जगन्नाथपुर मंदिर हत्याकांड का खुलासा: 3 लाख से अधिक की चोरी में एक को एक लाख और दूसरे साथी को सिर्फ 11 हजार मिले, वारदात के बाद भगवान से भी मांगी माफी–
–विकास महली और रचित उर्फ देव कुमार निकले मास्टरमाइंड, मृतक सभी को पहचानता था, इसलिए कर दी उसकी हत्या

प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए एसएसपी,सिठी एसपी और ग्रामीण एसपी
राँची।राजधानी राँची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में सुरक्षा प्रहरी बिरसा मुण्डा की हत्या और दान पेटी से नकदी लूट के सनसनीखेज मामले का एसएसपी राकेश रंजन के मॉनिटरिंग में सिटी एसपी के नेतृत्व में राँची पुलिस ने 24 घंटे के अन्दर खुलासा कर दिया है। इस पूरे कांड के मास्टरमाइंड विकास महली और देव कुमार उर्फ रचित कुमार निकले हैं, जिन्होंने पैसों की लालच में सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया।
एसआईटी की जांच में सामने आया कि तीनों आरोपी रचित, विकास और आयुष मंदिर के पास की बस्ती के रहने वाले हैं और दान पेटी में जमा पैसे पर उनकी नजर थी। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी रचित कुमार का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वह पहले भी कई मामलों में जेल जा चुका है। जमानत पर बाहर आने के बाद वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। कुछ समय के लिए बाहर कमाने भी गया, लेकिन असफल रहा। इसी दौरान विकास महली ने उसे प्लान दिया।जगन्नाथपुर मंदिर की दान पेटी में बड़ी रकम जमा है, जिसे चोरी कर आसानी से पैसा हासिल किया जा सकता है। देव कुमार उर्फ रचित कुमार ने पूरी वारदात में अहम भूमिका निभाई। वही मंदिर के अंदर घुसा और सो रहे सुरक्षा प्रहरी बिरसा मुण्डा के सिर पर रॉड से वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसी ने दान पेटी तोड़कर पूरी नकदी निकाली और उसका बड़ा हिस्सा अपने पास रख लिया।
आयुष कुमार दत्ता की भूमिका सहयोगी की रही। वह मंदिर के बाहर सीढ़ी लगाकर खड़ा रहा, जिससे रचित अंदर घुस सका और बाहर निकल सका। हालांकि, उसे इस वारदात में सिर्फ 11 हजार रुपये ही दिए गए। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में रचित ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि दान पेटी से पैसे निकालने के बाद उसने मंदिर में ही भगवान जगन्नाथ से अपने अपराध के लिए माफी भी मांगी थी।
सोते प्रहरी पर हमला, फिर आराम से पैसे दान पेटी से किए चोरी
योजना के तहत तीनों आरोपी मंदिर पहुंचे। आयुष कुमार दत्ता बाहर सीढ़ी लगाकर निगरानी करता रहा, जबकि रचित अंदर घुस गया। मंदिर का सुरक्षा प्रहरी बिरसा मुण्डा उस समय सो रहा था। इसी दौरान रचित ने लोहे की रॉड से उसके सिर पर वार कर हत्या कर दी, ताकि पहचान उजागर न हो सके। हत्या के बाद दान पेटी तोड़ी और उसमें रखी पूरी नकदी निकाल ली।
लूट के पैसों का बंटवारा भी ‘अन्यायपूर्ण’
लूट की रकम 3 लाख रुपये से अधिक थी। इसमें से रचित ने करीब 1 लाख रुपये विकास महली को दिए, जबकि सीढ़ी लगाने वाले आयुष को सिर्फ 11 हजार रुपये ही मिले। बाकी पूरी रकम रचित ने अपने पास रख ली।
हत्या के बाद कपड़े बदले, मामा के घर छिपा
वारदात के बाद रचित ने अपने खून लगे कपड़े बदलकर नए कपड़े खरीदे और सीधे अपने मामा के घर जाकर छिप गया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर खून लगे कपड़े, पत्थर और नकदी बरामद कर ली है। एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर गठित एसआईटी टीम ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सभी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।
आरोपियों के पास से ये हुआ बरामद
– 3,00,977 रुपये नकद
– खून लगा पत्थर
– घटना के समय पहने कपड़े
– ताला तोड़ने के औजार
– नए कपड़े और खरीद की रसीद
‘मास्टरमाइंड का क्राइम रिकॉर्ड’
देव कुमार उर्फ रचित कुमार:
2025: जगन्नाथपुर थाना – गंभीर आपराधिक मामला
2024: चोरी के दो अलग-अलग केस (जगन्नाथपुर व विधानसभा थाना)
2020: धुर्वा थाना – चोरी व ताला तोड़ने का मामला
विकास महली:
2025: सुखदेव नगर थाना – गंभीर अपराध व पॉक्सो एक्ट के तहत केस

