गुमला जेल के पोक्सो आरोपी की रिम्स में मौत, शुरू हुई मजिस्ट्रियल जांच

​राँची।झारखण्ड के गुमला मंडल कारा (जेल) में बंद एक पोक्सो (POCSO) एक्ट के आरोपी कैदी की राँची के रिम्स अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई है। मृतक की पहचान घाघरा थाना क्षेत्र के कुहीपाट बरवा टोली निवासी 51 वर्षीय रंथु उरांव उर्फ रंथु भगत के रूप में हुई है। वह एक गंभीर मामले में लंबे समय से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था। कैदी की मौत के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है और नियमानुसार मामले की उच्च स्तरीय मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी गई है।

​जानकारी के मुताबिक, बीते 23 जून को रंथु उरांव ने जेल के भीतर अचानक पेट में तेज दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद जेल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गुमला के सदर अस्पताल में भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका कई दिनों तक इलाज चला, लेकिन स्वास्थ्य स्थिति में सुधार होने के बजाय उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। स्थिति को गंभीर देखते हुए डॉक्टरों की सलाह पर 30 जून को उसे बेहतर इलाज के लिए पुलिस सुरक्षा के बीच राँची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रेफर कर दिया गया। रिम्स में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उसके इलाज में जुटी हुई थी, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

​इस घटना के बाद गुमला मंडल कारा प्रशासन ने जेल मैनुअल और कानूनी नियमों के तहत सभी आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की हैं।चूंकि यह मामला न्यायिक हिरासत में मौत (कस्टोडियल डेथ) का है,इसलिए जेल प्रशासन ने इसकी आधिकारिक सूचना तत्काल संबंधित न्यायालय, जिला प्रशासन और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को दे दी है।इसके साथ ही डॉक्टरों के बोर्ड द्वारा शव का पोस्टमार्टम कराया गया और इलाज से जुड़े सभी जरूरी मेडिकल दस्तावेजों व पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सुरक्षित रख लिया गया है।

​मंडल कारा गुमला के जेल अधीक्षक गोपाल चंद्र महतो ने कैदी की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि इस पूरे मामले में जेल मैनुअल के नियमों का पूरी तरह पालन किया गया है। उन्होंने कहा कि घटना के समय ही कैदी के परिजनों को इसकी सूचना दे दी गई थी और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को सम्मानपूर्वक उनके सुपुर्द कर दिया गया है।

​अब इस मामले में शुरू की गई मजिस्ट्रियल जांच के जरिए मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा।जांच में इस बात की भी गहन पड़ताल होगी कि कैदी के बीमार होने के बाद उसे समय पर उचित चिकित्सा सुविधा मिली या नहीं,और अस्पतालों में दी गई स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में कोई लापरवाही तो नहीं हुई।जांच रिपोर्ट पूरी होने के बाद इसे जिला प्रशासन के माध्यम से सक्षम प्राधिकार को सौंपा जाएगा,जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

error: Content is protected !!