राँची पुलिस की ताबड़तोड़ कारवाई से बच्चा चोर गैंग हुआ भूमिगत,एसएसपी ने कहा-एसआईटी अपने काम पर,अंतिम तस्कर तक को गिरफ्तार करने का दिया हुआ है टास्क..
राँची।राजधानी राँची से अंश और अंशिका के रहस्मयी ढंग से गायब होने के बाद राँची पुलिस की जांच और दोनों बच्चों की सकुशल बरामदगी ने एक ऐसे रैकेट का खुलासा कर दिया जो शहर से मासूम बच्चों को चुरा उनसे कई तरह के अनैतिक काम कराता है।राँची पुलिस इस रैकेट के 15 लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है और यह सिलसिला फिलहाल थमने नहीं जा रहा है।राँची पुलिस की एसआईटी वर्तमान में भी ऑन वर्क है।राँची के एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी अभियान से घबराकर बच्चा चोर गिरोह का नेटवर्क फिलहाल भूमिगत हो गया है।लेकिन राँची पुलिस ने इसे अभियान के तहत लिया है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।पूरे नेटवर्क पर नजर रखी जा रही है। जैसे ही गिरोह के अन्य सदस्यों की सूचना मिलेगी उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।वहीं उन्होंने बताया कि बरामद किये गए बच्चों का डीएनए के लिए कोर्ट से अनुमति मिल चुकी है और एफएसएल टीम की मदद ली जाएगी। डीएनए रिपोर्ट के बाद ही बच्चों को दावेदारों को सौंपा जाएगा।
राँची पुलिस ने धुर्वा थाना क्षेत्र से अगवा अंश और अंशिका की बरामदगी की गुत्थी सुलझाने में अपहरण के एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया है। एसएसपी बताया कि हमारी एसआईटी अभी भी काम पर है, हमारी योजना इस गिरोह के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की है और हम इस पर काम लगे हुए हैं।
सबसे पहले यह बता दें कि बच्चा चोरी वाले गिरोह का राँची पुलिस द्वारा खुलासा किया गया है।अब तक इस पूरे गिरोह में शामिल 16 लोगों को पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचाया है। वहीं लगभग 55 बच्चों को रेस्क्यू करने में राँची पुलिस की टीम कामयाब हुई है।अब तक की जांच में राँची पुलिस को यह पता चला है कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया निवासी सूरज रवानी चोरी हुए बच्चों का बड़ा खरीदार है।वह गुलगुलिया गिरोह से चोरी हुए बच्चों को खरीदता था।इसके बाद उन बच्चों से भीख मंगवाता था। साथ ही उनसे मोबाइल चोरी और घर में चोरी की वारदातों को भी अंजाम दिलाता है।सूरज रवानी बच्चियों को पालता भी है।बच्चियों के थोड़ी बड़ी होने के बाद उन बच्चियों से देह व्यापार कराया जाता है। पुलिस को जांच में यह भी जानकारी मिली है कि झारखण्ड से चोरी हुए कई बच्चों के अंगों की बिक्री की गई है।हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि झारखण्ड से गायब किए गए बच्चों की बंगाल के अलावा बिहार, यूपी में भी बिक्री की गई है।
एसएसपी राकेश रंजन के अनुसार, जल्द ही पुलिस की स्पेशल टीम जांच के लिए बंगाल जाएगी।एसएसपी ने बताया कि अंश और अंशिका की तलाश में सीआईडी के अलावा कई एनजीओ से भी सहयोग लिया गया था।इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए सीआईडी की टीम हमारी भरपूर मदद कर रही है।
राँची पुलिस की तफ्तीश में ये बात सामने आयी है कि गुलगुलिया गैंग हाट-बाजार और गली मुहल्लों में बैलून की घूम-घूमकर बिक्री के अलावा स्लम क्षेत्रों में कचरा चुनने आदि का कार्य किया करते हैं।इस दौरान वैसे बच्चों की रेकी करते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से जुड़े हुए हैं।उन बच्चों को बैलून समेत अन्य चीजें देकर बहलाते-फुसलाते हैं।फिर मौका मिलते ही बच्चों को उठा कर अपने साथ ले जाते हैं। जगन्नाथपुर खटाल के अंश और अंशिका के साथ भी नव खेरवार उर्फ सूर्य और सोनी ने ऐसा ही कर अगवा कर लिया था।पुलिस के मुताबिक गुलगुलिया गैंग राँची समेत देश के करीब हर शहर में अपना डेरा जमाये हुए हैं।
राँची पुलिस को जांच में पता चला कि बच्चों का अपहरण करने वाला गुलगुलिया गैंग तीन लेयर में काम करता है। पहले लेयर में बच्चों की रेकी के साथ उसे अगवा किया जाता है।वहीं दूसरे लेयर में उस बच्चे को लेकर दूसरे राज्य में जाया जाता है।तीसरे लेयर में बच्चों का इस्तेमाल प्रोडक्ट के रूप में किया जाता है और गैंग बच्चों के अंगों की खरीद बिक्री का काम करता है।वहीं अगर 12 या 13 साल की किसी बच्ची का अगवा किया तो उसे सीधे देह व्यापार में लगा दिया जाता है।
राँची पुलिस ने अंश और अंशिका के अपहरणकर्ता नव खेरवार और सोनी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी, दोनों ने पूछताछ में पूरे गिरोह की जानकारी दी। जिसके बाद पुलिस ने सबसे पहले रिंग रोड से आरोपी प्रमोद, आशिख, विरोधी और राज रवानी को पकड़ा।उनकी निशानदेही पर रामगढ़ के कोठार एंथोनी को पकड़ा।जिसके बाद कुज्जू और सिल्ली के अलावा लातेहार से पुलिस ने चोरी हुए अन्य बच्चों को बरामद किया।
जगन्नाथपुर खटाल से अगवा हुए दो मासूम बच्चों अंश और अंशिका की बरामदगी के मामले में राँचीपुलिस ने अपनी जांच के दायरे को और बढ़ा दिया है। वहीं दूसरी तरफ राज्य के विभिन्न जिलों से कुल 52 बच्चों को बरामद किया गया है, जिनमें से 40 पर 50 से अधिक लोगों ने दावेदारी ठोंक दी है। पुलिस अब सभी दावेदारों और बच्चों का डीएनए टेस्ट कराएगी।
पुलिस के अनुसार, बरामद बच्चों को अपनाने के लिए लोग थाने और शेल्टर होम पर उमड़ पड़े हैं। कोई खुद को चाचा बता रहा है, तो कोई मौसेरा भाई। दावेदारी करने वालों की संख्या 50 से अधिक हो चुकी है। लेकिन पुलिस किसी पर भरोसा नहीं कर रही।डीएनए टेस्ट प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इससे सच्चे परिजनों की पहचान होगी और फर्जी दावेदारों का पर्दाफाश भी होगा।
वहीं बच्चा चोर गिरोह के चंगुल से छुड़ाए गए 52 बच्चों में से 12 पर अब तक कोई दावेदारी नहीं हुई है।ये बच्चे बोकारो, रामगढ़, सिल्ली आदि जगहों से बरामद किए गए हैं।पुलिस ने इनके फोटो और विवरण वात्सल्य पोर्टल पर अपलोड कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रचार-प्रसार नहीं किया जा सकता, इसलिए पोर्टल का सहारा लिया गया है।यह पोर्टल मिसिंग बच्चों के लिए ही है, जहां से असली अभिभावक संपर्क कर सकेंगे। सभी बच्चे फिलहाल शेल्टर होम में सुरक्षित हैं।
वहीं जांच में बच्चा चोरी गैंग के सरगना विरोधी खेरवार उर्फ अनुराग, प्रमोद कुमार, आशिक गोप और बेबी देवी के राँची के सिल्ली के नवाडीह टुटकी में सिल्ली कॉलेज के पास 17 डिसमील जमीन पर बने आलीशान मकान का भी राज खुला है।घरों में टाइल्स-मार्बल जड़े हैं।अनुराग का रामगढ़ में भी मकान है। पुलिस स्पेशल टीम इनकी संपत्ति की जांच कर रही है।जमीन का मालिक कौन, निर्माण के पैसे कहां से आए – ये सवालों के घेरे में हैं।पुलिस को शक है कि चोरी के बच्चों को बेचकर कमाई गई कमाई से ये संपत्तियां अर्जित की गईं।सभी से पूछताछ में अर्जन स्रोत की जानकारी ली जा रही।कोर्ट के आदेश पर संपत्ति जब्ती की कार्रवाई होगी।
बता दें दो जनवरी को जगन्नाथपुर खटाल से अंश-अंशिका का अपहरण हुआ।पुलिस की कार्रवाई में 14 जनवरी को रामगढ़ से दोनों बच्चो की बरामदगी के साथ नव खेरवार और सोनी गिरफ्तार किए गए। जिसके बाद पूछताछ में गैंग का पूरा नेटवर्क खुला।जिसके बाद सिल्ली, रामगढ़, लातेहार, बोकारो आदि से अन्य 13।को गिरफ्तार किया गया। इनकी निशानदेही पर 52 बच्चे बरामद हुए।सभी 15 को जेल भेजा गया।जिसमें विरोधी खेरवार उर्फ अनुराग (रामगढ़), अंथोनी खरवार (रामगढ़), प्रमोद कुमार (सिल्ली), आशिक गोप (सिल्ली), राज रवानी (लातेहार), नव खेरवार (पुरुलिया), सोनी कुमारी (रामगढ़), चांदनी देवी (रामगढ़), सीता देवी (लातेहार), दीनू भुइयां (लातेहार), संन्यासी खेरवार (रामगढ़), मालिन देवी (रामगढ़), बेबी देवी (सिल्ली), सोनिया देवी, उपैइया खेरवार (लातेहार)।
राँची पुलिस के द्वारा बच्चा चोरी करने वाले गिरोह के बड़े नेटवर्क का खुलासा करने के बाद पिछले कई सालों से राज्यभर में गायब 400 से अधिक बच्चों के बरामद होने की अब आस जग गई है।एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि झारखण्ड के विभिन्न जिलों से अभी भी 400 से अधिक बच्चे गायब हैं। बच्चा चोर गिरोह के खिलाफ के बाद अब नए सिरे से गायब बच्चों के बारे में जानकारियां इकट्ठा की जा रही हैं।

