झारखण्ड सरकार का बड़ा फैसला: खजाने में फर्जीवाड़े पर कार्रवाई, 3 साल से जमे कर्मियों का होगा तबादला, मुख्य सचिव ने जारी किया आदेश

 

राँची।झारखण्ड सरकार ने राज्य के विभिन्न जिलों में ट्रेजरी (कोषागार) के माध्यम से वेतन मद में हो रही अवैध निकासी और वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए एक कड़ा रुख अपनाया है।मुख्य सचिव अविनाश कुमार द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र में सभी विभागों और डीसी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे.वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करें।

क्या है पूरा मामला?

सरकार के संज्ञान में यह बात आई है कि राज्य के विभिन्न कार्यालयों में वेतन के नाम पर खजाने से अवैध निकासी की जा रही है। जांच में पाया गया है कि, कर्मचारी डिटेल के साथ छेड़छाड़ की गई है।फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी धन की निकासी की गई है।सरकारी राशि को अवैध रूप से अन्य निजी खातों में ट्रांसफर किया गया है।

3 साल से जमे कर्मियों का होगा अनिवार्य तबादला:

सरकार ने माना है कि एक ही स्थान पर लंबे समय तक जमे रहने के कारण इस तरह के भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।इसलिए, मुख्य सचिव ने आदेश दिया है कि ऐसे सभी सीनियर एकाउंट्स असिस्टेंट, लेखा सहायक, लेखा अधीक्षक, लेखापाल और बिल क्लर्क जो एक ही कार्यालय में तीन वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत हैं, उनका तुरंत तबादला किया जाए।

संविदा कर्मियों पर पाबंदी:

संविदा या एकमुश्त मानदेय पर काम कर रहे कंप्यूटर ऑपरेटरों को वित्तीय कार्यों से पूरी तरह दूर रखा जाए।सरकार ने इस मामले में केवल निर्देश ही नहीं दिए हैं, बल्कि जवाबदेही भी तय की है।सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इन नियमों के पालन की विस्तृत रिपोर्ट 30 मई अनिवार्य रूप से वित्त विभाग को उपलब्ध कराएं।

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