खूँटी में सात मौतों का मातम और इंसाफ की मांग, ग्रामीणों का 9 घंटे तक महाचक्का जाम…
खूँटी।एक स्कूटी सवार की मदद के लिए सड़क पर उतरे ग्रामीणों को क्या पता था कि कुछ ही पलों में मौत का ऐसा तांडव होगा, जो कई परिवारों की दुनिया उजाड़ देगा। खूंटी के कर्रा में हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। चार महिलाओं और तीन बच्चों समेत सात लोगों की दर्दनाक मौत के बाद शुक्रवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मृतकों के परिजनों को मुआवजा, घायलों के बेहतर इलाज और सड़क पर भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार पर लगाम लगाने की मांग को लेकर लोग सड़क पर उतर आए। सुबह से शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन करीब नौ घंटे तक चला। कर्रा रेलवे फाटक और मुख्य मार्ग पर ग्रामीणों ने चक्का जाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। आखिरकार अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और यातायात बहाल हो सका।
मदद करने निकले थे ग्रामीण, खुद बन गए हादसे का शिकार
दरअसल, गुरुवार की देर रात करीब 10 बजे कर्रा थाना क्षेत्र के कर्रा-तोरपा मुख्य मार्ग पर कोशांबी कॉलोनी और जोने-लुदरू मोड़ के पास एक स्कूटी सवार दुर्घटनाग्रस्त होकर सड़क किनारे झाड़ियों में जा गिरा था। घटना की जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोग उसकी मदद के लिए मौके पर पहुंचे। कुछ लोग स्कूटी सवार को निकालने में जुटे थे, जबकि महिलाएं और बच्चे भी घटनास्थल के आसपास मौजूद थे।
इसी दौरान तोरपा की ओर से आ रहा तेज रफ्तार 18 चक्का ट्रेलर अचानक वहां पहुंचा और सड़क किनारे मौजूद लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भयावह थी कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस दुर्घटना में चार महिलाओं और तीन बच्चों समेत सात लोगों की जान चली गई। दो अन्य लोग घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार, छह लोगों की मौत घटनास्थल पर हुई, जबकि एक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
मौत के बाद सड़क पर उतरा आक्रोश, नौ घंटे तक ठप रहा आवागमन
सात लोगों की मौत की खबर फैलते ही शुक्रवार सुबह ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने कर्रा चौक और रेलवे फाटक के पास मुख्य सड़क को जाम कर दिया। ग्रामीणों की मांग थी कि मृतकों के परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए, सरकारी प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा मिले और सड़क पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हादसे में कई परिवारों ने अपने घर के सदस्यों को खो दिया है। किसी ने मां खोई, किसी ने पत्नी-बेटी और किसी परिवार की गोद सूनी हो गई। ऐसे में केवल आश्वासन से पीड़ित परिवारों का दर्द कम नहीं होगा। प्रशासन को तत्काल सहायता के साथ प्रभावित परिवारों के भविष्य की भी चिंता करनी चाहिए।
सड़क जाम की सूचना मिलने पर डीएसपी विजय सिंह, सीओ अनवेंसा ओना, बीडीओ स्मिता नगेसिया, इंस्पेक्टर परशुराम पासवान, कर्रा थाना प्रभारी राजू कुमार और तोरपा थाना प्रभारी मनीष कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत की और पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराने के साथ सरकारी प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद करीब नौ घंटे से जारी चक्का जाम समाप्त हुआ और मुख्य मार्ग पर वाहनों का परिचालन शुरू हो सका।
अर्जुन मुंडा पहुंचे घटनास्थल, पीड़ित परिवारों को दी आर्थिक सहायता
इधर, शुक्रवार दोपहर पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व विधायक कोचे मुंडा, भाजपा जिलाध्यक्ष आनंद कुमार और आदिवासी नेता प्रकाश टूटी भी घटनास्थल पहुंचे। नेताओं ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और इस असहनीय दुख की घड़ी में उन्हें सांत्वना दी। अर्जुन मुंडा की ओर से पीड़ित परिवारों को अपनी तरफ से 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई।
इस दौरान नेताओं ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को अविलंब मुआवजा और बीमा की राशि उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही यह सवाल भी उठाया कि आखिर घनी आबादी वाले इस इलाके में भारी वाहनों का परिचालन किस व्यवस्था के तहत हो रहा है और उनकी रफ्तार नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए हैं।
स्पीड ब्रेकर तक नहीं, तेज रफ्तार भारी वाहनों से ग्रामीणों में दहशत
हादसे के बाद ग्रामीणों और पड़हा प्रतिनिधियों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संयुक्त पड़हा के संयोजक ने कहा कि घनी आबादी वाले इस इलाके में वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर तक नहीं हैं। बालू और अन्य सामान ढोने वाले भारी वाहन तेज गति से गुजरते हैं। शाम होते ही सड़क पर लोगों के बीच दुर्घटना का डर बना रहता है।
उन्होंने कहा कि इस हादसे में कई परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्यों को खो दिया है। ऐसे परिवारों के सामने अब बच्चों की परवरिश और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सरकार को प्रभावित परिवारों और उनके बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
वहीं, पड़हा राजा ने भारी वाहनों के चालकों की नियमित ड्रिंक एंड ड्राइव जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि जब तक तेज रफ्तार और नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी दुर्घटनाओं को रोकना मुश्किल है।
चार महिलाओं और तीन बच्चों की गई जान, पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव
इस हादसे में चार महिलाओं और तीन बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। मृतकों के शवों को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हादसे में घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया।
खूंटी के एसपी ऋषभ गर्ग ने घटनास्थल और अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मोड़ पर अंधेरा और दृश्यता कम होने के कारण ट्रेलर चालक सड़क किनारे मौजूद लोगों को देख नहीं पाया होगा। हादसे के बाद ट्रेलर चालक और खलासी वाहन छोड़कर फरार हो गए। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन जब्त कर उनकी तलाश शुरू की है।
अब सवालों के घेरे में सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों का परिचालन
खूंटी का यह हादसा सिर्फ सात लोगों की मौत की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में सड़क सुरक्षा की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। आखिर आबादी के बीच से गुजरने वाले भारी वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण क्यों नहीं है? खतरनाक मोड़ों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए? क्या नियमित जांच और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है?
नौ घंटे तक सड़क जाम रहने के बाद भले ही आवागमन शुरू हो गया हो, लेकिन सात मौतों से उपजा दर्द और ग्रामीणों के सवाल अभी खत्म नहीं हुए हैं। अब पीड़ित परिवारों को सरकारी मुआवजा कब मिलता है और दुर्घटनास्थल पर सड़क सुरक्षा के लिए ठोस कदम कब उठाए जाते हैं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

