JSSC CGL पर SIT का शिकंजा, 8 IPS अफसरों की निगरानी में जांच तेज; 37 संदिग्धों से पूछताछ, खुलेंगे अनियमितता के राज

राँची। झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग की स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CGL) 2023 में कथित अनियमितता का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मामले की जांच को अब और व्यापक करते हुए सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक ने 17 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। एसआईटी की कमान STF के आईजी अनूप बिरथरे को सौंपी गई है। उनके नेतृत्व में सात अन्य IPS अधिकारियों को भी जांच में लगाया गया है। इसके साथ ही डीएसपी, इंस्पेक्टर और दारोगा स्तर के अधिकारियों की बड़ी टीम को भी जांच में शामिल किया गया है।
SIT में IG अनूप बिरथरे के अलावा DIG SCRB वाईएस रमेश, SP विशेष शाखा हृदीप पी. जनार्दनन, SP SIB सौरभ, SP पुलिस मुख्यालय निधि द्विवेदी, SP CID पूज्य प्रकाश, SP CID रोशन गुड़िया और ASP चैनपुर श्रुति को शामिल किया गया है।
अधिकारियों की इस टीम के गठन से साफ है कि जांच को अब केवल पेपर लीक के आरोप तक सीमित नहीं रखा गया है। परीक्षा प्रक्रिया, अभ्यर्थियों के चयन, कथित लेन-देन, परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी की भूमिका और संदिग्ध अभ्यर्थियों के बीच संभावित नेटवर्क समेत विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है।
37 संदिग्धों को नोटिस, पूछताछ का दौर शुरू
SIT के गठन के बाद जांच ने तेजी पकड़ ली है। टीम ने गुरुवार को मामले से जुड़े 37 संदिग्धों और संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ की। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में कथित अनियमितता किस स्तर तक हुई और इसमें कौन-कौन लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे।पूछताछ के दौरान अभ्यर्थियों के संपर्क, उनके मोबाइल और डिजिटल संवाद, परीक्षा से पहले और बाद की गतिविधियां तथा कथित बिचौलियों से संबंध जैसे बिंदुओं को जांच के दायरे में लिया जा सकता है। हालांकि, इन सभी पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
21-22 सितंबर 2024 को हुई थी परीक्षा
JSSC CGL की परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को आयोजित की गई थी। परीक्षा के दौरान पेपर लीक होने की खबरों ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी थी। अभ्यर्थियों के बीच भी इसे लेकर व्यापक आक्रोश देखने को मिला था। विवाद बढ़ने के बाद मामले में 1 जनवरी 2025 को CID थाना में कांड संख्या 01/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।इसके बाद CID ने मामले की जांच शुरू की। जांच के क्रम में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और दर्जनभर से अधिक आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है।
CID की पहले की जांच में पेपर लीक को लेकर अलग तस्वीर
JSSC CGL प्रकरण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यह है कि CID ने हाई कोर्ट में पूर्व में दाखिल शपथ पत्र में दावा किया था कि परीक्षा का वास्तविक प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था।CID के अनुसार, कुछ दलालों और एजेंटों ने अभ्यर्थियों को निशाना बनाकर पेपर लीक के नाम पर ठगी की। कथित तौर पर अभ्यर्थियों को वाट्सऐप के माध्यम से कुछ प्रश्नों के उत्तर भेजे गए और इसे परीक्षा का लीक प्रश्नपत्र बताकर उनसे पैसे की मांग की गई।जांच एजेंसी ने ऐसे कथित वसूली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारियां भी की थीं। इससे मामले में पेपर लीक और पेपर लीक के नाम पर ठगी इन दोनों पहलुओं को अलग-अलग देखने की जरूरत सामने आई।
अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद सामने आया नया एंगल
मामले में नया मोड़ उस समय आया जब अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी की गिरफ्तारी हुई। वह परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम कर रहा था।यह गिरफ्तारी JPSC मेधा घोटाला मामले की जांच के दौरान हुई थी। पूछताछ में अभय तिवारी ने कथित तौर पर JSSC CGL परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितता होने की जानकारी CID को दी। उसके बयान के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ा।
क्या अयोग्य अभ्यर्थियों को पैसे के दम पर कराया गया पास?
जांच में सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया कि कुछ अयोग्य अभ्यर्थियों को कथित रूप से रिश्वत के माध्यम से परीक्षा में उत्तीर्ण कराया गया। यदि जांच में यह आरोप प्रमाणित होता है, तो मामला केवल पेपर लीक या ठगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और चयन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।यही कारण है कि नई SIT अब मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। जांचकर्ताओं के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित अनियमितता व्यक्तिगत स्तर पर हुई थी या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
SIT की जांच में मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब तलाशे जाने की संभावना है:
परीक्षा में कथित अनियमितता की वास्तविक प्रकृति क्या थी?
क्या किसी अभ्यर्थी को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाया गया?
परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के किसी कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं?
कथित बिचौलियों और अभ्यर्थियों के बीच किस तरह का संपर्क था?
पैसों के लेन-देन का कोई नेटवर्क था या नहीं?
परीक्षा प्रक्रिया में कहीं से डेटा या अन्य गोपनीय जानकारी तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई?
पहले दर्ज मामलों और गिरफ्तार आरोपियों का नई जांच में सामने आए संदिग्धों से कोई संबंध है या नहीं?
कथित अनियमितता का प्रभाव कितने अभ्यर्थियों और परीक्षा परिणामों तक पहुंचा?
जांच की नई टीम से बढ़ी उम्मीदें:17 सदस्यीय SIT में आठ IPS अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने से जांच को लेकर सरकार और पुलिस मुख्यालय की गंभीरता भी सामने आती है। अब तक की जांच में सामने आए तथ्यों, गिरफ्तार आरोपियों के बयान और नए संदिग्धों से पूछताछ को जोड़कर SIT पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।फिलहाल 37 लोगों से पूछताछ के बाद जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सबकी नजर है। यदि पूछताछ और डिजिटल/दस्तावेजी साक्ष्यों से कथित अनियमितता की पुष्टि होती है, तो आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा नए खुलासे हो सकते हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाएगा।

