गर्मी की छुट्टियां बनीं आखिरी सफर, तालाब में डूबकर मासूम की मौत…
गुमला। गर्मी की छुट्टियां बिताने दिल्ली से अपने पैतृक गांव आया 11 वर्षीय आर्यन अब कभी अपने घर नहीं लौट पाएगा। एक सप्ताह बाद दिल्ली वापसी की तैयारी कर रहा यह मासूम तालाब में डूब गया। इस हृदयविदारक घटना ने चैनपुर प्रखंड के बरवे नगर गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है।
परिजनों के मुताबिक आर्यन करीब 15 दिन पहले छुट्टियां मनाने अपने दादा-दादी के घर आया था। दिल्ली में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाला आर्यन गांव के माहौल का भरपूर आनंद ले रहा था। परिवार ने उसकी वापसी के लिए ट्रेन टिकट भी बुक करा ली थी और अगले सप्ताह दिल्ली लौटने की तैयारी चल रही थी। लेकिन किसे पता था कि यह यात्रा उसकी जिंदगी की आखिरी यात्रा साबित होगी।
बताया जाता है कि शुक्रवार सुबह आर्यन तालाब में नहाने जाने की जिद कर रहा था। करीब नौ बजे वह घर से निकल गया। काफी देर तक उसके वापस नहीं आने पर परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। मां नीलम लकड़ा उसे तलाशते हुए तालाब तक पहुंचीं। वहां बेटे के कपड़े, साबुन और चप्पल तो मिले, लेकिन आर्यन का कहीं पता नहीं था। यह दृश्य देखते ही उनके होश उड़ गए।
सूचना मिलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में तालाब के पास जुट गए। तालाब में मछली पकड़ रहे कुछ लोगों ने जाल की मदद से खोजबीन शुरू की। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आर्यन का शव तालाब से बाहर निकाला गया। मासूम के शव को देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम छा गया।आर्यन के पिता स्वर्गीय रंजीत लकड़ा हैं। इकलौते बेटे की असमय मौत ने मां नीलम लकड़ा को पूरी तरह तोड़ दिया है। गांव के लोग भी इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध हैं। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात है—जो बच्चा कुछ दिनों बाद पढ़ाई के लिए दिल्ली लौटने वाला था, वह हमेशा के लिए अपनों को छोड़कर चला गया।
इस घटना ने एक बार फिर जलाशयों के आसपास बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं बरवे नगर में शोक का माहौल है और हर आंख नम है।

