सड़क पर मिली थीं किताबें व साइकिल, साढ़े 5 साल बाद भी नहीं मिला नाबालिग का सुराग: हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सीबीआई के हवाले बोकारो का अपहरण कांड

 

राँची। बोकारो के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र से साढ़े पांच वर्ष पूर्व ट्यूशन जाने के क्रम में रहस्यमय ढंग से लापता हुई नाबालिग छात्रा के मामले में अब केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) की एंट्री हो गई है।स्थानीय पुलिस और राज्य अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के हाथों खाली रहने के बाद झारखण्ड हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश पर सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) राँची ने अपहरण की धारा में नियमित केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है हाईकोर्ट में दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर 25 अगस्त 2026 को दिए गए निर्देश के तहत सीबीआई ने पूर्व की एफआईआर को टेकओवर करते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ आरसी संख्या 0242026S0011 दर्ज की है।इस संवेदनशील मामले का अनुसंधान सीबीआई एसीबी राँची के डीएसपी गौरव सिंह को सौंपा गया है।

यह पूरा मामला 16 अक्टूबर 2020 का है, जब शिकायतकर्ता की नाबालिग पुत्री सुबह करीब 10:45 बजे घर से ट्यूशन के लिए निकली थी। घर से निकलने के महज आधे घंटे के भीतर, करीब 11:15 बजे, मुख्य सड़क पर लावारिस हालत में उसकी साइकिल, चप्पलें, किताबें और कॉपियां बिखरी मिलीं।मौके के हालात किसी अनहोनी और जबरन उठाए जाने की ओर इशारा कर रहे थे।परिजनों और ग्रामीणों ने काफी खोजबीन की, लेकिन छात्रा का कोई अता-पता नहीं चला. इसके बाद पिंडराजोरा थाने में 16 अक्टूबर 2020 को ही आईपीसी की धारा 364/34 (हत्या के इरादे से अपहरण) के तहत कांड संख्या 161/2020 दर्ज कराया गया था।

स्थानीय पुलिस स्तर पर कोई ठोस प्रगति न होने के बाद इस मामले को सीआईडी राँची को सौंपा गया था, जहां 20 अप्रैल 2026 को कांड संख्या 04/2026 दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई. इसके बावजूद साढ़े पांच साल का लंबा वक्त बीत जाने पर भी नाबालिग का कोई सुराग नहीं मिल सका।इस पर परिजनों ने झारखण्ड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां अदालत ने बच्ची के लंबे समय से लापता रहने और एजेंसियों की विफलता को गंभीरता से लेते हुए पूरी जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने का फरमान सुनाया।अब सीबीआई नए सिरे से कड़ियों को जोड़कर इस अनसुलझी गुत्थी को सुलझाने की तैयारी में जुट गई है।

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