झारखण्ड में माओवाद की कमर टूटी: 2 करोड़ 20 लाख का खूंखार माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा दो शीर्ष कमांडरों और दो सहयोगियों के साथ गिरफ्तार…

राँची।झारखण्ड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को लाल आतंक के खिलाफ चलाए जा रहे संयुक्त अभियान में अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। “ऑपरेशन दौरा पहाड़” के तहत सुरक्षा बलों ने झारखण्ड से भाकपा (माओवादी) के खात्मे की पटकथा लिखते हुए संगठन के एकमात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य (PBM) और 2 करोड़ 20 लाख रुपये के इनामी खूंखार नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल को धर दबोचा है।
28 जुलाई 2026 को धनबाद जिले के बरवड्डा थाना अंतर्गत जंगली इलाके में चलाए गए इस सीक्रेट और सटीक ऑपरेशन में मिसिर बेसरा के साथ संगठन के दो अन्य शीर्ष कमांडर—15 लाख का इनामी रीजनल कमेटी मेंबर (RCM) मेहनत उर्फ मोछु उर्फ विभीषण और एरिया कमेटी मेंबर (ACM) गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा पकड़े गए। इसके साथ ही पुलिस ने मौके से संगठन के दो अन्य सदस्यों मंगल मुर्मू (घोराबांध, बरवड्डा) और दिनेश राय (पुरनाडीह, बरवड्डा) को भी गिरफ्तार किया है।
तबाही का खौफनाक चेहरा: 175 से ज्यादा कांडों का मास्टरमाइंड
गिरफ्तार मिसिर बेसरा (पिता स्व. दर्पण बेसरा, ग्राम मदनाडीह, पीरटांड, गिरिडीह) कोई साधारण नक्सली नहीं, बल्कि दशकों से देश और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ था। उस पर अकेले 175 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। मिसिर बेसरा पर झारखण्ड सरकार द्वारा 1 करोड़ रुपये और ओडिशा सरकार द्वारा 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
मिसिर बेसरा का इतिहास बेहद खूनी रहा है। वह सितंबर 2001 में चुरचू (हजारीबाग) में 12 जवानों की हत्या, अक्टूबर 2001 में तोपचांची (धनबाद) में 13 पुलिसकर्मियों का कत्लेआम, जहानाबाद जेल ब्रेक कांड की साजिश और चाईबासा क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर हुए कई बड़े आईईडी (IED) धमाकों का मुख्य सूत्रधार रहा है। उसके साथ पकड़े गए RCM मेहनत (घोरबंदा, धनबाद) पर 137 मामले और ACM गौरव (सतकठिया, मधुबन, गिरिडीह) पर 8 गंभीर मामले दर्ज हैं।
भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद
सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम (धनबाद व गिरिडीह जिला बल और 209 कोबरा बटालियन) ने मुठभेड़ और घेराबंदी के बाद इन शीर्ष माओवादियों के कब्जे से घातक हथियारों की बड़ी खेप जब्त की है। मौके से 3 एके-47 राइफल (AK-47), 8 मैगजीन और 288 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
झारखण्ड से माओवाद का लगभग खात्मा!
झारखंड पुलिस महानिदेशक के अनुसार, माओवादी संगठन की इस शीर्ष पोलित ब्यूरो लीडरशिप की गिरफ्तारी के बाद राज्य से भाकपा (माओवादी) की जड़ें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। हाल ही में 27 बड़े कमांडरों के आत्मसमर्पण, 20 लाख के इनामी रविन्द्र गंझू और 25 लाख के इनामी अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद मिसिर बेसरा का पकड़ा जाना लाल आतंक के ताबूत में आखिरी कील साबित हुआ है।
झारखण्ड पुलिस ने जंगलों में छिपे बचे-खुचे माओवादियों से अंतिम अपील की है कि वे हिंसा और भयदोहन का रास्ता छोड़कर सरकार की “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति” का लाभ उठाएं और मुख्यधारा में लौट आएं, अन्यथा उनके खिलाफ भी ऐसी ही निर्णायक और कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

