पहले पत्नी, अब पति की सांप के डसने से मौत… चतरा के बामी गांव में पसरा मातम
चतरा। झारखण्ड के चतरा जिले के एक गांव में मोबाइल नेटवर्क और आवागमन की सुविधा का अभाव एक व्यक्ति की जिंदगी पर भारी पड़ गया। जहरीले करैत सांप के डसने के बाद 50 वर्षीय बौध भारती को समय पर इलाज नहीं मिल सका। गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं था और रात के अंधेरे में अस्पताल पहुंचने के लिए कोई साधन भी उपलब्ध नहीं था। नतीजा यह हुआ कि परिवार के लोग चाहकर भी समय पर मदद नहीं जुटा सके और बौध भारती ने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह हृदयविदारक घटना प्रतापपुर थाना क्षेत्र की जोगियारा पंचायत के बामी गांव की है। जानकारी के अनुसार, बौध भारती (50), पिता दीना भारती, रात में अपने घर में सो रहे थे। इसी दौरान एक जहरीले करैत सांप ने उनकी गर्दन पर डस लिया। सांप के काटते ही उनकी हालत बिगड़ने लगी और परिवार के लोगों के सामने उन्हें बचाने की चुनौती खड़ी हो गई।
न नेटवर्क, न एंबुलेंस को फोन करने का रास्ता
सांप के डसने के बाद परिवार के लोग तत्काल मदद जुटाना चाहते थे, लेकिन गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण वे किसी डॉक्टर, एंबुलेंस या रिश्तेदार से संपर्क नहीं कर सके। रात का समय होने के कारण मुश्किलें और बढ़ गईं। गांव से अस्पताल तक पहुंचने के लिए परिवहन का कोई साधन उपलब्ध नहीं था। ऐसे में परिवार के लोग समय रहते उन्हें इलाज के लिए ले जाने की व्यवस्था नहीं कर पाए।उधर, जहरीले सांप के काटने के बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने के कारण बौध भारती की मौत हो गई। जिस समय उन्हें तत्काल इलाज और मदद की जरूरत थी, उस समय गांव में संचार और परिवहन की कमी सबसे बड़ी बाधा बन गई।
पहले पत्नी की भी सांप के काटने से हुई थी मौत
इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। मृतक की बहू के अनुसार, कुछ साल पहले बौध भारती की पत्नी की मौत भी सांप के काटने से ही हुई थी। अब परिवार ने एक बार फिर इसी तरह की त्रासदी झेली है। घर में मातम पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर उठे सवाल
बामी गांव की इस घटना ने दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन व्यवस्था की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपात स्थिति में एक फोन कॉल भी जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है, लेकिन नेटवर्क नहीं होने पर ग्रामीणों के सामने मदद मांगने का रास्ता तक बंद हो जाता है। वहीं, रात के समय अस्पताल पहुंचने का साधन नहीं मिलना संकट को और गंभीर बना देता है।
बौध भारती की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन ग्रामीणों की परेशानी की भी तस्वीर है, जिन्हें आज भी आपातकालीन स्थिति में बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। गांव में बेहतर नेटवर्क, त्वरित स्वास्थ्य सहायता और आवागमन की व्यवस्था होती, तो शायद परिवार को समय रहते मदद जुटाने का मौका मिल सकता था। हालांकि, समय पर इलाज मिलने की स्थिति में उनकी जान बच सकती थी या नहीं, यह चिकित्सकीय रूप से निश्चित नहीं कहा जा सकता। फिलहाल इस घटना से पूरे गांव में शोक और दहशत का माहौल है।

