जेपीएससी घोटाले में सबसे बड़ा एक्शन… पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते के घर सीआईडी का छापा, कई दस्तावेज जब्त

राँची।झारखण्ड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) और राँची पुलिस की संयुक्त टीम ने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते के आवास पर कई घंटों तक छापेमारी की। कार्रवाई को लेकर पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, सीआईडी और राँची पुलिस की टीम सुबह गुप्त रूप से पूर्व अध्यक्ष के आवास पर पहुँची और करीब साढ़े तीन बजे तक लगातार तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान अधिकारियों ने घर के विभिन्न हिस्सों की बारीकी से जांच की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ अन्य सामग्री को अपने कब्जे में लिया। हालांकि, छापेमारी समाप्त होने के बाद भी किसी अधिकारी ने मीडिया के सामने आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब इससे महज दो दिन पहले सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय समेत आठ अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस कार्रवाई के बाद बुधवार को सीआईडी ने जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर और तीन अन्य आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि परीक्षा संचालन का टेंडर प्राप्त करने वाली एजेंसी टीडीपीएल को कथित रूप से अनुचित तरीके से लाभ पहुँचाने में कहीं तत्कालीन आयोग के शीर्ष स्तर के अधिकारियों की भूमिका तो नहीं रही। इसी क्रम में पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते के कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों, टेंडर प्रक्रिया और उससे जुड़े दस्तावेजों की भी गहन जांच की जा रही है।
सीआईडी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि टेंडर आवंटन, परीक्षा संचालन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की मिलीभगत या नियमों की अनदेखी हुई थी या नहीं। यदि जांच में ऐसे कोई ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
छापेमारी अभियान में राँची के सिटी एसपी, सीआईडी के कई वरिष्ठ अधिकारी, लालपुर एवं गोंदा थाना प्रभारी समेत एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी शामिल थे। पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो।
फिलहाल सीआईडी ने इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक प्रेस बयान जारी नहीं किया है। लेकिन लगातार हो रही छापेमारी, गिरफ्तारियों और दस्तावेजों की जांच से स्पष्ट है कि जेपीएससी परीक्षा विवाद की जांच निर्णायक चरण में पहुँच चुकी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका उजागर होती है।

