पटना में पुलिस का बड़ा एनकाउंटर: 20 मिनट तक 42 राउंड फायरिंग, तीन अपराधी ढेर, SHO को भी लगी गोली; अस्पताल में 5 घंटे तक बवाल, पथराव और लाठीचार्ज से मची अफरा-तफरी

 

पटना। बिहार की राजधानी पटना के मनेर थाना क्षेत्र में शुक्रवार की अहले सुबह पुलिस और अपराधियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। शेरपुर गंगा घाट के पास एसटीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीम तथा अपराधियों के बीच करीब 20 मिनट तक ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई। इस मुठभेड़ में तीन कथित अपराधियों की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि मनेर थानाध्यक्ष रजनीश कुमार भी गोली लगने से घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया।

24 राउंड फायरिंग का पुलिस का दावा, जवाब में पुलिस ने चलाई 18 गोलियां

पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आपराधिक इतिहास वाले कुछ लोग शेरपुर इलाके में जुटे हैं और किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके में अभियान शुरू किया। पुलिस टीम जब शेरपुर गंगा घाट के पास पहुंची तो अपराधियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी।

एसएसपी के मुताबिक, अपराधियों की ओर से करीब 24 राउंड गोलियां चलाई गईं। इसके जवाब में पुलिस ने 18 राउंड फायरिंग की। दोनों ओर से लगभग 20 मिनट तक गोलीबारी होती रही। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में तीनों अपराधी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। मुठभेड़ के दौरान मनेर थानाध्यक्ष रजनीश कुमार के हाथ में भी गोली लगी। बताया गया कि अपराधियों की एक गोली उनकी वर्दी को छूते हुए निकली। घायल थानाध्यक्ष को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

तीनों मृतकों की हुई पहचान, हत्या और रंगदारी समेत कई मामलों में थे वांछित

मुठभेड़ में मारे गए तीनों लोगों की पहचान जेपी यादव, सूरज कुमार उर्फ राजा शर्मा और बबलू कुमार के रूप में की गई है। पुलिस के अनुसार, तीनों का आपराधिक इतिहास रहा है और वे पटना जिले के मनेर, दानापुर, शाहपुर समेत आसपास के थानों में दर्ज कई आपराधिक मामलों में वांछित थे। पुलिस ने उन्हें पेशेवर शूटर बताया है। उन पर हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी और अवैध हथियार रखने जैसे मामलों में संलिप्तता का आरोप है।

मुठभेड़ में घायल तीनों को तत्काल इलाज के लिए दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। तीनों की मौत की खबर फैलते ही उनके परिजन और समर्थक बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए। इसके बाद अस्पताल परिसर में देखते ही देखते तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई।

पैक्स अध्यक्ष संजीत कुमार उर्फ भोलू हत्याकांड से जुड़ा है मामला

इस पूरे एनकाउंटर का एक महत्वपूर्ण पहलू पैक्स अध्यक्ष संजीत कुमार उर्फ भोलू की हत्या से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ में मारे गए तीनों आरोपी इस हत्याकांड में शामिल थे। पुलिस का दावा है कि जेपी यादव इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता था, जबकि बबलू कुमार और सूरज कुमार उर्फ राजा शर्मा ने शूटर की भूमिका निभाई थी।

बताया जा रहा है कि संजीत कुमार की हत्या के बाद से ही पुलिस इन आरोपियों की तलाश में जुटी थी। इसी बीच उनके शेरपुर इलाके में जुटने और किसी दूसरी बड़ी वारदात की तैयारी करने की सूचना मिली। इसके बाद एसटीएफ और जिला पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया, जो अंततः मुठभेड़ में बदल गया। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि तीनों के साथ उस समय और कौन-कौन लोग मौजूद थे तथा उनके नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।

अस्पताल में पांच घंटे तक हंगामा, पुलिस से भिड़े परिजन; पथराव और तोड़फोड़

तीनों की मौत की खबर मिलते ही दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल में मृतकों के परिजनों और समर्थकों की भीड़ जुट गई। परिजनों ने एनकाउंटर को लेकर गंभीर सवाल उठाए और पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। वे तीनों के शव देखने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे थे।

धीरे-धीरे विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। परिजनों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की, वाहनों और एंबुलेंस के शीशे तोड़े तथा पुलिस पर पथराव भी किया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। करीब पांच घंटे तक अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। बाद में अतिरिक्त पुलिस बल की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया गया।

मुखबिरी के आरोप में रिंकू माली की पिटाई, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

अस्पताल में हंगामे के दौरान एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। मृतकों के परिजनों ने रिंकू माली नामक व्यक्ति पर पुलिस की मुखबिरी करने का आरोप लगाया। परिजनों का दावा है कि रिंकू माली ही तीनों को घर से बुलाकर बाहर ले गया था और बाद में पुलिस तक उनकी जानकारी पहुंचाई थी। इसी शक में आक्रोशित परिजनों ने उसे पकड़ लिया और जमकर पिटाई कर दी।

पुलिसकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद उसे भीड़ से बचाया। हालांकि, रिंकू माली की भूमिका और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से भी इन आरोपों की पुष्टि किया जाना बाकी है। इस पूरे घटनाक्रम ने एनकाउंटर के बाद मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

पोस्टमार्टम के लिए पटना एम्स भेजे गए शव, FSL टीम ने जुटाए साक्ष्य

अस्पताल में स्थिति नियंत्रित होने के बाद तीनों मृतकों के शवों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पोस्टमार्टम के लिए पटना एम्स भेजा गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, वीडियोग्राफी और चिकित्सकों की निगरानी में पोस्टमार्टम कराने की व्यवस्था की गई है।

उधर, मुठभेड़ स्थल पर एफएसएल की टीम ने पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने घटनास्थल से दो पिस्तौल, एक देसी कट्टा और कई खोखे बरामद किए हैं। बरामद हथियारों और गोलियों के खोखों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मुठभेड़ के दौरान कितनी गोलियां चलाई गईं और किस हथियार का इस्तेमाल हुआ।

मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल, मीसा भारती भी अस्पताल पहुंचीं

मनेर एनकाउंटर के बाद दानापुर अस्पताल में हुए हंगामे के बीच राजद सांसद मीसा भारती भी अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। एनकाउंटर को लेकर परिजनों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद मामले ने राजनीतिक रूप भी लेना शुरू कर दिया है। परिजन पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल पुलिस का दावा है कि तीनों अपराधी गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित थे और पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड में उनकी भूमिका थी। दूसरी ओर, मृतकों के परिजन पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच और पुलिस की विस्तृत जांच से मुठभेड़ की परिस्थितियों को लेकर अहम जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

 

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