पूर्व CM अर्जुन मुंडा के काफिले में जोरदार टक्कर, अचानक ब्रेक लगते ही पीछे से भिड़ी पुलिस की टाटा सूमो; बाल-बाल बचे पूर्व मुख्यमंत्री

 

सरायकेला।झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के काफिले में शुक्रवार शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब काफिले में शामिल पुलिस की टाटा सूमो उनकी गाड़ी से पीछे से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पूर्व मुख्यमंत्री की गाड़ी का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि पुलिस वाहन का अगला बायां पहिया बुरी तरह टूट गया। गनीमत रही कि इस हादसे में अर्जुन मुंडा समेत किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

घटना सरायकेला-खरसावां जिले के चौका थाना क्षेत्र अंतर्गत एनएच-33 टाटा-राँची हाइवे पर चावलीबासा के पास शुक्रवार शाम करीब 6:30 बजे हुई। जानकारी के मुताबिक अर्जुन मुंडा राँची से जमशेदपुर लौट रहे थे। इसी दौरान अचानक एक कार उनके काफिले के बीच घुस गई। कार को सामने देखकर अर्जुन मुंडा की गाड़ी के चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिए। इसी बीच पीछे से आ रही पुलिस की टाटा सूमो चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और सीधे पूर्व मुख्यमंत्री की गाड़ी से जा भिड़ा।

टक्कर के बाद मची अफरा-तफरी, क्षतिग्रस्त हुआ पुलिस वाहन

अचानक हुई इस टक्कर से काफिले में शामिल लोगों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। टक्कर से अर्जुन मुंडा की गाड़ी का पिछला हिस्सा हल्का क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि पुलिस की टाटा सूमो का अगला बायां पहिया पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।

सभी का हाल जाना, फिर गंतव्य के लिए रवाना हुए अर्जुन मुंडा

घटना की सूचना मिलते ही चौका थाना प्रभारी संजीव कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और दुर्घटना की जानकारी ली। वहीं, हादसे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने सबसे पहले काफिले में शामिल सभी लोगों का कुशल-क्षेम जाना। सभी के सुरक्षित होने की जानकारी लेने के बाद वे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए।

इधर, पूर्व मुख्यमंत्री के काफिले की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर मिलते ही भाजपा कार्यकर्ता भी घटनास्थल पर पहुंच गए। राहत की बात यह रही कि इतनी जोरदार टक्कर के बावजूद किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

जर्जर सुरक्षा वाहनों को लेकर अर्जुन मुंडा ने सरकार पर उठाए सवाल, बोले- क्या बड़ी दुर्घटना या जनहानि के बाद खुलेगी अधिकारियों की नींद?

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के लिए उपलब्ध कराए जा रहे वाहनों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा काफिले में इस्तेमाल हो रहे वाहनों की हालत बेहद खराब है। यह केवल उनकी सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि दिन-रात ड्यूटी करने वाले सुरक्षाकर्मियों के जीवन से भी जुड़ा गंभीर विषय है। बार-बार शिकायत और पत्राचार के बावजूद वाहनों की स्थिति में सुधार नहीं होना चिंताजनक है।

अर्जुन मुंडा के अनुसार, उनके कार्यालय की ओर से सुरक्षा वाहनों की जर्जर स्थिति, बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों और सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। इस संबंध में 28 जुलाई 2024 को पत्रांक 10453, 22 अगस्त 2024 को पत्रांक 10476, 19 अप्रैल 2025 को पत्रांक 10740, 11 सितंबर 2025 को पत्रांक 10905, 9 मार्च 2026 को पत्रांक 11133 और 29 जून 2026 को पत्रांक 11298 के माध्यम से अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया था।

उन्होंने बताया कि गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से भी 14 मार्च 2026 को पत्रांक 08/सुरक्षा(II)-01/2025 और ज्ञापांक 1645 के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया गया था। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका।

अर्जुन मुंडा ने आरोप लगाया कि जर्जर वाहनों की केवल सामान्य मरम्मत कर उन्हें दोबारा सुरक्षा काफिले में शामिल कर दिया जाता है। कुछ ही समय बाद उनमें फिर तकनीकी खराबियां आने लगती हैं। उन्होंने कहा कि शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो, जब इन वाहनों में कोई न कोई तकनीकी समस्या सामने नहीं आती हो। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की समुचित समीक्षा क्यों नहीं की गई। पुराने और जर्जर वाहनों का सुरक्षा काफिले में इस्तेमाल सुरक्षाकर्मियों की जान के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है।

सायरन और झंडे तक की व्यवस्था नहीं, काफिले में घुस जाती हैं दूसरी गाड़ियां

अर्जुन मुंडा ने सुरक्षा काफिले में शामिल वाहनों पर सायरन और झंडे जैसी पहचान संबंधी व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से दूसरे वाहन चालकों को सुरक्षा काफिले के गुजरने की जानकारी नहीं मिल पाती। कई बार दूसरी गाड़ियां काफिले के बीच में प्रवेश कर जाती हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी? अर्जुन मुंडा ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था महज औपचारिकता नहीं है, बल्कि लोगों की जान की रक्षा से जुड़ी गंभीर जिम्मेदारी है।

उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने और सुरक्षा काफिले के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित एवं तकनीकी रूप से दुरुस्त वाहन उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही वाहनों की स्थिति की समीक्षा कर स्थायी समाधान निकालने पर जोर दिया, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।

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