जेपीएससी गड़बड़ी मामला: पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते ने बिंसिस टेक्नोलॉजी से भी की थी 2 करोड़ और 20% कमीशन की डील, मुंबई से गिरफ्तार निदेशक को आज लेगी सीआईडी रिमांड पर

-सीआईडी की जांच में हुआ एक और बड़ा खुलासा, मास्टरमाइंड कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र ने तय कराई थी दूसरी एजेंसी से भी सेटिंग, ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी न देने वाले 479 अभ्यर्थी भी रडार पर
राँची।झारखण्ड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में हुई धांधली और अनियमितताओं की पड़ताल कर रही सीआईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस बहुचर्चित घोटाले में नए और बेहद चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सीआईडी अनुसंधान में अब यह बात साफ होकर सामने आई है कि भ्रष्टाचार की जड़ें आयोग के शीर्ष स्तर तक गहराई से फैली हुई थीं। जांच एजेंसी को मिली ताजा और महत्वपूर्ण जानकारी के मुताबिक, जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते ने परीक्षा संचालन का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी टीडीपीएल के अलावा एक और बैकडोर कंपनी बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को आयोग में अवैध प्रवेश दिलाने के लिए साठगांठ की थी। यह सौदा बेहद भारी-भरकम राशि पर तय हुआ था। पूर्व चेयरमैन पर आरोप है कि उन्होंने बिंसिस टेक्नोलॉजी को जेपीएससी का काम सौंपने के एवज में 2 करोड़ की एकमुश्त राशि और कुल भुगतान का 20 प्रतिशत कमीशन तय किया था। इससे पहले टीडीपीएल के साथ भी ठीक इसी तरह की डील का पर्दाफाश हुआ था। इस नए इनपुट और खुलासे के बाद सीआईडी की जांच का दायरा अब काफी व्यापक हो गया है, क्योंकि यह साफ हो गया है कि परीक्षाओं में सुनियोजित तरीके से गड़बड़ी कराने के लिए पूर्व चेयरमैन के कार्यकाल में एक से अधिक बाहरी एजेंसियों को अनुचित तरीके से एंट्री दिलाई गई थी।
मुंबई से दबोचा गया बिंसिस टेक्नोलॉजी का निदेशक, सीआईडी लेगी रिमांड पर
मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए रांची पुलिस ने बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अरुण शर्मा को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। अरुण शर्मा पूर्व में जेएसएससी द्वारा संचालित परीक्षा में गड़हड़ी मामले का भी आरोपी है। रांची पुलिस आरोपी निदेशक को लेकर सोमवार को राँची पहुंची। जेपीएससी धांधली में इस नई एजेंसी के जुड़ने और इसके निदेशक की गिरफ्तारी के बाद सीआईडी अब अरुण शर्मा को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की तैयारी में है। पूछताछ के दौरान सीआईडी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि बिंसिस टेक्नोलॉजी को जेपीएससी में क्या-क्या काम सौंपे गए थे और डील की रकम का लेन-देन किन माध्यमों से हुआ।
कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र ही था पूरी डील का मास्टरमाइंड
सीआईडी के अनुसंधान में इस पूरे घालमेल के सूत्रधार का चेहरा भी पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। जांच में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते और परीक्षा एजेंसियों के बीच करोड़ों रुपये की इस डील को सेट कराने वाला मुख्य मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि पूर्व चेयरमैन का कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार था। धांधली की पटकथा लिखने और रिश्वत की रकम तय कराने में धर्मेंद्र कुमार की केंद्रीय भूमिका रही है। उसने ही चेयरमैन के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए टीडीपीएल और बिंसिस टेक्नोलॉजी जैसी कंपनियों के साथ बैकडोर टेबल टॉक आयोजित कराई और सौदेबाजी को अंजाम तक पहुंचाया। उल्लेखनीय है कि सीआईडी टीडीपीएल से जुड़ी सेटिंग और गड़बड़ियों के आरोप में धर्मेंद्र कुमार को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब बिंसिस टेक्नोलॉजी के निदेशक अरुण शर्मा और कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र को आमने-सामने बिठाकर भी पूछताछ की जा सकती है, जिससे कई अन्य प्रभावशाली सफेदपोशों के नाम सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी न देने वाले 479 अभ्यर्थी सीआईडी के रडार पर, होगी सख्त कार्रवाई
जेपीएससी परीक्षा धांधली मामले में एक तरफ जहां एजेंसियों और अफसरों की गर्दन कस रही है, वहीं दूसरी ओर फर्जीवाड़े के बल पर सफलता हासिल करने वाले अभ्यर्थियों पर भी सीआईडी का शिकंजा कसता जा रहा है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए सीआईडी ने पूर्व में परीक्षा में शामिल हुए कुल 2,204 अभ्यर्थियों से अपनी-अपनी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी जांच के लिए जमा करने की अपील की थी। हालांकि, सीआईडी की इस अपील और सख्त निर्देश के बावजूद 2,204 अभ्यर्थियों में से महज 1,725 अभ्यर्थियों ने ही अपनी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी सीआईडी को उपलब्ध कराई है। शेष 479 अभ्यर्थियों ने अब तक अपनी कार्बन कॉपी जमा नहीं की है, जिससे उन पर जांच एजेंसी का संदेह गहरा गया है।
संदेह के घेरे में आए अभ्यर्थियों की बन रही सूची
सीआईडी अब उन सभी अभ्यर्थियों के नामों को चिन्हित कर सूची तैयार कर रही है, जिन्होंने अपनी ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी जांच टीम को नहीं सौंपी है। सीआईडी अधिकारियों का मानना है कि जिन अभ्यर्थियों के अंक में हेरफेर की गई है या जिनकी ओएमआर शीट में साठगांठ कर बाद में बदलाव किए गए हैं, वही अभ्यर्थी अपनी कार्बन कॉपी देने से कतरा रहे हैं। जांच एजेंसी जल्द ही इन चिन्हित अभ्यर्थियों को समन भेजकर पूछताछ के लिए तलब करेगी। अभ्यर्थियों को सीआईडी के समक्ष यह स्पष्ट जवाब देना होगा कि उन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी कार्बन कॉपी क्यों जमा नहीं की। यदि कोई अभ्यर्थी संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है या साक्ष्य छुपाने की कोशिश करता पाया जाता है, तो सीआईडी उसे धांधली का षड्यंत्रकारी हिस्सा मानते हुए उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगी।

