बाल मजदूरी की सूचना पर एक्शन,बंगाल के बेकरी फैक्टरी से मुक्त कराए पाकुड़ के 4 बच्चे
पाकुड़। बाल श्रम के खिलाफ जिला प्रशासन की पहल से पाकुड़ के चार नाबालिग बच्चों को पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले के रायगंज स्थित एक बेकरी फैक्टरी से सुरक्षित मुक्त कराया गया है। बच्चों के बेकरी फैक्टरी में काम करने की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने पश्चिम बंगाल के स्थानीय प्रशासन से समन्वय स्थापित कर रेस्क्यू अभियान चलाया। सभी चार बच्चों को मुक्त कराने के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कराकर पाकुड़ लाया गया और बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। काउंसिलिंग और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया।
चाइल्ड राइट फाउंडेशन की सूचना पर शुरू हुई कार्रवाई
जिला प्रशासन के अनुसार, बाल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठन चाइल्ड राइट फाउंडेशन,राँची की ओर से अगस्त 2026 में पाकुड़ जिला प्रशासन को महत्वपूर्ण सूचना उपलब्ध कराई गई थी। संगठन को जानकारी मिली थी कि पाकुड़ जिले के चार नाबालिग बच्चों को पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर स्थित रायगंज की एक बेकरी फैक्टरी में काम में लगाया गया है।
सूचना मिलने के बाद बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और पश्चिम बंगाल प्रशासन के स्थानीय अधिकारियों से संपर्क स्थापित किया। इसके बाद दोनों राज्यों के प्रशासन के बीच समन्वय के जरिए बच्चों को फैक्टरी से मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।
पश्चिम बंगाल प्रशासन के सहयोग से हुआ रेस्क्यू
प्रशासनिक समन्वय के बाद पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिला प्रशासन की मदद से चारों बच्चों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कराया गया। रेस्क्यू के बाद बच्चों को तत्काल आवश्यक संरक्षण प्रदान किया गया।
मामले में बाल कल्याण समिति, उत्तरी दिनाजपुर द्वारा निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद बच्चों को टीम के माध्यम से पाकुड़ लाया गया और बाल कल्याण समिति, पाकुड़ के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
काउंसिलिंग के बाद परिजनों को सौंपे गए बच्चे
पाकुड़ पहुंचने के बाद बाल कल्याण समिति ने चारों बच्चों की आवश्यक काउंसिलिंग की। बच्चों की सुरक्षा, हित और भविष्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद सभी चारों नाबालिगों को सुरक्षित रूप से उनके परिजनों को सौंप दिया गया।प्रशासन का कहना है कि बच्चों को केवल रेस्क्यू कर घर पहुंचाना ही अंतिम उद्देश्य नहीं है। उनके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए आगे भी उनकी स्थिति पर नजर रखी जाएगी।
शिक्षा से दोबारा जोड़ने की तैयारी
जिला प्रशासन की ओर से बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा की निरंतरता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिला बाल संरक्षण इकाई की टीम समय-समय पर बच्चों का अनुश्रवण करेगी। संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि बच्चे दोबारा शिक्षा से जुड़ें और सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन आगे बढ़ा सकें।प्रशासन यह भी देखेगा कि बच्चों के परिवार की परिस्थितियां ऐसी न हों कि उन्हें दोबारा बाल श्रम के लिए बाहर भेजना पड़े।
बाल श्रम के खिलाफ प्रशासन का सख्त संदेश
चार नाबालिगों के रेस्क्यू की कार्रवाई के साथ जिला प्रशासन ने बाल संरक्षण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बच्चों का सुरक्षित बचपन, शिक्षा और संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं बच्चों से मजदूरी कराए जाने या उनके शोषण की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना संबंधित विभाग या प्रशासन को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
इस पूरे रेस्क्यू अभियान ने यह भी दिखाया कि बाल श्रम जैसी समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन, दूसरे राज्य का स्थानीय प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़े संगठनों के बीच समन्वय कितना महत्वपूर्ण है।

