रविंद्र गंझू दस्ते को करारा झटका: 9 संगीन मामलों का वांटेड माओवादी मुकेश गंझू गिरफ्तार…हत्या,लेवी और आगजनी के कई मामलों में था फरार
लातेहार। झारखण्ड के लातेहार जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। चंदवा पुलिस ने प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के सक्रिय सदस्य और कुख्यात माओवादी मुकेश गंझू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उसकी गिरफ्तारी को माओवादी कमांडर रविंद्र गंझू दस्ते के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक, चंदवा थाना क्षेत्र के बजरमरी गांव निवासी मुकेश गंझू लंबे समय से पुलिस के रडार पर था। वह चंदवा थाना कांड संख्या 170/23 का मुख्य आरोपी है और उसके खिलाफ हत्या, लेवी वसूली, आगजनी तथा विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने समेत 9 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि वर्ष 2023 में जमुआरी गांव निवासी एवं वन रक्षा समिति के सदस्य प्रद्युम्न यादव की हत्या पुलिस मुखबिरी के आरोप में कर दी गई थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड को माओवादी कमांडर रविंद्र गंझू के निर्देश पर मुकेश गंझू और उसके सहयोगी राजन महंत असुर ने अंजाम दिया था।
मुकेश गंझू पर वर्ष 2022 में चंदवा थाना क्षेत्र के कठपुलिया के पास वाहनों में आगजनी करने का आरोप है। इसके अलावा वर्ष 2023 में लपरा रेलवे पुल निर्माण कार्य के दौरान आग लगाने की घटना में भी उसकी संलिप्तता सामने आई थी।
फरवरी 2024 में सुंदरू सरना टोली में सड़क निर्माण कार्य में लगी जेसीबी मशीन पर फायरिंग करने का आरोप भी उसी पर है। वहीं दुधिमाटी, ललकीटांड़ और बेतर क्षेत्रों में पुल, चेकडैम और सड़क निर्माण कार्यों को रोकने तथा लेवी वसूलने के लिए माओवादी पर्चे छोड़ने की घटनाओं में भी उसका नाम शामिल है।
लातेहार एसपी कुमार गौरव को गुप्त सूचना मिली थी कि पुलिस से बचता फिर रहा मुकेश गंझू अपने गांव बजरमरी पहुंचा है। सूचना मिलते ही एसडीपीओ संदीप कुमार गुप्ता के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से गांव में छापेमारी कर मुकेश गंझू को गिरफ्तार कर लिया। इस अभियान में पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी अशोक कुमार सिंह, बेतर ओपी प्रभारी रितेश कुमार राव तथा जिला पुलिस बल के जवान शामिल थे।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मुकेश गंझू की गिरफ्तारी से क्षेत्र में सक्रिय रविंद्र गंझू दस्ते की गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ेगा। सुरक्षा एजेंसियां अब उसके नेटवर्क और अन्य सहयोगियों के बारे में भी जानकारी जुटाने में लगी हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

