आम्रपाली-मगध कोयला रंगदारी मामला: NIA कोर्ट ने TPC के 12 दोषियों को सुनाई सजा

राँची।झारखण्ड के कोयला अंचलों में टेरर फंडिंग और रंगदारी का रैकेट चलाने वाले उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने कड़ा प्रहार किया है। मंगलवार (18 अगस्त 2026) को राँची स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने बहुचर्चित आम्रपाली-मगध कोयला खनन टेरर फंडिंग मामले (Case No: RC-06/2018/NIA/DLI) में 12 दोषियों के खिलाफ सजा का ऐलान कर दिया।
अदालत ने दोषियों की उग्रवादी गतिविधियों और आपराधिक संलिप्तता की गंभीरता को देखते हुए कड़ी सजा सुनाई है:
05 दोषियों को 10-10 साल का सश्रम कारावास
06 दोषियों को 08-08 साल की कठोर सजा
01 दोषी को 05 साल के कारावास की सजा
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला झारखण्ड के चतरा जिले स्थित टंडवा थाना क्षेत्र के आम्रपाली और मगध कोयला खनन क्षेत्रों में कोयला ट्रांसपोर्टरों, ठेकेदारों, अधिकारियों और कारोबारियों से लेवी (रंगदारी) वसूलने और उग्रवादी संगठन TPC के लिए टेरर फंडिंग जुटाने से जुड़ा हुआ है।
एनआईए की तफ्तीश में चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। जांच में यह साबित हुआ कि प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन TPC के सशस्त्र कैडर (जिनके तार भाकपा-माओवादी से भी जुड़े थे) स्थानीय कमेटियों, कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और अधिकारियों की साठगांठ से खदानों से कोयला खनन और उसके सुगम परिवहन के एवज में भारी-भरकम लेवी वसूलते थे। इस रकम का इस्तेमाल उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और नेटवर्क को मजबूत करने में किया जाता था।
119 गवाहों की गवाही और एनआईए की ठोस पैरवी
एनआईए ने इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए 22 दिसंबर 2018 को चार्जशीट और 10 जनवरी 2020 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कुल 21 आरोपियों को नामजद किया गया था। 13 आरोपियों के खिलाफ शुरुआती ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष (Prosecution) की ओर से 119 सरकारी गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। एनआईए की ठोस तफ्तीश और पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत ने 12 अगस्त 2026 को 12 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया था, जबकि एक आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
उग्रवादी-व्यापारी-अफसर साठगांठ पर करारा प्रहार
राँची में एनआईए की विशेष अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला झारखंड में कोयला क्षेत्रों में दशकों से फल-फूल रहे उग्रवादी-कॉर्पोरेट-प्रशासनिक गठजोड़ के खिलाफ एक ऐतिहासिक संदेश माना जा रहा है। उग्रवादियों को फंडिंग करने और उनके समानांतर तंत्र को बढ़ावा देने वालों पर अदालत के इस कड़े रुख से रंगदारी रैकेट चलाने वालों में हड़कंप मच गया है।

