सीक्रेट मिशन सफल: कई वर्षों से सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बने एक करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा सहित तीन गिरफ्तार

राँची/धनबाद।झारखण्ड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिलने की खबर सामने आई है। प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के शीर्ष नेता, पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा को मंगलवार देर रात धनबाद-गिरिडीह सीमा क्षेत्र से दो अन्य नक्सलियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है।  सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीन लोगों से सुरक्षा एजेंसियां गहन पूछताछ कर रही हैं।

गिरफ्तार तीनों नक्सली

तीन दशक तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए बना रहा सबसे बड़ी चुनौती

मिसिर बेसरा पिछले करीब तीन दशक से झारखण्ड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा है। उस पर विभिन्न राज्यों में हत्या, पुलिस बलों पर हमले, विस्फोट, लेवी वसूली, हथियारबंद गतिविधियों और नक्सली संगठन के विस्तार से जुड़े लगभग 141 आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। झारखण्ड सरकार द्वारा उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मिसिर बेसरा लंबे समय तक कोल्हान और सारंडा के घने जंगलों में संगठन का संचालन करता रहा। वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व और क्षेत्रीय कमांडरों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता था। कई बड़े नक्सली हमलों की रणनीति तैयार करने और संगठन के पुनर्गठन में उसकी अहम भूमिका बताई जाती रही है।

एक महीने तक चला बेहद गोपनीय ऑपरेशन

सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने करीब एक महीने पहले मिसिर बेसरा की गतिविधियों के संबंध में महत्वपूर्ण इनपुट प्राप्त किए थे। इसके बाद सीआरपीएफ, झारखण्ड पुलिस, झारखण्ड जगुआर और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त टीम ने उसके मूवमेंट पर लगातार नजर रखनी शुरू कर दी।

बताया जा रहा है कि इस पूरे अभियान को अत्यंत गोपनीय रखा गया। यहां तक कि जिन जिलों से होकर अभियान संचालित किया जा रहा था, वहां के स्थानीय पुलिस तंत्र को भी सीमित जानकारी ही साझा की गई। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की सूचना लीक होने से रोकना और ऑपरेशन को पूरी तरह सफल बनाना था।

रणनीति के तहत नहीं की गई जल्दबाजी

सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा बलों ने मिसिर बेसरा को सारंडा जंगल, सरायकेला-खरसावां, राँची जिला सीमा, पश्चिम बंगाल सीमा और फिर धनबाद क्षेत्र तक लगातार निगरानी में रखा। लेकिन बीच रास्ते में उसे गिरफ्तार करने की बजाय एजेंसियों ने इंतजार किया।

सुरक्षा अधिकारियों का मानना था कि जंगल या माओवादी प्रभाव वाले इलाकों में गिरफ्तारी का प्रयास करने पर मुठभेड़, जवाबी हमला या उसके सहयोगियों द्वारा छुड़ाने की कोशिश हो सकती थी। इसलिए उसे अपेक्षाकृत सुरक्षित और नियंत्रित क्षेत्र तक पहुंचने दिया गया।

नाटकीय अंदाज में हुई गिरफ्तारी

सूत्रों के अनुसार, मंगलवार देर रात धनबाद-गिरिडीह सीमा क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से जाल बिछा रखा था। जैसे ही मिसिर बेसरा अपने दो साथियों के साथ निर्धारित स्थान पर पहुंचा, सुरक्षा बलों ने चारों ओर से घेराबंदी कर उसे बिना किसी गोलीबारी के गिरफ्तार कर लिया।

जानकारी यह भी सामने आ रही है कि जिस स्थान पर उसे पकड़ा गया, वहां किसी निजी कार्यक्रम या पार्टी जैसा आयोजन चल रहा था। हालांकि, इस संबंध में भी अभी तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

शीर्ष अधिकारियों ने संभाली थी कमान

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह, आईजी (ऑपरेशन) नरेंद्र सिंह, झारखण्ड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे तथा सीआरपीएफ के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने की। अभियान की योजना, निगरानी और अंतिम कार्रवाई में इन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है।

अमित शाह के ऐलान के बाद तेज हुआ अभियान

हाल के महीनों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई बार यह घोषणा की है कि केंद्र सरकार मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। इसके बाद झारखण्ड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा समेत नक्सल प्रभावित राज्यों में शीर्ष माओवादी नेताओं के खिलाफ अभियान और तेज कर दिए गए।

सुरक्षा एजेंसियों का फोकस विशेष रूप से उन वरिष्ठ नेताओं पर था जो अभी तक गिरफ्तारी से बचते रहे थे। इनमें मिसिर बेसरा और असीम मंडल प्रमुख नाम माने जाते थे। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।हालांकि असीम मंडल अब भी सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर बताया जा रहा है।

पूछताछ से मिल सकते हैं बड़े खुलासे

सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान माओवादी संगठन की वर्तमान संरचना, हथियारों के नेटवर्क, फंडिंग, लेवी वसूली, शहरी नेटवर्क, नए भर्ती तंत्र और शीर्ष कमांडरों की गतिविधियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। इसके आधार पर आने वाले दिनों में झारखण्ड समेत अन्य राज्यों में और भी बड़े अभियान चलाए जा सकते हैं।

 

जंगल से धनबाद तक पीछा… सुरक्षा बलों ने एक करोड़ के इनामी खूंखार नक्सली मिसिर बेसरा सहित तीन को दबोचा…

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस और सीआरपीएफ की ओर से विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की गई है। इसलिए गिरफ्तारी, उसके स्थान, साथ पकड़े गए लोगों और बरामदगी से जुड़ी कई जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पूछताछ पूरी होने के बाद इस मामले में विस्तृत खुलासा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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