धनबाद:166 सिम जारी, 57 निकले साइबर ठगी से जुड़े,खुला करोड़ों के फ्रॉड का नेटवर्क

धनबाद। चंद रुपये कमाने की चाहत में अगर कोई आपके नाम पर सिम कार्ड निकलवाने लगे, तो सावधान हो जाइए। यह छोटी-सी गलती आपको सीधे साइबर अपराध के कटघरे में खड़ा कर सकती है। धनबाद के बलियापुर में पुलिस की कार्रवाई ने ऐसे ही एक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जहां सिम कार्ड की खरीद-बिक्री के जरिए साइबर अपराधियों तक पहुंचने का रास्ता तैयार किया जा रहा था।
मामला तब सामने आया, जब टेलीकॉम विभाग की ओर से पुलिस को संदिग्ध सिम कार्ड जारी किए जाने की जानकारी मिली। जांच में पता चला कि 1 जनवरी से 29 मई 2026 के बीच बलियापुर थाना क्षेत्र की एक मोबाइल दुकान से 166 सिम कार्ड जारी किए गए थे। इनमें 57 सिम कार्ड ऐसे मिले, जिनके खिलाफ NCRP पोर्टल पर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज थी।इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध सिम सामने आने के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया। छानबीन में कालूबथान ओपी क्षेत्र के शीतलपुर, बलियापुर से सटे गांवों और पूर्वी टुंडी के मायरा नवाटांड़ इलाके तक फैले एक नेटवर्क का पता चला।
मोबाइल दुकान से शुरू हुई जांच, खुलता गया नेटवर्क
सिंदरी के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बलियापुर चौक स्थित मोबाइल कॉर्नर पर छापेमारी की। यहां से साइबर ठगी से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामान बरामद किए गए।
पुलिस ने दुकान संचालक काजू डे और सेल्समैन गौरव कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया, जबकि एक विधि-विवादित किशोर को भी निरुद्ध किया गया।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के सामने नेटवर्क की दूसरी परत खुली। पुलिस ने कथित मुख्य सरगना कृष्ण कुमार दास और चिरंजीत कुमार डे को गिरफ्तार किया। इनके दो सहयोगियों गोविंद बाजरी और मधुसूदन बाजरी को भी पुलिस ने दबोच लिया।
57 संदिग्ध सिम ने बढ़ाई पुलिस की चिंता
पुलिस की जांच में सामने आया कि संदिग्ध सिम कार्ड महज कागज पर दर्ज नंबर नहीं थे, बल्कि साइबर अपराध के नेटवर्क में इनका इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। पूछताछ में आरोपियों के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी किए जाने की बात सामने आने का पुलिस ने दावा किया है।अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन सिम कार्ड का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में हुआ और इस पूरे नेटवर्क में अभी कितने लोग शामिल हैं।
चंद रुपये लेकर सिम देना पड़ सकता है भारी
धनबाद ग्रामीण एसपी मोहम्मद याकूब ने लोगों को चेताया है कि साइबर अपराधी अक्सर ग्रामीण और भोले-भाले लोगों को कुछ रुपये का लालच देकर उनके नाम पर सिम कार्ड हासिल कर लेते हैं।ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने दस्तावेज का इस्तेमाल कर सिम जारी करवाना या अपना मोबाइल नंबर और पहचान संबंधी कागजात किसी दूसरे को देना भारी पड़ सकता है।
पुलिस का साफ संदेश है—अगर किसी व्यक्ति की संलिप्तता साइबर अपराधियों की मदद करने में पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
पुलिस के हाथ क्या-क्या लगा है..
छापेमारी और जांच के दौरान पुलिस ने 98 पेज की एक्सरसाइज बुक, आधार कार्ड से जुड़े दस्तावेज, VIVO कंपनी का PoS मोबाइल और चार अन्य मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में से चिरंजीत कुमार का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ धनसार थाना में साइबर अपराध से जुड़ा मामला दर्ज है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के विधाननगर पुलिस कमिश्नरेट में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।
बलियापुर की यह कार्रवाई सिर्फ कुछ गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। पुलिस अब इस बात की तह तक पहुंचने में जुटी है कि आखिर ग्रामीणों को चंद रुपये देकर उनके नाम पर सिम निकलवाने वाला नेटवर्क कितना बड़ा है और इन सिम कार्ड के जरिए कितने लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाया गया।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। लेकिन इस मामले ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि कुछ रुपये के लालच में किसी दूसरे के लिए सिम कार्ड लेना या अपने दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को देना भविष्य में बड़ी मुसीबत का कारण बन सकता है।
इसलिए सावधान रहें—आपके नाम का एक सिम कार्ड किसी साइबर अपराधी का हथियार भी बन सकता है।

