बजट सत्र के समापन पर बोले मुख्यमंत्री…झारखण्ड उन्माद नहीं, अवसर की राजनीति करेगा….
राँची। झारखण्ड विधानसभा के बजट सत्र का समापन बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संबोधन के साथ हुआ, जिसमें विकास योजनाओं के साथ-साथ स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी उभरा। अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए विपक्ष पर परोक्ष हमला किया और सामाजिक मुद्दों पर नई सोच की जरूरत पर जोर दिया।मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड उन्माद नहीं, अवसर की राजनीति करेगा। राज्य में युवाओं को, महिलाओं को और उद्यमियों को नए अवसर मिल रहे हैं। उनकी सरकार के सत्ता संभालने के समय राज्य का बजट 86 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.58 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने इसे वित्तीय अनुशासन और विकासोन्मुख नीतियों का परिणाम बताते हुए नीति आयोग एवं राष्ट्रीय स्तर पर मिली प्रशंसा का जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने राजनीतिक तौर पर यह संदेश भी देने की कोशिश रही कि सरकार ने संसाधनों के बेहतर उपयोग से राज्य को पिछड़ेपन की छवि से बाहर निकालने का प्रयास किया है। मंइयां सम्मान योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 50 लाख से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ा गया है। विपक्ष की आलोचना का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे “असल राजनीति” बताया।
उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया की भागीदार बन रही हैं। बजट में महिला सशक्तिकरण के लिए 34 हजार करोड़ रुपये के प्रविधान का हवाला देकर सीएम ने सामाजिक न्याय की राजनीति को अपनी प्राथमिकता बताया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने समाज में बढ़ती धार्मिक उग्रता पर चिंता जताई और शिक्षा व नवाचार पर आधारित विकास माडल अपनाने की अपील की।
सरस्वती, लक्ष्मी और विश्वकर्मा पूजा के उदाहरण देकर उन्होंने संकेत दिया कि केवल परंपरा नहीं, बल्कि प्रतिभा और आधुनिक सोच से ही देश-राज्य आगे बढ़ सकते हैं। इस दौरान उन्होंने यूके के साथ ग्रीन एनर्जी को लेकर प्रस्तावित सेंटर आफ एक्सीलेंस पर अपने विचार रखे।मुख्यमंत्री ने युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की बात कही। आक्सफोर्ड, वेल्स और कैम्ब्रिज जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में छात्रों को भेजने की योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने नॉलेज कॉरिडोर के निर्माण का भी संकेत दिया। युवाओं को आगे बढ़ाने काे लेकर जारी सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि यूरोपीय राज्यों में हर वर्ष उच्च शिक्षा के लिए 50 छात्रों को भेजने का निर्णय लिया गया है।
युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए राजनीतिक दृष्टि से इसे युवाओं के बीच सकारात्मक संदेश देने और दीर्घकालिक विकास एजेंडा स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वादों को निभाने की नीति पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी सरकार के रुख की चर्चा की और कहा कि खाड़ी देशों में युद्ध से लोगों के लाखों रुपये डूब रहे हैं। पता नहीं यह युद्ध कब तक चलेगा। आज देश की स्थिति यह है कि दूसरे देशों ने अगर दरवाजे बंद कर दिए तो लोगों को भूखों मरने की नौबत आ जाएगी। कई बार ऐसा लगता है कि यहां ट्रंप का राज चल रहा है। इस कारण से गैस के लिए सैकड़ों लोग रोज कतारों में लग रहे हैं। महंगाई बढ़ रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार नई नीतियां लेकर रही हैं। मनरेगा से संबंधित निर्णय का असर देश के करोड़ों श्रमिकों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत मजदूरी और सामग्री भुगतान को लेकर राज्य सरकार का केंद्र पर एक हजार करोड़ रुपये बकाया है।
देश में सबसे कम मजदूरी का भुगतान झारखण्ड में किया जा रहा था। नए बदलाव से फिर पुराने दौर में राज्य चले जाएंगे। कुपोषण के खिलाफ झारखण्ड की लड़ाई कमजोर पड़ेगी। उन्होंने इसी दौरान सीआरपीएफ को पुलिस की शक्तियां देने की योजना का भी जिक्र किया।

