114वें दुर्गोत्सव की तैयारियों का आगाज, हिनू बंगाली मंडप में विधि-विधान से हुआ भूमि एवं खुटी पूजन

राँची। राजधानी राँची के हिनू स्थित बंगाली मंडप में शुक्रवार को 114वें दुर्गोत्सव की तैयारियों का विधिवत शुभारंभ हो गया। बंगाली विधि-विधान और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भूमि पूजन एवं खुटी पूजन संपन्न कराया गया। इसके साथ ही मां दुर्गा के भव्य स्वागत को लेकर पूजा समिति की तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू हो गईं।

हिनू पूजा कमेटी बंगाली मंडप की स्थापना वर्ष 1913 में हुई थी। पिछले 113 वर्षों से यह आयोजन राँची में बंगाली समाज की धार्मिक आस्था, संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। इस वर्ष होने वाला 114वां दुर्गोत्सव भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुरूप आयोजित करने की तैयारी है।

शुक्रवार को आयोजित भूमि पूजन और खुटी पूजन के दौरान विधिवत पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान आगामी दुर्गोत्सव के शांतिपूर्ण, सफल और भव्य आयोजन की कामना की गई। पूजा के दौरान मंडप परिसर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। समिति के सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग भी इस अवसर पर मौजूद रहे।भूमि पूजन एवं खुटी पूजन को दुर्गा पूजा की तैयारियों की महत्वपूर्ण पारंपरिक शुरुआत माना जाता है। इसी के साथ पूजा पंडाल निर्माण समेत अन्य तैयारियों का सिलसिला भी आगे बढ़ेगा।

1913 से जारी है आस्था और परंपरा का सफर
हिनू पूजा कमेटी बंगाली मंडप का दुर्गोत्सव राँची की पुरानी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। वर्ष 1913 में शुरू हुई यह पूजा आज भी अपनी पारंपरिक पहचान और बंगाली रीति-रिवाजों को संजोए हुए है। समिति के सदस्यों का कहना है कि 114वां दुर्गोत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि रांची की सांस्कृतिक विरासत और बंगाली समाज की गौरवशाली परंपरा का उत्सव भी है।

समिति की ओर से बताया गया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी मां दुर्गा की पूजा पारंपरिक विधि-विधान और धार्मिक आस्था के अनुरूप की जाएगी। पूजा को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

भूमि पूजन एवं खुटी पूजन के अवसर पर हिनू पूजा कमेटी के संयोजक विनय गांगुली के अलावा तुषार रंजन रॉय, सुमन मुखर्जी, पिनाकी, भूलोक सरकार, सौमिक दास, कौशिक चंद्र, आलोक मित्र, पार्थो गोस्वामी, सोमीत्र कुमार पाल और दीप समेत समिति के अन्य सदस्य एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

1913 में शुरू हुई आस्था और संस्कृति की इस यात्रा का एक और अध्याय इस वर्ष 114वें दुर्गोत्सव के रूप में जुड़ने जा रहा है। भूमि एवं खुटी पूजन के साथ ही हिनू बंगाली मंडप एक बार फिर मां दुर्गा के स्वागत के लिए तैयारियों में जुट गया है।

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