सिंदूरदान से पहले दुल्हन ने ठुकराई शादी, परिजनों ने निकाली ‘जीवित बेटी’ की अर्थी; गढ़वा की घटना से हर कोई हैरान
गढ़वा।झारखण्ड के गढ़वा जिले के रमना प्रखंड अंतर्गत बगोंधा टोला में एक शादी समारोह उस समय सनसनीखेज मोड़ पर पहुंच गया, जब दुल्हन ने सिंदूरदान से ठीक पहले विवाह करने से साफ इनकार कर दिया। शादी की लगभग सभी रस्में पूरी हो चुकी थीं, लेकिन युवती के इस फैसले के बाद बारात बिना दुल्हन के लौट गई। घटना के कुछ दिनों बाद परिजनों ने ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी।
मिली जानकारी के अनुसार, बगोंधा टोला निवासी सुखट राम की पुत्री पुष्पा कुमारी का विवाह गढ़वा थाना क्षेत्र के जुबैरिया गांव निवासी दीपक कुमार रवि के साथ तय हुआ था। निर्धारित तिथि पर बारात पूरे उत्साह और धूमधाम के साथ लड़की के गांव पहुंची। दोनों पक्षों की मौजूदगी में जयमाला समेत अधिकांश वैवाहिक रस्में शांतिपूर्वक संपन्न हो गईं।
लेकिन मंडप में सिंदूरदान की बारी आते ही दुल्हन ने अचानक शादी करने से मना कर दिया। उसके इस फैसले से समारोह में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों, रिश्तेदारों, ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उसे समझाने का प्रयास किया। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और युवती को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अपने निर्णय पर अडिग रही। अंततः दूल्हे पक्ष को बिना दुल्हन के ही वापस लौटना पड़ा।
घटना के बाद परिवार गहरे सदमे और सामाजिक अपमान की भावना से गुजरता रहा। कुछ दिनों बाद परिजनों ने प्रतीकात्मक रूप से अपनी जीवित बेटी की शव यात्रा निकालकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।ग्रामीणों के मुताबिक, परिवार ने गांव में अर्थी यात्रा निकाली, जिसके बाद श्मशान पहुंचकर प्रतीकात्मक रूप से अंतिम संस्कार और मुखाग्नि की रस्में भी निभाईं। इस दौरान परिजनों ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि अब उनका बेटी से कोई संबंध नहीं है।
परिजनों का कहना है कि विवाह की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और दोनों पक्षों के सैकड़ों लोग समारोह में शामिल हुए थे। अंतिम क्षण में शादी टूटने से उन्हें सामाजिक, मानसिक और आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसी पीड़ा और आक्रोश में उन्होंने यह कदम उठाया।
गढ़वा जिले की यह अनोखी और भावनात्मक घटना अब गांव से लेकर आसपास के इलाकों तक चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां कुछ लोग परिवार के दर्द को समझने की बात कर रहे हैं, वहीं कई लोग इसे सामाजिक दबाव और बदलती सोच के बीच टकराव के रूप में भी देख रहे हैं।

