JPSC-JSSC विवाद पर राँची में उबाल, 15 दिन से जारी है छात्रों का संघर्ष, सरकार के खिलाफ बढ़ता जा रहा आक्रोश…

राँची। राजधानी राँची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन शनिवार को 15वें दिन भी जारी रहा। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटे हजारों छात्र अपनी मांगों पर डटे हैं। सरकार की ओर से बातचीत के जरिए गतिरोध खत्म करने की कोशिशें जरूर हो रही हैं, लेकिन आंदोलनकारी अब तक किसी ठोस नतीजे से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।आंदोलन के बीच शनिवार को स्टेट गेस्ट हाउस के बाहर उस समय माहौल गरमा गया, जब हजारीबाग से आए एक छात्र ने सरकार के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। छात्र ने अपना नाम अमन कुमार बताते हुए आरोप लगाया कि JPSC की सीटों को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। पुलिस ने जब उसे शांत कराने की कोशिश की तो वह और मुखर हो गया। काफी देर तक वह मुख्यमंत्री और सरकार के अधिकारियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करता रहा।
पुलिस को करनी पड़ी काफी मशक्कत
स्टेट गेस्ट हाउस के बाहर मौजूद छात्रों की भीड़ के बीच अमन कुमार का गुस्सा शांत कराने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान झामुमो समर्थित युवाओं और आंदोलनकारी छात्र के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए जाते रहे।अमन का कहना था कि सरकार जिस तरीके से छात्रों से बातचीत कर रही है, उससे समस्या का समाधान होने के बजाय मामला और उलझता जा रहा है। उसका आरोप था कि पिछले करीब 15 दिनों से छात्र अनशन पर बैठे हैं और कई आंदोलनकारियों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। इसके बावजूद सरकार निर्णायक कार्रवाई करने के बजाय छात्रों को आश्वासन और प्रक्रियाओं के बीच उलझाए हुए है।
छात्रों की मांग है कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। आंदोलनकारियों ने जांच में CBI की भूमिका की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
गीतों ने दिया आंदोलन को नया रंग
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में शनिवार को आंदोलन का माहौल सिर्फ नारों तक सीमित नहीं रहा। छात्रों ने पारंपरिक संघर्ष गीतों के जरिए अपनी आवाज बुलंद की।‘गांव छोड़ब नहीं, जंगल छोड़ब नहीं, माई-माटी छोड़ब नहीं, लड़ाई छोड़ब नहीं’ जैसे गीतों से पूरा परिसर गूंज उठा। गीतों में छात्रों का आक्रोश, अपनी माटी से जुड़ाव और अधिकारों के लिए संघर्ष का संकल्प साफ दिखाई दिया।स्टेडियम में मौजूद आंदोलनकारियों का कहना है कि वे वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। यदि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता होती है तो इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है। ऐसे में वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जांच और ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
‘आखिर कब तक होती रहेगी अनियमितता?’
आंदोलन में शामिल छात्रों का सवाल है कि JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर बार-बार विवाद क्यों खड़े होते हैं। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियों की तैयारी में युवा अपनी जिंदगी के कई साल लगा देते हैं, ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी उनके भविष्य के साथ बड़ा अन्याय है।आंदोलनकारी छात्रों का दावा है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट और लिखित समाधान नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को देखते हुए स्टेडियम और आसपास पुलिस बल की तैनाती की है।
आंदोलन में AISA की भी एंट्री, लगाया अलग टेंट
इसी बीच आंदोलन के 15वें दिन अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के बाहर अपना अलग टेंट लगा दिया। इससे आंदोलन स्थल पर संगठनों की मौजूदगी और गतिविधियां बढ़ गई हैं।हालांकि AISA ने स्पष्ट किया है कि अलग टेंट लगाने का मतलब आंदोलन से अलग होना नहीं है। संगठन के प्रदेश सचिव त्रिलोकी नाथ के मुताबिक, संगठन ने अपनी गतिविधियों के संचालन के लिए अलग स्थान बनाया है, लेकिन JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच और छात्रों के हितों की लड़ाई में उसका समर्थन आंदोलन के साथ है।
पहले से दिख रही थी अलग-अलग धाराएं
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा आंदोलन पहले से ही अलग-अलग समूहों में नजर आ रहा था। एक ओर बड़ी संख्या में छात्र संयुक्त रूप से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो के समर्थक भी अलग तरीके से आंदोलन में सक्रिय हैं।अब AISA के अलग टेंट लगाने से प्रदर्शन स्थल पर संगठनों की अलग-अलग गतिविधियां और स्पष्ट हो गई हैं। हालांकि, इन संगठनों का कहना है कि उनके तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन छात्रों के हित और परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग एक ही है।
फिलहाल राँची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम छात्र आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। एक तरफ सरकार गतिरोध खत्म करने की कोशिश में जुटी है, तो दूसरी ओर छात्र अपनी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि बातचीत का सिलसिला किसी ठोस फैसले तक पहुंचता है या आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होता है।

