपाठी और करमुल्लाह की गिरफ्तारी से भी खुलीं नई कड़ियां
इस मामले में अगस्त 2026 में भी NIA को बड़ी कामयाबी मिली थी। एजेंसी ने 19 अगस्त को भैरव त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 22 अगस्त को करमुल्लाह को भी गिरफ्तार किया गया। NIA की ताजा प्रेस विज्ञप्ति में इन दोनों गिरफ्तारियों का उल्लेख किया गया है।
जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान मंजूर खान और कुंदन कुमार उर्फ कुंदन भगत समेत अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए। NIA अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और अलग-अलग आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
अब तक तीन पूरक आरोपपत्र, जांच अभी जारी
NIA की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस मामले में अब तक तीन पूरक आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। पहले पूरक आरोपपत्र में विकास कुमार, सत्यम कुमार, देवमणि राय और अहमद अंसारी को आरोपी बनाया गया था। दूसरे पूरक आरोपपत्र में मंजूर खान और तीसरे में कुंदन कुमार उर्फ कुंदन भगत के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।
इन आरोपियों पर आपराधिक साजिश, आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
NIA का आरोप है कि आरोपी नागालैंड से बिहार तक प्रतिबंधित हथियारों की तस्करी की साजिश में शामिल थे। इस नेटवर्क का उद्देश्य ऐसे खतरनाक हथियारों को आपराधिक तत्वों तक पहुंचाना था, जिससे सार्वजनिक शांति, सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता था।
अब संदीप कुमार सिन्हा की गिरफ्तारी के बाद जांच की एक नई कड़ी खुली है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि एके-47 कहां से आई और किसने बेची, बल्कि यह भी है कि इस अवैध कारोबार से जुटाई गई रकम कहां-कहां खपाई गई और इस पूरे नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका थी। NIA की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस हथियार तस्करी नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना बनी हुई है।
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