हाईकोर्ट से राहत नहीं, PMLA कोर्ट में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप तय; अब ट्रायल की बारी
राँची। झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े बड़गाईं जमीन मामले में बुधवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया।राँचीकी विशेष PMLA अदालत ने 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय कर दिए। कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए।आरोप तय होने के साथ ही यह मामला अब ट्रायल के अगले चरण में पहुंच गया है। इस दौरान गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे और मामले से जुड़े साक्ष्यों की न्यायिक जांच होगी।
8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला
यह मामला राँची के बड़गाईं इलाके की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री, कब्जे और रिकॉर्ड में हेरफेर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच की थी। झारखण्ड हाईकोर्ट के 18 सितंबर के आदेश में भी ED की जांच और इस जमीन से जुड़े आरोपों का उल्लेख है।
PMLA कोर्ट पहले ही मामले के 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर चुकी थी। हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय होने के बाद अब मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली रोक
इसी मामले में बुधवार को झारखण्ड हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई। हेमंत सोरेन की ओर से निचली अदालत में चल रही आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद विशेष PMLA अदालत में आरोप तय करने का रास्ता साफ हुआ।इससे पहले सोरेन की ओर से मामले में राहत और कार्यवाही रोकने को लेकर कई कानूनी प्रयास किए गए थे। 18 सितंबर को हाईकोर्ट ने उनकी एक याचिका खारिज कर दी थी।
आरोप तय होने के बाद मामला ट्रायल की ओर बढ़ेगा। अब अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा जाएगा। बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

