विधानसभा मार्च में स्याही कांड से गरमाई सियासत: AISA की नेहा बोरा पर हमला, आरोपी छात्र जेल भेजा गया

–धुर्वा थाने में प्राथमिकी दर्ज, RYA ने बताया लोकतांत्रिक आवाज पर हमला; आरोपी को लेकर छात्रों में भी उठे सवाल
राँची। झारखण्ड विधानसभा घेराव को लेकर निकले छात्र-युवा संगठनों के मार्च के दौरान शुक्रवार को उस वक्त हंगामा मच गया, जब AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और झारखण्ड की राज्य अध्यक्ष विभा पुष्प दीप पर कथित तौर पर हमला करने का प्रयास किया गया और उनके चेहरे व शरीर पर काली स्याही फेंक दी गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षाकर्मियों ने एक युवक को पकड़ लिया, जिसकी पहचान अमरनाथ पांडे के रूप में बताई गई है।मामले में धुर्वा थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया है। शिकायत AISA झारखण्ड के राज्य सचिव संतोष कुमार की ओर से दी गई है।
बिरसा चौक से निकला था मार्च, मौसीबाड़ी के पास हुआ हंगामा
शिकायत के मुताबिक, AISA और RYA की ओर से छात्रों और युवाओं की विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा घेराव का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें शामिल होने के लिए AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा दिल्ली से राँची पहुंची थीं।
कार्यकर्ता बिरसा चौक से मार्च करते हुए विधानसभा की ओर बढ़ रहे थे। आरोप है कि शहीद मैदान से मौसीबाड़ी की तरफ करीब 200 से 250 मीटर आगे बढ़ने के दौरान एक युवक और उसके कुछ साथी कथित रूप से जुलूस में शामिल हुए।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान नेहा बोरा और विभा पुष्प दीप पर हमला करने की कोशिश की गई। आरोप है कि हमला सफल नहीं होने पर दोनों पर काली स्याही फेंक दी गई। अचानक हुई इस घटना से जुलूस में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप कर एक युवक को पकड़ लिया।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने अपना नाम अमरनाथ पांडे बताया। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई और प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जेल भेज दिया गया।
RYA ने कहा—असहमति का जवाब स्याही या हिंसा नहीं
घटना को लेकर इंकलाबी नौजवान सभा (RYA) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। RYA के जिला सचिव मनीष यादव ने घटना की निंदा करते हुए इसे छात्रों और युवाओं की लोकतांत्रिक आवाज पर हमला बताया।उन्होंने कहा कि किसी विचार या आंदोलन से असहमति हो सकती है, लेकिन उसका जवाब हिंसा या हमले के रूप में नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
RYA की ओर से यह भी दावा किया गया कि घटना में शामिल युवक हजारीबाग का रहने वाला है और विनोबा भावे विश्वविद्यालय में हिंदी ऑनर्स का छात्र है। साथ ही उसके किसी संगठन से जुड़े होने को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
आरोपी के जेल जाने पर छात्रों में अलग राय
दूसरी ओर, आरोपी छात्र को जेल भेजे जाने के बाद कुछ छात्रों के बीच इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि स्याही फेंकना विरोध का उचित तरीका नहीं था, लेकिन उनका यह भी तर्क है कि घटना की तुलना हाल के कुछ बड़े प्रदर्शनों में हुई कथित हिंसा और अराजकता से करके देखी जानी चाहिए।कुछ छात्रों का सवाल है कि यदि किसी आंदोलन में हजारों लोगों द्वारा कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने के आरोप लगते हैं और बाद में राजनीतिक स्तर पर उन्हें राहत या माफी देने की पैरवी होती है, तो एक छात्र द्वारा स्याही फेंकने की घटना में जेल भेजे जाने को किस नजरिए से देखा जाए।हालांकि, यह पूरा पक्ष छात्रों की ओर से उठाए जा रहे सवालों और उनकी व्यक्तिगत प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। स्याही फेंकने की घटना और किसी बड़े हिंसक प्रदर्शन के बीच कानूनी और परिस्थितिगत अंतर का अंतिम आकलन जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
स्याही की छींटों से बड़ा सवाल—विरोध की सीमा आखिर क्या हो?
पूरे घटनाक्रम ने छात्र राजनीति में विरोध के तरीकों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ AISA और RYA इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ छात्र यह सवाल उठा रहे हैं कि विरोध के गलत तरीके के लिए कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन कार्रवाई की प्रकृति और उसके समानता के सवाल पर भी सार्वजनिक बहस जरूरी है।फिलहाल पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया है। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना के पीछे केवल व्यक्तिगत विरोध था या इसके पीछे कोई संगठित साजिश थी, जैसा कि शिकायत में आरोप लगाया गया है। स्याही कांड ने विधानसभा घेराव के मुद्दों के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इसकी राजनीतिक गूंज और तेज होने की संभावना है।

