25 लाख के इनामी नक्सली की पत्नी ने छोड़ी बंदूक, गिरिडीह पुलिस के सामने किया सरेंडर; बोली- शोषण और हिंसा से टूट गया भरोसा….

गिरिडीह।पारसनाथ जोन में नक्सल विरोधी अभियान के बीच गिरिडीह पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। भाकपा (माओवादी) की एरिया कमेटी सदस्य अनिता किरस्कू उर्फ बबिता ने झारखण्ड सरकार की आत्मसमर्पण नीति “नई दिशा-एक नई पहल” से प्रभावित होकर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
बबिता ने पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी अभिनव आनंद और अपर पुलिस अधीक्षक सुरजीत कुमार की मौजूदगी में पुलिस केंद्र, गिरिडीह में सरेंडर किया।
सबसे अहम बात यह है कि बबिता 25 लाख रुपये के इनामी माओवादी कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर की पत्नी है, जिसे गिरिडीह पुलिस ने तीन दिन पहले ही गिरफ्तार किया था। पति की गिरफ्तारी के बाद बबिता ने भी हथियारों का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
पूछताछ में बबिता ने बताया कि वर्ष 2009 में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान वह माओवादी संगठन के संपर्क में आई थी। वर्ष 2017 में उसने जंगल में अजय महतो से शादी की। संगठन में रहते हुए उसे लेवी वसूली, ग्रामीणों में दहशत फैलाने और अन्य गतिविधियों में लगाया गया।
हालांकि, समय के साथ संगठन की अंदरूनी सच्चाई उसके सामने आने लगी। बबिता का कहना है कि शीर्ष कमांडरों द्वारा लगातार शोषण, उत्पीड़न और बेवजह ग्रामीणों के साथ मारपीट ने उसे भीतर तक झकझोर दिया। पति की गिरफ्तारी के बाद उसका मनोबल पूरी तरह टूट गया और उसने संगठन से नाता तोड़ने का निर्णय ले लिया।पुलिस के अनुसार, बबिता के खिलाफ हत्या, लूट, विस्फोटक अधिनियम, यूएपीए और आर्म्स एक्ट समेत करीब 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
एसपी डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि यह आत्मसमर्पण पारसनाथ, गिरिडीह, बोकारो, कोल्हान और सिंहभूम क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे अन्य नक्सली भी हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित होंगे।

