देवघर:बिहार के पूर्व BDO राकेश कुमार की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप, मुजफ्फरपुर ज्वाइन करने जा रहे थे

 

देवघर।बिहार के गया जिले के नगर प्रखंड के पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) राकेश कुमार (52) की शुक्रवार रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना झारखण्ड के देवघर जिले के मोहनपुर थाना क्षेत्र स्थित भुरभुरा मोड़ के समीप की बतायी जा रही है। गंभीर हालत में पुलिस की पीसीआर टीम ने उन्हें 108 एंबुलेंस से सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। मृतक के मुंह से झाग निकलने की बात सामने आई है। इस घटना के बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पुलिस फिलहाल मौत के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं दे रही है। मामला संदिग्ध होने के कारण पुलिस विभिन्न बिंदुओं पर जांच कर रही है। मौत बीमारी से हुई, जहरीला पदार्थ खाने से या फिर किसी अन्य परिस्थिति में उनकी जान गई इन तमाम पहलुओं की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है।

मुजफ्फरपुर में नई पोस्टिंग पर योगदान देने जा रहे थे
मिली जानकारी के अनुसार राकेश कुमार का कुछ दिन पहले बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में तबादला हुआ था। वह नई पोस्टिंग पर योगदान देने के लिए शुक्रवार को अपने घर से निकले थे। इसी दौरान भुरभुरा के समीप अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। पुलिस को सूचना मिलने के बाद पीसीआर टीम मौके पर पहुंची और उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

राकेश कुमार मूल रूप से देवघर जिले के मोहनपुर थाना क्षेत्र के चुल्हिया गांव के रहने वाले थे। वर्तमान में वह देवघर के बिलासी स्थित प्रोफेसर कॉलोनी में मकान बनाकर परिवार के साथ रह रहे थे। उनके छोटे भाई पुरुषोत्तम चौधरी मोहनपुर प्लस टू स्कूल के प्राचार्य हैं, जबकि उनकी पत्नी जूली कुमारी आरएल सर्राफ हाईस्कूल में प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं।

फरवरी में 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए हुए थे गिरफ्तार
राकेश कुमार का नाम इसी वर्ष फरवरी में बिहार के गया जिले में सामने आए रिश्वत प्रकरण के कारण भी सुर्खियों में आया था। 9 फरवरी 2026 को गया जिले के नगर प्रखंड के तत्कालीन BDO राकेश कुमार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई प्रखंड प्रमुख सुचिता रंजनी की शिकायत के बाद की गई थी।

निगरानी विभाग के अनुसार, एक योजना के भुगतान से जुड़े मामले में रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायत का सत्यापन कराने के बाद निगरानी की टीम ने जाल बिछाया और नगर प्रखंड कार्यालय स्थित प्रखंड प्रमुख के कक्ष में राकेश कुमार को 50 हजार रुपये लेते गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उनके कार्यालय और आवास पर भी तलाशी की कार्रवाई की गई थी।
इस मामले में गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ा और बाद में वह जमानत पर थे। उनकी संदिग्ध मौत ने अब इस पुराने मामले को भी चर्चा में ला दिया है। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी तरह का संबंध होने की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राकेश कुमार पूर्व में बांका जिले के चांदन प्रखंड में भी BDO के पद पर कार्यरत रह चुके थे। इसके बाद उनकी पोस्टिंग गया जिले के नगर प्रखंड में हुई थी। फरवरी में निगरानी कार्रवाई के बाद उनकी प्रशासनिक स्थिति में बदलाव हुआ और हाल में उनका तबादला मुजफ्फरपुर किया गया था।

पोस्टमार्टम और जांच से खुलेगा मौत का राज
राकेश कुमार की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर भुरभुरा मोड़ के पास उनकी तबीयत अचानक कैसे बिगड़ी। मुंह से झाग निकलने की बात सामने आने के कारण पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा जांच से मौत की वजह सामने आने की संभावना है।

परिजनों द्वारा हत्या की आशंका जताए जाने के बाद पुलिस के सामने यह भी चुनौती है कि घटना से पहले राकेश कुमार किन लोगों के संपर्क में थे, वह किसके साथ थे और भुरभुरा मोड़ तक कैसे पहुंचे। पुलिस घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

फिलहाल पुलिस ने मौत को लेकर किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राकेश कुमार की मौत स्वाभाविक थी, किसी जहरीले पदार्थ के सेवन से हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश थी।

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