सहायक कृषि निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर से खेला बड़ा खेल, निदेशालय को भेजे पत्र की जांच में खुली पोल
–भवन निर्माण विभाग ने ‘साईं सप्लाई एंड कंस्ट्रक्शन’ को सौंपा था काम, फर्जीवाड़ा सामने आते ही सहायक कृषि निदेशक ने दर्ज कराई प्राथमिकी
राँची। कांके रोड स्थित कृषि भवन परिसर में सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जीवाड़े और जालसाजी का बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। सहायक कृषि निदेशक, गुण नियंत्रण (उर्वरक) प्रयोगशाला के रिनोवेशन (नवीनीकरण) कार्य में बिना भौतिक सत्यापन और काम के आकलन के ही फर्जी हस्ताक्षर से ‘कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र’ तैयार कर कृषि निदेशालय को भेज दिया गया. जब निदेशालय ने काम के प्राक्कलन (एस्टिमेट) को लेकर सवाल खड़े किए, तब जाकर विभागीय कार्यालय को पता चला कि किसी अज्ञात सिंडिकेट ने तत्कालीन सहायक कृषि निदेशक रीना रानी खलखो का फर्जी दस्तखत कर निदेशालय को पत्रांक भेज दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्तमान सहायक कृषि निदेशक शोभना ने गोंदा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
शिकायत के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य योजना के तहत भवन निर्माण विभाग (भवन प्रमण्डल संख्या-1, रांची) को उर्वरक गुण नियंत्रण प्रयोगशाला के रिनोवेशन का कार्य आवंटित किया गया था. इसके बाद भवन प्रमण्डल ने यह कार्य मोराबादी, बरियातू स्थित एजेंसी ‘साईं सप्लाई एंड कंस्ट्रक्शन’ (अर्चना कुंज, शिव भवन लेन) को सब-अलॉट किया. कार्य आवंटन के बाद प्रयोगशाला कार्यालय ने पत्रांक-135 (दिनांक 01.07.2026) के माध्यम से कृषि निदेशालय से अनुरोध किया था कि काम का भौतिक निरीक्षण करने के लिए कनीय अभियंता (जेई) के साथ एक संयुक्त जांच दल गठित किया जाए।
कार्यालय अभी जांच दल के गठन का इंतजार ही कर रहा था कि इसी बीच किसी ने कार्यालय के पत्रांक-151 (दिनांक 14.07.2026) के नाम से कृषि निदेशालय को पत्र भेज दिया कि रिनोवेशन का काम पूरी तरह संपन्न हो चुका है।इस पत्र के मिलते ही कृषि निदेशालय, झारखण्ड ने पत्रांक 3055 (दिनांक 27.07.2026) जारी कर प्रयोगशाला कार्यालय से पूछा कि क्या संबंधित कार्य स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप हुआ है या नहीं? निदेशालय का यह पत्र जब कार्यालय पहुंचा, तो अधिकारियों के होश उड़ गए. जांच में सामने आया कि पत्रांक-151 कार्यालय से जारी ही नहीं किया गया था।
विभाग के आंतरिक रिकॉर्ड खंगालने पर पुष्टि हुई कि तत्कालीन सहायक कृषि निदेशक रीना रानी खलखो के फर्जी और संदिग्ध हस्ताक्षर बनाकर यह जाली पत्र तैयार किया गया था. इसके बाद तत्कालीन अधिकारी रीना रानी खलखो ने खुद पत्रांक-153 (दिनांक 29.07.2026) के जरिए कृषि निदेशक को पूरे मामले और फर्जीवाड़े से लिखित रूप में अवगत कराया. प्रथम दृष्टया यह मामला सरकारी तंत्र को गुमराह कर, अधूरे या बिना मानकों वाले कार्य का फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार कराकर भुगतान कराने की सोची-समझी आपराधिक साजिश का प्रतीत होता है।

