दीवार गिरी तो निकला चांदी का खजाना, 72 घंटे से मलबे में पड़े हैं सिक्के… फिर भी हाथ लगाने से डर रहा परिवार

 

हजारीबाग। बारिश ने एक पुरानी मिट्टी की दीवार गिराई और उसके साथ खुल गया करीब 200 साल पुराना राज। मलबा हटाया गया तो उसमें से करीब दो किलो चांदी के सिक्के निकले। गांव में खबर फैली तो कौतूहल बढ़ गया। किसी ने इसे खजाना माना, किसी ने इतिहास की धरोहर। लेकिन जिस परिवार के घर की दीवार से ये सिक्के निकले, उसके लिए यह खजाना खुशी से ज्यादा डर की वजह बन गया है।हैरानी की बात यह है कि 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सिक्के मलबे में पड़े हैं। परिवार के लोग उन्हें देखते तो हैं, लेकिन उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

“दौलत मिल जाए, लेकिन जान जोखिम में नहीं डालनी”
यह पूरा मामला हजारीबाग के अमनारी गांव का है। बैजू महतो के परिवार का पुराना मिट्टी का मकान लंबे समय से वीरान पड़ा था। इसे परिवार के लोग अपने पूर्वजों की निशानी मानते हैं। बारिश के दौरान अचानक मकान की एक दीवार भरभराकर गिर गई।
दीवार के मलबे में चमकती चीजें दिखाई दीं। जब मलबा देखा गया तो वहां चांदी के कई पुराने सिक्के बिखरे पड़े थे। वजन करने पर इनकी मात्रा करीब दो किलो बताई जा रही है।आमतौर पर ऐसी खबर किसी के लिए खुशी का मौका होती, लेकिन यहां परिवार का रवैया बिल्कुल अलग है। परिजन सिक्कों के पास तक जाते हैं, उन्हें देखते हैं, लेकिन छूने से बच रहे हैं।

पुरानी त्रासदियों ने बढ़ाया डर
परिवार के डर की वजह सिर्फ सिक्के नहीं हैं। परिजनों के अनुसार, परिवार पहले भी दुखद घटनाओं से गुजर चुका है। बैजू महतो के एक बेटे की सड़क हादसे में मौत हो चुकी है, जबकि बैजू महतो खुद गंभीर बीमारी का सामना कर चुके हैं।अब परिवार के कुछ लोग इन घटनाओं को पुराने सिक्कों से जोड़कर देखने लगे हैं। उनके मन में यह डर बैठ गया है कि कहीं इस खजाने के साथ कोई अनहोनी तो नहीं जुड़ी।हालांकि, सिक्कों के अभिशप्त होने या किसी अलौकिक शक्ति से जुड़े होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसके बावजूद परिवार की आशंका इतनी गहरी है कि चांदी सामने होने के बाद भी कोई उसे हाथ लगाने को तैयार नहीं है।

घर की महिलाओं ने भी कहा- सिक्कों से दूर रहो
परिवार की महिलाओं ने भी स्पष्ट तौर पर सिक्कों को छूने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन इस पूरे मामले को स्पष्ट नहीं कर देता, तब तक कोई भी व्यक्ति सिक्कों को हाथ नहीं लगाएगा।उधर, गांव में सिक्कों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कोई इन्हें मुगलकाल का बता रहा है तो कोई इसे पूर्वजों द्वारा छिपाकर रखी गई संपत्ति मान रहा है।

 

शनिवार को अचानक पहुंचा साधु, गांव में और बढ़ा रहस्य
मामले में शनिवार को एक और दिलचस्प मोड़ तब आया, जब एक अज्ञात साधु अचानक अमनारी पहुंच गया।साधु के गांव में पहुंचते ही तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ ग्रामीणों ने उसके आने को सिक्कों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया, जबकि कुछ इसे महज संयोग मान रहे हैं।साधु किससे मिलने आया था और उसके गांव आने की असली वजह क्या थी, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन उसके अचानक पहुंचने से पहले से डरे परिवार की बेचैनी जरूर बढ़ गई।

बैंक ने कहा- सिक्के सुरक्षित रखिए, परिवार ने नहीं सौंपे
मामले की जानकारी मिलने के बाद SBI झरपो शाखा के प्रबंधक भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार को सिक्कों को सुरक्षित रखने और बैंक में जमा कराने की सलाह दी।लेकिन परिवार ने सिक्के बैंक को सौंपने से भी इनकार कर दिया। फिलहाल परिजन मलबे में पड़े सिक्कों पर नजर रख रहे हैं।

 

अब प्रशासन तय करेगा, आखिर सिक्कों पर किसका हक?
मामले की सूचना मिलने पर CO अमित कुमार झा और थाना प्रभारी इंद्रजीत कुमार भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार को पुराने सिक्कों से संबंधित कानूनी प्रक्रिया की जानकारी दी।
बताया गया है कि नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद हजारीबाग उपायुक्त स्तर से मामले में सुनवाई और आगे की कार्रवाई की जाएगी। सिक्कों की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर यह तय होगा कि उनकी सुपुर्दगी किसे की जाएगी।
फिलहाल चांदी के सिक्के उसी मलबे के पास हैं।

एक खजाने ने बदल दी पूरे गांव की नजर
इस घटना के बाद अमनारी के पुराने मकानों को लेकर भी ग्रामीणों की दिलचस्पी बढ़ गई है। लोग अब सोच रहे हैं कि अगर एक पुराने मकान की दीवार के भीतर से चांदी के सिक्के निकल सकते हैं, तो क्या इलाके के दूसरे पुराने मकानों में भी पूर्वजों की कोई छिपी धरोहर मौजूद हो सकती है?हालांकि, किसी दूसरे मकान से खजाना मिलने की फिलहाल कोई पुष्टि नहीं हुई है।

अमनारी में इस समय सबसे अजीब तस्वीर यही है—मलबे के बीच चांदी के सिक्के पड़े हैं, गांव में उनकी चर्चा है, प्रशासन मामले को देख रहा है और परिवार उनकी सुरक्षा कर रहा है। लेकिन जिस खजाने के लिए कोई भी व्यक्ति लालायित हो सकता है, उसे पाने के लिए यहां कोई हाथ आगे बढ़ाने को तैयार नहीं।चांदी के सिक्के असली हैं या उनका इतिहास क्या है, यह जांच के बाद सामने आएगा। लेकिन फिलहाल अमनारी में सवाल यही है—क्या यह महज 200 साल पुराना खजाना है, या इसके पीछे छिपी कहानी अभी सामने आनी बाकी है?

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