राँची जमीन घोटाला: ED का बड़ा एक्शन, कमलेश कुमार सिंह की 85 करोड़ की 66 एकड़ जमीन अटैच..

राँची।प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बहुचर्चित राँची जमीन घोटाला मामले में एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए जमीन कारोबारी कमलेश कुमार सिंह की करीब 66 एकड़ जमीन को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। ईडी के अनुसार जब्त की गई जमीन की सरकारी एवं बाजार मूल्य के आधार पर अनुमानित कीमत लगभग 85 करोड़ रुपये है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि कमलेश कुमार सिंह ने राँची के कांके और नगड़ी अंचल में स्थित 66 एकड़ जमीन पर फर्जी दस्तावेज और जाली रजिस्ट्री तैयार कर अवैध तरीके से कब्जा किया था। जांच एजेंसी को दस्तावेजों की पड़ताल में जालसाजी और रिकॉर्ड में हेरफेर के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस बड़े भूखंड के कई हिस्सों को फर्जी कागजात के आधार पर अलग-अलग खरीदारों को बेचकर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की गई। हालांकि, शेष बची जमीन की बिक्री पूरी होने से पहले ही ईडी ने कार्रवाई करते हुए उसे अटैच कर दिया, ताकि आगे किसी प्रकार का हस्तांतरण या सौदा नहीं हो सके।
ईडी का दावा: सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से चला खेल
ईडी की अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि जमीन घोटाले में राजस्व अधिकारियों और अंचल कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की गई। एजेंसी का आरोप है कि गैर-मजरूआ, आदिवासी और अन्य संवेदनशील जमीनों के रिकॉर्ड में फर्जी बदलाव कर उन्हें बेचकर ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (अपराध से अर्जित संपत्ति) तैयार की गई। इस पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच अभी भी जारी है।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
कमलेश कुमार सिंह को ईडी इससे पहले इसी जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान उसके ठिकानों पर छापेमारी में 1.02 करोड़ रुपये नकद, 100 जिंदा कारतूस, बड़ी संख्या में जमीन से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए थे। बाद में उसके सहयोगियों और उनसे जुड़े ठिकानों पर भी कई चरणों में छापेमारी की गई थी।
ईडी की इस ताजा कार्रवाई को राँची जमीन घोटाले की अब तक की सबसे बड़ी संपत्ति जब्ती कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में अन्य आरोपियों तथा उनकी संपत्तियों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

