अमर प्रेम की मार्मिक कहानी, पत्नी की मौत के दो घंटे बाद बुजुर्ग पति ने तोड़ा दम…
पलामू। झारखण्ड के पलामू जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। पाटन प्रखंड के सगुना पंचायत में एक बुजुर्ग दंपति का कुछ ही घंटों के अंतराल में निधन हो गया।पत्नी की मौत के दो घंटे बाद ही पति ने भी दम तोड़ दिया इस घटना को लोग सच्चे प्रेम और अटूट रिश्ते की मिसाल के रूप में देख रहे हैं।जानकारी के अनुसार, सगुना पंचायत के पूर्व मुखिया अखिलेश पांडेय की 82 वर्षीय माता रूपन देवी की तबीयत बुधवार रात करीब 8:30 बजे अचानक बिगड़ गई।परिवार के लोग तुरंत उन्हें मेदिनीनगर शहर के नावाटोली स्थित नारायणा अस्पताल लेकर पहुंचे।वहां डॉक्टरों की टीम ने उनकी हालत गंभीर देखते हुए वेंटिलेटर पर रखा।
अस्पताल में डॉक्टर गौरव अग्रवाल की देखरेख में रूपन देवी का इलाज चल रहा था। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।करीब 20 मिनट तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद रात करीब 10:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।परिवार के लिए यह एक बड़ा सदमा था।
रूपन देवी के निधन के बाद परिवार जब उनका पार्थिव शरीर लेकर घर पहुंचा, तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया।इस बीच 90 वर्षीय युगेश्वर पांडेय, जो रूपन देवी के पति थे, पत्नी की मौत का सदमा सहन नहीं कर पाए। बताया जा रहा है कि वे गहरे शोक में चले गए थे।और पत्नी के निधन के करीब दो घंटे बाद, यानी रात करीब 12:30 बजे, युगेश्वर पांडेय को अचानक दिल का दौरा पड़ा।परिवार के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही उन्होंने भी दम तोड़ दिया।इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
गुरुवार को इस बुजुर्ग दंपति की एक साथ अंतिम यात्रा निकाली गई।यह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। गांव और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। हर किसी की आंखें नम थीं और लोग इस प्रेम कहानी को याद कर भावुक हो रहे थे।
दोनों का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव साकनपीढ़ी स्थित जिंजोई नदी तट पर किया गया। परिजनों ने पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया ।इस दौरान गांव के लोग और रिश्तेदार बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
यह घटना पूरे पलामू जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इस बुजुर्ग दंपति के रिश्ते को सच्चे प्रेम का उदाहरण बता रहे हैं।कई लोग इसे “अमर प्रेम” की संज्ञा दे रहे हैं, जहां एक जीवनसाथी के जाने के बाद दूसरा भी अधिक समय तक जीवित नहीं रह सका।
युगेश्वर पांडेय और रूपन देवी का यह साथ जीवनभर का था, जो मृत्यु के बाद भी एक साथ समाप्त हुआ। इस घटना ने यह दिखा दिया कि सच्चा प्रेम उम्र का मोहताज नहीं होता।यह कहानी लोगों के दिलों में लंबे समय तक जिंदा रहेगी और रिश्तों की गहराई को समझने का एक भावुक संदेश देगी।

