पेपर फर्जी था या बड़े लीक की साजिश ! अतुल वत्स के कनेक्शन से उत्पाद सिपाही परीक्षा पर फिर उठे सवाल

राँची। झारखण्ड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे एक के बाद एक परीक्षाओं के तार आपस में जुड़ते नजर आ रहे हैं। JSSC CGL और JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता, पेपर लीक और OMR में छेड़छाड़ के आरोपों की जांच के बीच अब उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा भी जांच के दायरे में आती दिख रही है।

मामले में नया मोड़  सीआईडी की पूछताछ में परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल के कर्मी एबाद के कथित स्वीकारोक्ति बयान से आया है। एबाद ने पूछताछ के दौरान जिन लोगों के नाम और सिंडिकेट की गतिविधियों का जिक्र किया, उनमें अतुल वत्स का नाम भी सामने आया है। खास बात यह है कि अतुल वत्स वही व्यक्ति है,जिसे राँची पुलिस ने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े मामले में तमाड़ थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया था।

12 अप्रैल की कार्रवाई से शुरू हुई थी कहानी
उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के एक दिन पहले 12 अप्रैल को राँची पुलिस ने तमाड़ थाना क्षेत्र में छापेमारी की थी। पुलिस के अनुसार, वहां अभ्यर्थियों को एक कथित प्रश्नपत्र रटवाया जा रहा था।जांच में उक्त पेपर फर्जी पाया गया था। कार्रवाई के दौरान बिहार निवासी अतुल वत्स समेत 164 संदिग्धों और अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया था।उस समय राँची पुलिस ने उत्पाद सिपाही परीक्षा में वास्तविक प्रश्नपत्र लीक होने की बात से इनकार किया था। पुलिस का कहना था कि गिरफ्तार किए गए लोग सॉल्वर गैंग से जुड़े थे और अभ्यर्थियों से ठगी के उद्देश्य से कथित तौर पर ऐसा किया जा रहा था।लेकिन अब CID की जांच में सामने आए तथ्यों ने इस पूरे मामले की जांच को एक नई दिशा दे दी है।

एबाद के बयान में अतुल वत्स का नाम
JPSC मेधा घोटाले की जांच के दौरान गिरफ्तार टीडीपीएल कर्मी एबाद ने पूछताछ में परीक्षा में कथित अनियमितता, पेपर लीक और OMR/OSM में छेड़छाड़ से जुड़े एक सिंडिकेट की जानकारी दी है।एबाद के कथित बयान के मुताबिक इस नेटवर्क में TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, ICN के निदेशक मिथिलेश सिंह के अलावा अतुल वत्स, अरविंद कुमार, राजेश सिंह, आदित्य पांडेय, सुनील कुमार, संतोष सिंह, ब्रजेश कुमार, अली, इमरान, अजय संग्राम सिंह, प्रमोद पाठक, कृष्णा यादव और उस्मान समेत कई लोगों के नाम सामने आए हैं।एबाद ने पूछताछ में यह भी स्वीकार किया है कि उसने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में OMR और OSM में कथित टेंपरिंग की थी।

मिथिलेश सिंह से भी जुड़ रहा अतुल वत्स का कनेक्शन
जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक अतुल वत्स का संबंध ICN के निदेशक मिथिलेश सिंह से भी बताया जा रहा है। मिथिलेश सिंह को JSSC CGL परीक्षा के संचालन से जुड़ी एजेंसी Webel Technology ने परीक्षा संचालन के कार्य से जोड़ा था।मिथिलेश सिंह पर अभ्यर्थियों से कथित तौर पर रुपये लेकर उन्हें JSSC CGL परीक्षा पास कराने की कोशिश करने का आरोप है। वह फिलहाल फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।अब एबाद के कथित बयान में अतुल वत्स का नाम आने के बाद जांच एजेंसियां तमाड़ मामले की चार्जशीट में सामने आए तथ्यों और CID की पूछताछ में सामने आई जानकारी का मिलान कर रही हैं।

सिर्फ उत्पाद सिपाही नहीं, दूसरी परीक्षाएं भी जांच के घेरे में
राँची पुलिस की जांच में अतुल वत्स की कथित भूमिका को लेकर दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक से जुड़े इनपुट भी सामने आने की बात कही गई है। इनमें राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा 2017, NEET परीक्षा 2024, बिहार सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी भर्ती परीक्षा 2024, उत्तर प्रदेश समीक्षा अधिकारी-सहायक समीक्षा अधिकारी प्रारंभिक परीक्षा 2024 और उत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती परीक्षा 2024 का जिक्र किया गया है।
हालांकि इन सभी मामलों में अतुल वत्स की भूमिका को लेकर संबंधित जांच एजेंसियों की जांच अभी महत्वपूर्ण है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल—क्या उत्पाद सिपाही का पेपर भी लीक हुआ था?
उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा मामले में अब तक राँची पुलिस का आधिकारिक रुख यही रहा है कि वास्तविक प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था और गिरफ्तार लोग कथित सॉल्वर गैंग से जुड़े थे।
लेकिन दूसरी ओर, CID की जांच में कथित पेपर लीक और परीक्षा में हेराफेरी से जुड़े सिंडिकेट का खुलासा होने तथा उसी नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे अतुल वत्स का नाम उत्पाद सिपाही मामले में सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है।अब पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि तमाड़ में अभ्यर्थियों को जो प्रश्नपत्र रटवाया जा रहा था, वह महज ठगी का हिस्सा था या उसके पीछे किसी बड़े परीक्षा सिंडिकेट की भूमिका थी?

फिलहाल राँची पुलिस और CID सामने आए तथ्यों का मिलान कर रही है। उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में वास्तविक प्रश्नपत्र लीक हुआ था या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेगा।

 

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