पेड़ के नीचे लावारिस मिली नवजात बच्ची, कुत्तों के झुंड से पहले पहुंची इंसानियत

–राँची रेलवे ऑफिसर्स कॉलोनी में सुबह-सुबह मचा हड़कंप, मॉर्निंग वॉक पर निकले युवक ने सुनी रोने की आवाज तो सामने आया रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर

राँची। राजधानी राँची में गुरुवार की सुबह इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया। राँची रेलवे स्टेशन के सामने स्थित सेरसा स्टेडियम के ठीक सामने वाली गली, रेलवे ऑफिसर्स कॉलोनी में सुबह करीब 5:30 बजे एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में पेड़ के नीचे पड़ी मिली। बच्ची कपड़े में लिपटी हुई थी और हल्की-हल्की रोने की आवाज निकाल रही थी।सुबह की खामोशी के बीच नवजात की रोने की आवाज ने एक युवक का ध्यान अपनी ओर खींचा। युवक मॉर्निंग वॉक के लिए निकला था। आवाज का पीछा करते हुए जब वह पेड़ के पास पहुंचा तो वहां का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए। पेड़ के नीचे कपड़े में लिपटी एक नवजात बच्ची पड़ी थी।युवक ने तत्काल आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी। कुछ ही देर में वहां लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस भी मौके पर पहुंची और बच्ची को अपने संरक्षण में लेकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया।

कुछ मिनट की देरी पड़ सकती थी भारी
स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस जगह बच्ची मिली, वहां अक्सर आवारा कुत्तों का जमावड़ा रहता है। ऐसे में यदि समय रहते किसी की नजर बच्ची पर नहीं पड़ती, तो हालात बेहद भयावह हो सकते थे।मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने बच्ची को सुरक्षित देखकर राहत की सांस ली। लोगों का कहना था कि जिस वक्त मासूम को इंसान की जरूरत थी, उसी वक्त एक युवक की नजर उस पर पड़ गई और उसकी जान बच गई।लोगों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा रही कि आखिर एक माँ अपने कलेजे के टुकड़े को इस तरह सुनसान जगह पर छोड़कर कैसे चली गई? क्या मजबूरी थी? या फिर किसी परिजन ने नवजात को यहां लाकर छोड़ दिया? इन सवालों का जवाब फिलहाल जांच के बाद ही सामने आएगा।

आरपीएफ-पुलिस की तत्परता से अस्पताल पहुंची बच्ची
नवजात के मिलने की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस की टीम सक्रिय हुई। पुलिसकर्मियों ने बिना समय गंवाए बच्ची को वहां से उठाया और प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में बच्ची का इलाज चल रहा है। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। बच्ची को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

कौन छोड़ गया मासूम,CCTV में तलाश रही पुलिस जवाब
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नवजात बच्ची को इतनी सुबह पेड़ के नीचे कौन छोड़कर गया।पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। रेलवे ऑफिसर्स कॉलोनी के प्रवेश और निकास मार्गों के साथ आसपास के इलाकों में लगे कैमरों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।इसके अलावा पुलिस आसपास के अस्पतालों और नर्सिंग होम से हाल के दिनों में हुए प्रसव से जुड़ी जानकारी जुटाने की भी कोशिश कर रही है, ताकि बच्ची के परिजनों तक पहुंचा जा सके।

माँ की मजबूरी या परिजनों की बेरहमी..
नवजात के मिलने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या बच्ची की माँ किसी मजबूरी में उसे छोड़ने पर मजबूर हुई, क्या परिवार ने सामाजिक डर, आर्थिक परेशानी या किसी अन्य कारण से यह कदम उठाया या फिर किसी और व्यक्ति ने बच्ची को यहां लाकर छोड़ दिया।फिलहाल इन सवालों के जवाब पुलिस जांच में तलाशे जा रहे हैं। किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।

हालांकि, इस पूरी घटना में एक बात बेहद महत्वपूर्ण रही जिस मासूम को उसके अपनों ने खुले आसमान के नीचे छोड़ दिया, उसे एक अजनबी की नजर ने जिंदगी दे दी।सुबह की उस खामोश गली में गूंजती नवजात की हल्की-सी रोने की आवाज शायद उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी पुकार थी। अच्छी बात यह रही कि वह पुकार सही समय पर किसी इंसान तक पहुंच गई।अब पुलिस की जांच पर सबकी नजर है कि आखिर इस मासूम को यहां छोड़ने वाला कौन था और उसके पीछे की असली कहानी क्या है।

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