पुलिस कस्टडी में आधी रात को चलीं गोलियां, पांच हत्याओं का आरोपी एनकाउंटर में ढेर

 

गुवाहाटी। असम के गुवाहाटी में एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या के मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी घनकांत गोगोई पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस के अनुसार, 3 नवंबर की देर रात उसे गुवाहाटी से शिवसागर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में उसने कथित तौर पर पुलिस अधिकारी की सर्विस पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की। हथियार को लेकर हुई छीना-झपटी के दौरान गोली चली और पुलिस की जवाबी फायरिंग में घनकांत गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दौरान एक पुलिस अधिकारी के पैर में भी गोली लगी है। उनकी हालत स्थिर बताई गई है।

26 अक्टूबर को गुवाहाटी के होटल बिलास इन में हुई पांच लोगों की हत्या के बाद से ही यह मामला असम में चर्चा का विषय बना हुआ था। अब मुख्य आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत ने इस हत्याकांड को एक नया मोड़ दे दिया है।

मुठभेड़ की पूरी कहानी: शौच के बहाने रुकवाई गाड़ी, फिर पुलिस से भिड़ गया आरोपी

पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, घनकांत गोगोई को शिवसागर जिले में एक दूसरे मामले के सिलसिले में ले जाया जा रहा था। इसी दौरान 4 नवंबर की तड़के करीब तीन बजे शिवसागर जिले के फुलपानिसिगा इलाके में उसने पुलिस टीम से गाड़ी रोकने को कहा। उसने शौच जाने की बात कही थी।

एसएसपी पपोरी चेतिया के अनुसार, जब पुलिसकर्मी उसे वाहन से नीचे उतार रहे थे, तभी उसने सब-इंस्पेक्टर देबाशीष शर्मा की सर्विस पिस्टल छीन ली और पुलिस टीम पर गोली चला दी। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने तीन राउंड फायरिंग की, जिसमें सब-इंस्पेक्टर घायल हो गए। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने अधिकारी की जान बचाने और आरोपी को भागने से रोकने के लिए जवाबी फायरिंग की।

इस गोलीबारी में घनकांत को भी गोली लगी। पुलिस उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंची, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घायल सब-इंस्पेक्टर को भी उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल और वाहन से गोलियों के निशान एवं खोखे बरामद हुए हैं।

 

होटल की लीज का विवाद बना पांच लोगों की मौत की वजह

दरअसल, पूरा मामला 26 अक्टूबर की रात गुवाहाटी के उलुबारी स्थित होटल बिलास इन में हुई सामूहिक हत्या से जुड़ा है। घनकांत गोगोई (34) ने इस होटल को भराली परिवार से पांच साल के लिए लीज पर लिया था। 10 सितंबर 2025 को हुए समझौते के मुताबिक होटल का मासिक किराया करीब 1.80 लाख रुपये तय हुआ था।

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि होटल के संचालन, प्रबंधन, सुविधाओं और लीज से जुड़े मुद्दों को लेकर घनकांत और होटल मालिक परिवार के बीच विवाद चल रहा था। 26 अक्टूबर को इसी विवाद को सुलझाने के लिए होटल में बैठक बुलाई गई थी। लेकिन बातचीत शुरू होने से पहले ही दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और हाथापाई होने लगी।

आरोप है कि इसी दौरान घनकांत ने अपनी लाइसेंसी .32 बोर की पिस्टल निकाल ली और वहां मौजूद लोगों पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इस गोलीबारी में छह लोग जख्मी हुए, जिनमें पांच की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।

पांच मृतकों में चार एक ही परिवार के

इस गोलीकांड में जान गंवाने वालों की पहचान होटल की सह-मालकिन हेलेना भराली (58), उनके भाई भूदेव भराली (65), बेटे देबर्षि कश्यप (39), बहू रिनिका कश्यप (30) और परिवार से जुड़े कर्मचारी नारायण दास (48) के रूप में हुई थी। वहीं, परिवार के ड्राइवर सत्येंद्र पाठक (43) गोली लगने से घायल हुए थे। उनका इलाज गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा था।

 

हत्याकांड के बाद घनकांत गोगोई ने घटना वाली रात ही गुवाहाटी के बशिष्ठा थाने में आत्मसमर्पण कर दिया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कथित वारदात में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी .32 बोर की पिस्टल भी जब्त की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए 27 अक्टूबर को संयुक्त पुलिस आयुक्त अंकुर जैन के नेतृत्व में छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया था।

जांच के दौरान पुलिस ने 2 नवंबर को आरोपी को दोबारा होटल बिलास इन ले जाकर क्राइम सीन रीक्रिएट कराया था। करीब दो से तीन घंटे तक चली इस प्रक्रिया में छह डमी का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने होटल के अंदर और बाहर की उन जगहों को दोबारा तैयार किया, जहां कथित तौर पर गोलियां चलाई गई थीं। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। पुलिस ने आरोपी की पत्नी से भी पूछताछ की थी और हथियार के लाइसेंस से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही थी।

रिमांड खत्म होने के बाद दूसरे मामले में ले जा रही थी पुलिस: 3 नवंबर को सात दिनों की पुलिस रिमांड पूरी होने पर घनकांत को अदालत में पेश किया गया था, जहां उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। हालांकि, शिवसागर जिले में दर्ज एक अलग मामले के सिलसिले में पुलिस ने उसे जेल से दोबारा अपनी हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए शिवसागर ले जा रही थी। इसी यात्रा के दौरान पुलिस मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई।

 

 

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