झारखण्ड में सरकारी खजाने पर सेंध…ऊर्जा विभाग से लेकर ट्रेजरी तक,171 करोड़ की अवैध निकासी का खुलासा…सिस्टम में कौन है जिम्मेवार ?

के चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। राज्य के ऊर्जा, पर्यटन विभाग और विभिन्न जिला ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी ने सरकारी तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अलग-अलग विभाग के कर्मचारियों सरकारी पोर्टल और बैंकिंग सिस्टम में सेंध लगाकर जनता की गाढ़ी कमाई का गबन किया है। मामला संज्ञान में आते ही सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करने का आदेश दिया है।इनमें से कई मामले में शामिल आरोपियों को जहां एक तरफ जेल भेजा गया वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने दोषी पाते हुए सजा भी सुनाई है।

झारखण्ड सरकार के पर्यटन विभाग और ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड के खातों से 107 करोड़ रुपए के फर्जी निकासी का मामला सामने आया था।इस मामले को लेकर झारखण्ड सीआईडी में मामला दर्ज किया गया था।इस केस में तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता के निर्देश पर टीम का गठन किया गया था। जांच में खुलासा हुआ है, कि 107 करोड़ रूपये की फर्जी निकासी करने के बाद आरोपियों के द्वारा पश्चिम बंगाल में अलग-अलग 900 बैंक खातों में इसे ट्रांसफर किया गया था। इस मामले में अब तक कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है,और 1.23 करोड़ रुपया नगद बरामद किया गया है।उल्लेखनीय है कि तीन अक्टूबर 2024 को जीएम, फाइनेंस, झारखण्ड टूरिज्म डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा 10.4 करोड़ तथा झारखण्ड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मास्टर ट्रस्ट द्वारा 09 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर फर्जी अकाउंट के द्वारा निकासी की शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर दर्ज कराई गयी थी।इसके अगले दिन चार अक्टूबर को झारखण्ड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड द्वारा 40.5 करोड़ तथा झारखण्ड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मास्टर ट्रस्ट द्वारा 56.5 करोड़ की राशि का फर्जी अकाउंट के द्वारा निकासी की शिकायत पोर्टल पर दर्ज करायी गयी थी।जांच करने के दौरान एसआईटी को अबतक 350 से ज्यादा फर्जी अकाउंट का पता चला है।इन अकाउंट को फ्रीज कर सरकार के साढ़े 39 करोड़ रुपये को भी फ्रीज किया गया था।

ताजा मामला बोकारो ट्रेजरी से रिटायर पुलिसकर्मी उपेंद्र सिंह के वेतन मद में करोड़ों की अवैध निकासी के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि नवंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच 25 माह में कुल 4.30 करोड़ रुपए निकाले गए।इससे पहले 20 माह में 3.15 करोड़ रुपए की निकासी की बात सामने आई थी इस मामले में ट्रेजरी ऑफिसर गुलाब चंद उरांव ने छह अप्रैल की देर रात बोकारो स्टील सिटी थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके आधार पर पुलिस ने अकाउंटेंट कौशल पांडेय को गिरफ्तार कर लिया था। जांच में यह भी सामने आया है कि कौशल पांडेय और उसकी पत्नी के बैंक खातों में बड़ी रकम जमा हुई है।पत्नी अनु पांडेय के एसबीआई खाते में 58 लाख रुपए और कौशल पांडेय के खाते में 33 लाख रुपए मिले हैं। दोनों खातों को तत्काल फ्रीज कर दिया गया है। अपर समाहर्ता की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि कुबेर डीडीओ लेवल बिल मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल में छेड़छाड़ की गई।उपेंद्र सिंह जुलाई 2016 में ही रिटायर हो चुके हैं, इसके बावजूद पोर्टल में उनकी जन्म तिथि और खाता संख्या में बदलाव कर उनके नाम पर फर्जी निकासी की गई।कौशल पांडेय वर्ष 2018 से इस पद पर तैनात है।अब उसके पूरे कार्यकाल की जांच की जा रही है।

वहीं,हजारीबाग ट्रेजरी से आठ वर्षों में 27 करोड़ से अधिक रुपए की अवैध ट्रांजैक्शन हुआ है।बोकारो के बाद अब हजारीबाग में भी बड़ा स्कैम का खुलासा हुआ है।जिला प्रशासन द्वारा कार्रवाई करते हुए अपर समाहर्ता, हजारीबाग की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया।इस मामले की जांच के दौरान यह पाया गया कि अवैध रूप से सरकारी राशि की निकासी की गई तथा उक्त राशि को विभिन्न संदिग्ध बैंक खातों में हस्तांतरित किया गया। कुल 21 संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने का निर्देश संबंधित बैंकों को दिया गया है। इन खातों में उपलब्ध लगभग 1.60 करोड़ रुपया (एक करोड़ साठ लाख रुपये) की राशि फ्रीज कर सुरक्षित कर लिया गया है।

इस मामले में पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।जिसमें तीन पुलिसकर्मी शंभू, धीरेन्द्र और रजनीश शामिल हैं। वहीं धीरेन्द्र और शंभू की पत्नी को भी जेल भेजा गया है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि उनकी पत्नी का भी इस वित्तीय घोटाला में संलिप्त पाई गयी है। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए इन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

बता दें सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक से 33 करोड़ घोटाले का मामला साल 2019 में सामने आया था, जब सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ था।जांच में सामने आया कि कुल लगभग 38 करोड़ रुपए का ऋण बांटा गया, जिसमें से 32 करोड़ का लोन अकेले संजय डालमिया द्वारा लिया गया था, जबकि शेष करीब 4 करोड़ रुपए अन्य लोगों को दिए गए थे।इस संबंध में सरायकेला थाने में मामला दर्ज किया गया था।मामले की संवेदनशीलता और बड़ी राशि के गबन को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच सीआईडी को सौंपी थी। इस मामले में तीन लोगों को कोर्ट ने सजा सुनाई है।

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