गुमला की मासूम 7 साल बाद भी नहीं मिली, मामले को लेकर हाईकोर्ट सख्त

 

राँची।झारखण्ड के गुमला जिला से वर्ष 2018 में लापता हुई 6 वर्षीय बच्ची के मामले में झारखण्ड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को अंतिम चेतावनी दी है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर दो सप्ताह के भीतर जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी, तो मामले को सीबीआई को सौंपने पर विचार किया जाएगा।इस अहम सुनवाई की जानकारी देते हुए झारखण्ड हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने बताया कि खंडपीठ ने मामले में अब तक की सुस्त जांच पर गहरी नाराजगी जताई।कोर्ट ने कहा कि सितंबर 2018 से बच्ची लापता है लेकिन 7 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उसे बरामद नहीं किया जा सका है, जो बेहद गंभीर स्थिति है।

इस सुनवाई के दौरान राज्य की डीजीपी वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में उपस्थित हुईं और जांच की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया।वहीं गुमला के एसपी से भी कोर्ट ने सीधे सवाल पूछे। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि जांच में कोई खास प्रगति नहीं हुई है, जिस पर नाराजगी व्यक्त की।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर विस्तृत और संतोषजनक जवाब दाखिल किया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है।

दरअसल, गुमला की रहने वाली चंद्रमुनि उराइन ने अपनी 6 वर्षीय लापता बेटी की बरामदगी के लिए हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की है। पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि मामले की गहराई से जांच के लिए 2023 में एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया था।एसआईटी ने दिल्ली सहित कई जगहों पर छानबीन की, बच्ची की तस्वीरें भी व्यापक स्तर पर प्रसारित की गईं लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली. हालांकि, एसआईटी की कार्रवाई के दौरान 9 अन्य लापता बच्चों को बरामद किया गया था लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है।

error: Content is protected !!